12
हिंद महासागर में छोढा-सा हिंदुस्तान
यातरा पर मैं दिल्ली से 15 जुलाई को, बंबई (मुंबई) से 16 जुलाई को और नैरोबी से 17 जुलाई को मॉँरिशस के लिए रवाना हुआा इधर से जाते समय नैरोबी (केन्या) की दुनिया में मुझे एक रात और दो दिन ठहरने का मौका मिल गया। अतएव मन में यह लोभ जग गया कि मॉरिशस के भारतीयों और अफ्रीकियों से मिलने के पूर्व हमें अफ़रीका के शेरों स मुलाकात कर लेनी चाहिए जहाज (विमान) दूसे दिन शाम को मिलने वाला था। अतएव, हम जिस दिन नैरोबी पहुचे, उसी दिन नेशनल पा्क में घूमे
को निकल गए।
नैरोबी का नेशनल पार्क चिड़ियाघर नहीं है। शहर से बाहर बहुत बड़ा जंगल है, जिसमे घास अधिक, पेड़ बहुत कम हैं लेकिन जंगल में सवंत्र अच्छी सड़े बिछी हुई हैं और पर्यटकों की गाड़ियाँ उन पर दौड़ती ही रहती हैं हमारी गाड़ी को भी काफ़ी देर तक दौड़ना पड़ा, मगर सिंह कहीं भी दिखाई नहीं पड़ी। एक जगह सड़क पर दो मोटे खड़ी थीं और उन पर तरह-तरह के बंदर और लंगूर चढे हुए थे पर्यटक लोग इन बंदरों को कभी-कभी फल या बिस्कुट खाने को दे देतेहै। अतएव मोटर के रुूकते
ही बंदर उसे घेर लेते हैं।
बड़ दूरी तय करने के बाद या यों कहिए कि दस-बीस मील के भीतर हर सड़क छान लेने के बाद, हम उस जगह जा पहुँचे, जहाँ सिंह उस दिन आराम कर रहे थे वहाँ जो कुछ देखा, वह जन्मभर कभी नहीं भूलेगा। कोई सात-आठ सिंह लेटे या सोए हुए थे और उन्हेंघेरकर आठ-दस मोटे खड़ी थीं तरा यह कि सिंहों को यह जानने की कोई इच्छा ही नहीं थी कि हमें देखने को आने वाले लोग कौन हैं? मोटरों और शीशे
चढ़ाकर उनके भीतर बैठे लोगों की ओर सिहों ने कभी भी दृष्टिपात नहीं किया, मानो हम लोग तुच्छातितुच्छ हों और उनकी नज़र में आने के योग्य बिल्कुल नहीं हों। हम लोग वहाँ आधा घंटा ठहरे होंगे। इस बीच एक सिंह ने उठकर जम्हाई ली, दूसरे ने देह को ताना, मगर हमारी ओर किसी भी सिंह ने नज़र नहीं उठाईं हम लोग पेड़-पौधे और
खरपात से भी बदतर समझे गए।
इतने में कोई मील-भर की दूरी पर हिरनों का एक झुंड दिखाई पड़ा, जिनके बीच एक जिराफ बिल्कुल बेवकूफ की तरह खड़ा था अब दो जवान सिंह उठे और दो ओर चल दिए। एक तो थोड़ा-सा आगे बढ़कर एक जगह बैठ गया, लेकिन दूसरा घास के बीच छिपता हुआ मोर्े पर आगे बढ़े लगा।
हिरनों के झुंड ने ताड़ लिया कि उन पर सिंहों की नज़र पड़ रही है। अतएव वे चरना भूलकर चौकन्े हो उठे फिर ऐसा हुआ कि झुड से छूटकर कुछ हिरन एक तरफ़ को भाग निकले, मगर बाकी जहाँ-के-तहाँ ठिठके खड़े रहे बाकी हिरन ठिठके हुए इसलिए खड़े थे कि सिंह उन्हें देख रहे थे और सहज प्रृति हिरनों को यह समझा रही थी कि खतरा किसी भी तरफ़ भागनेमें हो सकता है शिकार सिंह सूयास्त के बाद किया करतेहैं और शिकार वे झुंड का नहीं करते, बल्क उस जानवर का करते हैं जो भागते हुए झुंड से पिछड़ जाता है अब यह बात समझ में आई कि हिरन भागने को निरापद नहीं समझकर एक गोल में क्यों खड़े थे।
