Pariksha - CBSE Class 6 Hindi Notes

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Chapter Study Guide & Summary

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Key Concepts & Syllabus Topics

Important Definitions & Terminology

Pariksha Overview
The central theme and foundational concept covered in Class 6 Hindi Chapter 10, emphasizing conceptual clarity, NCERT curriculum alignment, and exam readiness.
NCERT Curriculum Alignment
Structured study material adhering strictly to CBSE board guidelines, learning objectives, and standardized assessment criteria for Class 6.
Active Recall & Revision
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Quick Revision & Key Points

Full NCERT Chapter: Pariksha

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जब रियासत देवगढ के दीवान सरदार सुजानसिह बूढे हुए तो परमात्मा की याद आई जाकर महाराज से विनय की कि दीनबंधु! दास ने श्रीमान की सेवा चालीस साल तक की, अब मेरी अवस्था भी ढल गई, राज-काज सँभालने की शक्त नहीं रही। कहीं भूल-चूक हो जाय तो बुढ़ाप में दाग लगे। सारी ज़िंदगी की नेकनामी मिद्ी में मिल जाए

राजा साहब अपने अनुभवशील नीतिकुशल दीवान का बड़ा आदर करते थे बहुत समझाया, लेकिन जब दीवान साहब ने न माना, तो हारकर उनकी प्र्थना स्वीकार कर ली; पर शर्त यह लगा दी कि रियासत के लिए नया दीवान आप ही को खोजना पड़गा।

दूसरे दिन देश के प्रसिद्वपत्रो में यह विज्ञापन निकला कि देवगढ के लिए एक सुयोग्य दीवान की ज़रूरत है। जो सज्जन अपने को इस पद के योग्य समझे, वे वर्तमान सरकार सुजानसिंह की सेवा में उपस्थत हों। यह जरूरी नहींहै कि वे ्रेजुएट हों, मगर हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक है, मंदाग्न के मरीज को यहाँ तक कष्ट उठाने की कोई ज़रूरत नहीं। एक महीने तक उम्मीदवारों के रहन-सहन, आचार-विचार की देखभाल की जाएगी। विद्या का कम, पंतु कर्तव्य का अधिक विचार किया जायेगा जो महाशय इस परीक्षा मेंपूरे उतरंे, वे