मुझे ऐसा महसूस हो रहा था क मेरा रक्तचाप बढ़ रहा है अतएव मैने तय कर लिया कि अब घर लौटना चाहिए।
नैरोबी से मॉरिशस तक हम बी.ओ.ए.सी. के जहाज में उड़ी जहाज नैरोबी से चार बजे शाम को उड़ा और पाँच घंटों की निरंतर उड़ान के बाद जब वह मॉरिशस पहुँचा, तब वहाँ रात के लगभग दस बज रहे थे रात थी, अँधेरा था, पानी बरस रहा था। मगर तब भी हमारे स्वागत में बहुत लोग खड़े थे। हवाई अड्डे के स्वागत का समाँ देखकर यह भाव जगे बिना नहीं रहा कि हम जहाँ आए हैं, वह छोटे पैमाने पर भारत ही है। मॉरिशस द्वीप भूमध्य रेखा से कोई बीस डिग्री दक्खन और देशांतर रेखा 60 के बिल्कुल पास, किंतु उससे पच्छम की ओर बसा हुआ है मॉरिशस की लंबाई
29 मील और चौड़ाई कोई 30 मील है वैसे पूरे मॉरिशस द्वीप का रकबा 720 वर्मील आका जाता है। यह द्ीप हिंद महासागर का मोती है, भारत-समुद्र का सबसे खूबसूरत सितारा है।
मॉरिशस वह देश है, जिसका कोई भी हिस्सा समुद्र से पंद्रह मील से ज्यादा दर नहीं है मॉरिशस वह देश है, जहाँ की जनसंख्या के 67 प्रतिशत लोग भारतीय खानदान के हैं तथा जहाँ 53 प्रतिशत लोग हिंद हैं मॉरिशस वह देश है, जिसकी राजधानी पोर्टिलुई की गलियों के नाम कलकत्ता, मद्रास, हैदराबाद और बम्बई हैं तथा
जिसके एक पूरे मोहल्ले का नाम काशी है मॉरिशस वह देश है, जहाँ बनारस भी है गोकुल भी है और ब्रहमस्थान भी मॉरिशस वह देश है, जहाँ माध्यमिक स्कूलों को कॉलेज कहने का रिवाज है। चूंकि मॉरिशस के हिंुओं में से अधिकांश बिहार और उत्त प्रदेश के लोग हैं इसलिए हिंदी का मॉरिशस में व्यापक प्रचार है मॉरिशस की राजभाषा अग्रेजी, किंत संस्कृति की भाषा फ्रेच है। मगर जनता वहाँ क्रेयोल बोलती है। क्रेयोल का फ्रेच से
वही संबंध है, जो संबंध भोजपुरी का हंदी से है। और ्रेयोल के बाद मॉरिशस की दूसरी जनभाषा भोजपुरी को ही मानना पड़ेगा प्राय: सभी भारतीय भोजपुरी बोलते अथवा उसे समझ लेते हैं। यहाँ तक कि भारतीयों के पड़ोस में रहने वाले चीनी भी भोजपुरी बखूबी बोल लेते हैं कितु मॉँरिशस की भोजपुरी शाहाबाद या सारन की भोजपुरी नहीं है उसमे ्रेच के इतने संज्ापद घुस गए है कि आपको बार-बार शब्दों
के अर्थ पूछने पड़ंगे।
मॉरिशस में ऊख की खेती और उसके व्यवसाय को जो सफलता मिली है, भारतीयों के कारण मिली है। मॉँरिशस की असली ताकत भारतीय लोग ही है। सारा मॉरिशस कृष-प्रधान द्वीप है, क्योंक चीनी वहाँ का प्रमुख अथवा एकमात्र उद्योग है। कितु भारतीय वंश के लोग यदि इस टापू में नहीं गए होते, तो ऊख की खेती असंभव हो जाती और चीनी के कारखाने बढ़ते ही नहीं
भारत मेंबैठे-बैठे हम यह नहीं समझ पाते कि भारतीय संस्कृति कितनी प्राणवती और चिरायुहै कितु मॉरिशस जाकर हम अपन संस्कृति की प्राणवत्ता का ज़ान आसानी से प्रा्त कर लेते हैं मालिकों की इच्छा तो यही थी कि भारतीय लोग भी क्रेस्तान हो जाएँ कितु भारतीयोंने अत्याचार तो सहे, लेकिन प्रलोभनों को ठुकरा दिया। वे अपने धर्म पर डटे रहे और जिस द्वीप में भगवान ने उन्हे भेज दिया था, उस द्ीप को उन्होंने छोटा-सा हिंुस्तान बना डाला यह ऐसी सफलता की बात है, जिस पर सभी भारतीयों को गर्व होना चाहिए।
मॉरिशस के प्रत्ये प्रमुख ग्रा में शिवालय होता ह। मारिशस के प्रत्ेक प्मुख ग्राम मेंहंदू तुलसीकृत रामायण (रामचरितमानस) का पाठ करते हैं अथवा ढोलक और झाँझ पर उसका गायन करते हैं। मॉरिशस के मंदिरों और शिवालयों को मैने अत्यन्त स्वच्छ और सुरम्य पाया। कितना अच्छा हो, यदि हम भारत में भी अपने मंदिरों और तीर्थ स्थानों को उतना ही स्वच्छ और सुरम्य बनाना आरंभ कर दें,
भारत के पर्वत्योहार मारिशसमें भी प्रचलित हैं किंतुवर्ष का सवं्ेष्ठधार्मिक पर्व शिवरात्र है। मॉरिशस के मध्य में एक झील है, जिसका संबंध हिंदुओंने परियों से बिठा दिया है और उस झील का नाम अब परी-तालाब हो गया है परी-तालाब केवल तीर्थ ही नहीं, दृश्य से भी पिकनिक का स्थान है किंतु, वहाँ पिकनिक पर जाने वाले लोग अपने साथ माँस-मछली नहीं ले जाते, न अपवित्रता का वहाँ कोई
व्यापार करते हैं।
शिवरात्रि के समय सारे मॉरिशस के हिंद शखेत वस्त्र धारण करके कंधों पर काँवर लिए जुलूस बाँधकर परी तालाब पर आते हैं और परी-तालाब का जल भरकर अपने- अपने गाँव के शिवालय को लौट जाते हैं तथा शिवजी को जल चढ़ाकर अपने घरो में प्रवेश करते हैं ये सारे कृत्य वे बड़ी ही भक्त-भावना और पवित्रता से करते है। सभी वयस्क लोग उस दिन उजली धोती, उजली कमीज़ और उजली गाँधी टोपी पहनते हैं हाँ, बच्चे हाफ पैंट पहन सकते हैं लेकिन गाँधी टोपी उस दिन उन्हें भी पहननी पड़ती है। परी-तालाब पर लगने वाला यह मेला मॉरिशस के प्रमुख आकर्षणोंमें से एक है
—रामधारी सिंह दिनकर'
लेखक से परिचय
आपने जो रोचक या्र-वृतंत ढ़ है से हिंद केप्रिद् लेखक रामधारी सिंह 'दिनकर' ने लिखा है 'दिनकर' की रचनाओं की विशेषता है— भारत और भारत की संस्कृति। उनकी रचनाओं में वीरता, उत्साह और देशप्रेम का भाव अधिव है। स्वतंत्रता मिलने के बाद भी भारत का गौरव-गान उनकी (1908–1974) रचनाओं का विषय बना रहा। उन्होंने आप जैसे बच्चों के लिए भी पुस्तके लिखी है, जैसेमिर्च का मजा, पढ़क्कूकी सूझ और सूरज क ब्याह आदि।

पाठ से
आइए, अब हम इस पाठ को थोड़ा और निकटता से समझ लेते हैं आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेगी। आइए इन गतिविधियों को पूरा करते हैं
मेरी समझ से
(क) नीचे दए गए प्रनों का सटीक उत्त कौन-साहै? उसके सामने तार (*) बनाइए
(1) हिरण समूह मेंक्यों खड़े थे?
भागने पर उन्हें सिंह के आक्रमण का डर था। वे भाग चके हिरणों के लौटने की प्रतीक्षा में थे वे बीच खड़े असावधान जिराफ की रकषा कर रहे थे सिंह उनसे उदासीन थे अत: उन्हें कोई खतरा नहीं था। (2) मॉरिशस छोटे पैमाने पर भारतवर्ष ही है। कैसे?
गन्ने की खेती अधिकतर भारतीयों दवारा की जाती है अधिकतर जनसंख्या भारत से जाने वालों की है। सभी भारतवासी परी तालाब पर एकत्रित होते है। भारत की बहुत-सी विशेषताएँ वहाँ दिखाई देती हैं। (ख) अपने ित्रं के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए क आपने येउत्तर ही कयों चुने?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं इन्हेंध्यान से पढिए और इन पर विचार कीजिए आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
"भारत मं बैठे-बैठेहम यह नहीं समझ पाते कि भारतीय संस्कृति कितन प्रणवती और चिराय है किंतु मॉरिशस जाकर हम अपनी संस्कृति की प्राणवत्ता का ज़ान आसानी सेप्राप्त कर लेते हैं"
सोच-विचार के लिए
इस यात्रा-वृ्तांत को एक बार फिर से पढ़िए और निम्नलिखित के बारे में पता लगाकर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए
(क) "नैरोबी का नेशनल पार्क चिड़ियाघर नहीं है।" नेशनल पार्क और चिड़ियाघर में क्या अंतर है? olis
(ख) "हम लोग पेड़-पौधे और खरपात से भी बदतर समझे गए"? वे कौन थे जिन्होंने लेखक और अन्य लोगों को पेड़-पौधों और खरपात से भी बदतर समझ लिया था? उन्होंने ऐसा क्यों समझ लिया था?
(ग) "मॉरिशस की असली ताकत भारतीय लोग ही हैं'" पाठ में इस कथन के समर्थन में कौन-सा तर्क दिया गया है?
(घ) "उस द्वीप को उन्होंने छोटा-सा हिंदुस्तान बना डाला।" भारत से गए लोगों ने मॉरिशस को हिंदस्तान जैसा कैसे बना दिया है?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से कुछ शब्द चुनकर स्तंभ में दिए गए हैं उनसे संबधित वाक्य स्तंभ 2 में दिए गए हैं अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर शब्दों का मिलान उपयुक्त वाक्यों से कीजिए इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट, पुस्तकालय या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं
| स्तंभ 1 | स्तंभ २ | ||
| अफ़्रीका | यह अफ्रीका महाद्वीप के एक देश 'केन्या' की राजधानी है। | ||
| 2. | नैरोबी | 2. | यह श्रीराम के जीवन पर आधारित अमर ग्रथ 'रामचरितमानस' लिखने वाले कवि का नाम है। |
| 3. | रक्तचाप | 3.यह एशिया के बाद दुनिया का सबसे बड़ा महाद्वीप है | |
| 4. | बी.ओ.एसी. | 4. | यह रक्त-वाहिनियों अथात नसोंमें बहते रक्त द्वारा उनकी दीवारों पर डाले गए दबाव का नाम है। |
| 5. | भूमध्य रेखा | 5. | यह दो भाषाओं के मिलने से बनी नई भाषा का नाम है। |
| 6. | देशान्तर रेखा | 6. | यह ब्रिटिश ओवरसीज एयरवेज कॉरपोरेशन' नाम का छोटा रूप है। यह एक बहुत पुरानी विदेशी विमान कंपनी थी। |
| 7. | तुलसीदास | यह पृथ्वी के चारों ओर एक काल्पनिक वृत है जो पृथ्वी को दो भागों में बॉँटता है—उत्री भाग और दक्षिणी भाग। | |
| 8. | क्रयोल | 8. | यह बाँस का एक मज़बूत डंडा होता है जिसे कॉवड़ या बहंगी भी कहा जाता है, जिसके दोनों सिरों पर बँधी हुई दो टोकरियों या छीकों में यात्री गंगाजल या अन्य वस्तुएँ |
| 9. | कावर not to | 9 | ये ग्लोब पर उत्तर से दक्षिण की ओर खींची जाने वाली काल्पनिक रेखाएँ हैं ये उत्तरी धुव को दक्षिणी धुव से मिलाती हैं। |
यात्रा-वृत्तांत की रचना
"इतने में कोई मील-भर की दूरी पर हिरनों का एक झुड दिखाई पड़ा। अब दो जवान सिंह उठे और दो ओर को चल दिए। एक तो थोड़ा-सा आगे बढ़कर एक जगह बैठ गया, लेकिन दूसरा घास के बीच छिपता हुआ मोर्च पर आगे बढ़ने लगा।"
इन वाक्यों को पढ़कर ऐसा लगता है मानो हम लेखक की आँखों से स्वयं वह दृश्य देख रहे हैं। मानो हम स्वयं भी उस स्थान की यात्रा कर रहे हैं जहाँ का वर्णन लेखक ने किया है। यह इस यात्रा-वृत्तांत की एक महत्वपूर्ण विशेषता है। यदि आप इस यात्रा-वृतांत को थोड़ा और ध्यान से पढ़ंगे तो आपको और भी बहुत-सी विशेषताएँ पता चलेंगी λ इस पाठ को एक बार फिर से पढिए और इसकी रचना पर ध्यान दीजिए। आपको जो विशेष बातें दिखाई दें उन्हें आपस में साझा कीजिए और लिख लीजिए। जैसे - लेखक ने बताया है कि वह एक स्थान से दूसे स्थान तक कैसे और कब पहुँचा।
अन्मान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए
(क) "मॉरिशस वह देश है, जहाँ बनारस भी है, गोकुल भी है और ब्रहमस्थान भी।" मॉरिशस में लोगों ने गली-मोहल्लों के नाम इस तरह के क्यों रखे होंगे?
(ख) "कोई सात-आठ सिंह लेटे या सोए हुएथे और उन्हे घेरकर आठ-दस मोटें खड़ी थीं" आपने पढ़ा कि केन्या का राष्टीय पार्क पर्यटकों से भरा रहता है। पर्यटक जंगली जानवरों को घेर रहत हैं क्या इसका उन पशुओं पर कोई प्राव पड़ता होगा? अपने उतर के कारण भी बताइए। (संकेतराष्ट्ीय पार्क के बंदरों, सिंहों का व्यवहार भी बदल गया है)
(ग) "हिरनों का एक झुंड दिखाई पड़ा, जिनके बीच एक जिराफ बिल्कुल बेवकूफ की तरह खड़ा था" सिंहों के आस-पास होने के बाद भी जिराफ क्यों खड़ा रहा होगा?
(घ) "मॉरिशस के मध्य में एक झील है, जिसका संबंध हिंदुओं ने परियों से बिठा दिया है और उस झील का नाम अब परी-तालाब हो गया है।" उस झील का नाम 'परी-तालाब' क्यों पड़ा होगा?
(उ) आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि लगभग 50 साल पहले 'परी-तालाब' का नाम बदलकर 'गंगा-तालाब' कर दिया गया है। मॉरिशस के लोगों ने यह नाम क्यों रखा होगा?
शब्दों की बात
नीचे शब्दोंसे जु़ी कुछ गतिविधियाँदी ई हं इ्हेंकरने के लिए आप शब्दकोश, पुस्तकालय अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।
संज्ञा के स्थान पर
(क) "हिरनों ने ताड़ लिया कि उन पर सिंहों की नजर पड़ रही है। अतएव वे चरना भूलकर चौकन्े हो उठें"
इन पक्तियोंमें रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। इन वाक्यों मेंये शब्द किनके लिए उपयोग किए गए हैं? ये शब्द 'हिरनों' के लिए उपयोग में लाए गए हैं आप जानते ही है कि 'हिरन' यहाँ एक संज्ञा शब्द है। जो शब्द संज्ञा शब्दों के स्थान पर उपयोग में लाए जाते
हैं उन्हें 'सर्वनाम' कहते हैं।
अब नीचे दिए गए वाक्यों में सर्वनाम शब्दों को पहचानिए और उनके नीचे रेखा खींचिए—
"हा, बच्चे हाफ पैंट पहन सकते हैं लेकिन गाधी टोपी उस दिन उन्हें भी पहननी पड़ती है"
2. "भारतीयों ने अत्याचार तो सहे, लेकिन प्रलोभनों को ठुकरा दिया। वे अपने धर्म पर डटे रहे और जिस द्ीप में भगवान नेउन्हे भेज दिया था, उस द्वीप को उन्होंने छोटा- सा हिंुस्तान बना डाला।"
(ख) ऊपर दिए गए दोनो वाक्यों को सर्वनाम की जगह संशा शब्द लगाकर लिखिए।
पहचान पाठ के आधार पर
आपने इस यात्ावृत्तात े तीन देशो के नाम पढ़ हैंभारत, केन्या और मॉरिशसा पुस्तकालय या कक्षा में उपलब्ध मानचित्र पर भारत को तो आप सरलता से पहचान ही लेंगे। पाठ में दी गई जानकारी के आधार पर बाकी दोनों देशों को पहचानिए।
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) "वहाँ जो कुछ देखा, वह जन्मभर कभी नहीं भूलेगा।" क्या आपने कभी ऐसा कुछ देखा, सुना या पढ़ा है जिसके बारे में आपको लगता हैकि आप उसे कभी नहीं भूल सकेंगे? उसके बारे में अपने समूह में बताइए
(ख) "हमें अफ़्रीका के शेरों से मुलाकात कर लेनी चाहिए।" 'मुलाकात' शब्द का अर्थ है 'मिलना'। लेकिन यहाँ 'मुलाकात' शब्द का भाव हैशेरों को पास से देखना। इसके लिए 'अपनी आँखों से देखना', 'सज़ीव देखना' ब्ेंट करना आदि शब्दों का प्रयोग भी किया जाता है। अपनी बात को और अधिक सुदर और अनेखा रूप देने के लिए शब्दों के इस प्रकार के प्रयोग किए जाते हैं। आपने अब तक किन-कि पशु-पक्षियं से मुलाकात की है? वह मुलाकात कहाँ हुई थी? बताइए।
(ग)"्यह ऐसी सफलता की बात है, जिस पर सभी भारतीयों को गर्व होना चाहिए।" आपको किन-किन बातों पर गर्व होता है? बताइए। (संकेत—ये बाते आपके बारे में हो सकती हैं आपके परिवार के बार में हो सकती हैं और किसी अन्य व्यक्त, वस्तु, स्थान, प्राणी आदि के बार में भी हो सकती हैं)
कक्षा और घर की भाषाएँ
"प्रायः सभी भारतीय भोजपुरी बोलते अथवा उसे समझ लेते हैं यहाँ तक कि भारतीयों के पड़ोस में रहने वाले चीनी भी भोजपुरी बखूबी बोल लेते हैं'" भारत एक बहुभाषी देश है भारत में लगभग सभी व्यक्त एक से अधिक भाषाएँ बोल या समझ लेते हैं आप कौन-कौन सी भाषाएँ बोल-समझ लेते हैं? आपके मित्र कौन-कौन सी भाषाएँ बोल-समझ लेते हैं? इसके बरे में यहाँ दी गई तालिका को पूरा कीजिए
| क्रमसंख्या | मैं जिन भाषाओं कोबोल-समझ लेता/लेती हू | मेरे मित्र जिनभाषाओं कोबोल-समझ लेते हैं | मेरे परिजन जिनभाषाओं कोबोल-समझ लेते हैं |
| D | D | ||
| कुल संख्या |
(संकेतइस तालिका को पूरा करने के लिए आपको अपने मि्रों और परिजनों से पूछताछ करनी होगी पहले भाषाओं के नाम लिखने हैं बाद में उन नामों को गिनकर उनकी कुल संख्या लिखनी है)
प्रशंसा या सराहना विभिन्न प्रकार से
"यह द्ीप हिंद महासागर का मोती है, भारत-समुद्र का सबसे खबसूरत सितारा है" इस पाठ में लेखक ने मॉरिशस की सराहना में यह वाक्य लिखा है। सराहना करने के लिए दिनकर' ने द्वीप की तुलना मोती और तर से की है।
किसी की सराहना अनेक प्रकार से की जा सकती है आप आगे दी गई तालिका को पूरा कीजिए पहले नाम लिखिए, फिर इनकी प्रशंसा में एक-एक वाक्य लिखिए। शर्त यह है कि प्रत्येक बार अलग तरह से प्रशंसा करनी है—
सराहना की तालिका
| नाम | प्रशंसा या सराहना का वाक्य | |
| स्वयं | ||
| परिजन | ||
| शिक्षक | ||
| मित्र | ||
| पशु | ||
| स्थान | ||
| सब्जी | ||
| पेड़ |
चित्रात्मक सूचना (इंफोग्राफिक्स)
नीचे दिए गए चित्र को देखिए। इसमें चित्रो के साथ-साथ बहुत कम शब्दों में कुछ जानकारी दी गई है। इसे चित्रात्मक सूचना' कहते हैं।
साल 1834 में 2 नवंबर को एटलस नाम का जहाज भारतीय मजदरों को लेकर मॉरिशस पहुँचा था, जिसे वहां पर अप्रवासी दिवस (इंडियन अराइवल डे) के रूप में मनाया जाता है जब मॉरशस में गूजा जय हिद मॉर्शिस में भारतीय मूल के लोगों इनमें से ज्यादातर बिहार के सी आाी मं 68% अच्छ़ी-खासी थी ब्रिटिश शासक गन्ने के खेतों में काम कने के लिए भारतीय मजदरों को वहां ले गए थे यही वजह है कि मर्शस की संस्कृति मॉरिशस के पहले प्रधानमंत्री मेभजुरीगीतों और हिंदी फिल्मों का शिवसागर रामगुलाम भी भारतीय खास योगदान है मूल के थे
(क) इस चित्ात्मक सूचना' के आधार पर मॉरिशस के बार में एक अनुच्छेद लिखिए।
(ख) अपनी पसंद के किसी विषय पर इसी प्रकार की चित्ात्मक सूचना' की रचना कीजिए जैसेआपका वि्यालय, कोई विशेष दिवस, आपके जीवन की कोई विशेष घटना आदि। (सकेत- यह कार्य आप अपने समूह में मिलकर कर सकते हैं इसके लिए आप किसी कागज पर चित्र चिपका सकते हैं और सूचना को कलात्मक रूप से कम शब्दो में लिख सकते हैं चित्र बनाए भी जा सकते हैं। आप यह कार्य कंप्यूटर या मोबाइल फोन की सहायता से भी कर सकते हैं)
हस्ताक्षर
आप जानते ही हैं कि यह पाठ हिंदी के प्रसिद्र लेखक रामधारी सिंह दिनकर' ने लिखा है वे अपने नाम को कुछ इस प्रकार लिखते थे—

अपनी पहचान प्रकट करने के लिए अपने नाम को किसी विशेष प्रकार से लिखने को हस्ताक्षर कहते हैं। हस्ताक्षर का प्रयोग व्यक्त को जीवनभर अनेक कायों के लिए करना होता है। आपके विद्यालय में भी आपसे हस्ताक्षर करवाए जाते होंगे। आप प्र्थना-पत्रों के अंत में भी अपने हस्ताक्षर करते होंगे।
हो सकताहै अभी आपने अपने हस्ताक्षर निधारित न किए हों यदि नहीं भी किए हैं तो कोई बात नहीं। आप चाहें तो आज भी अपने हस्ताक्षर निधारित कर सकते हैं।
नीचे दिए गए स्थान पर अपनेहस्ताक्षर पाँच बार कीजिए ध्यान रखें कि आपके हस्तक्षर एक जैसे हों, अलग-अलग न हों।
पत्र
यहाँदिनकर' का लिखा एक पत्र दिया जा रहा है। इसे पढिए और प्र्नों के उत्र लिखिए। पत्र पढ़कर नीचे दिए गएप्रनों के उत्तर अपने समूहमें मिलकर खोजिए
नई दिल्ली
8-7-67
मान्यवर चतु्वंदी जी,
आपका कृपा-पत्र मिला। मेरा स्वास्थ्य इधर बहुत गिर गया है और संयम के बावजूद तेज़ी
से सुधर नहीं रहा है। मेरा चित्त अभी भी दबा हुआ है ऐसी अवस्थामें मैन दो सप्ताह के
लिए मॉरिशस जाना स्वीकार कर लिया है 15 जुलाई को प्र्थान करना है। लौटना शायद
5 अगस्त तक हो।
आपके आशीर्वाद की कामना करता हू। आपका दिनकर qubli
सफ़दरजंग लेन, नई दिल्ली
(क) पत्र किसने लिखा है?
(ख) पत्र किसे लिखा गया है?
(ग) पत्र किस तिथि को लिखा गया है?
(घ) पत्र किस स्थान से लिखा गया है?
(ड) पत्रपाने वाले के नाम से पहले किस शब्द का प्रयोग किया गया है?
(च) पत्रलेखक ने अपने नाम से पहले अपने लिए क्या शब्द लिखा है?
उलझन सुलझञाओ
(क) "जहाज़ नैरोबी से चार बजे शाम को उड़ा और पाँच घटों की निंतर उड़ान के बाद जब वह मॉरिशस पहुँचा, तब वहाँ रात के लगभग दस बज रहे थे"
जहाज़ नैरोबी से शाम 4 बजे उड़ा तो उसे 5 घंटों की उड़ान के बाद रात 9 बजे मॉरिशस पहुँचना चाहिए था लेकिन वह पहुँचा लगभग दस बजे क्यों?
आप इसका कारण पता करने के लिए अपने शिक्षकों या इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं
नीचे दो घड़यों के चि्र दिए गए है एक घड़ी भारत के समय को दिखा रही ह। दूसरी घड दिखा रही है कि उसी समय मॉरिशस में कितने घटे और मिनट हुए हैं इन घड़ियों के अनुसार नीचे दिए गए प्र्नों के उत्तर दीजिए

भारत में घड़ी

मॉरिशस में घड़ी
भारत में क्या समय हुआ है?
मॉरिशस मे क्या समय हुआ है?
मॉरिशस और भारत के समय मेंकितने घटे और मिनट का अंतर है?
! सूर्योदय भारत में पहले होगा या मॉरिशस में?
जिस समय भारत में दोपहर के 12 बज हंगे, उस समय मॉरिशस की घड़ियाँ कितना समय दिखा रही होंगी?
आज की पहेली
आज हम आपके लिए एक अनोखी पहेली लाए हैं। यहाँ एक वाक्य दिया गया है। आपको पता करना है कि इसका क्या अर्थ है—
मेरा
संकेत कख
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई रचनाओं को पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड की सहायता से प़, देखें व समझे
• चाँद का कुर्ता
मिर्च का मजा
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर' की जीवनी हिमालय के पर्वतीय प्रदेश की मनोरम यात्रा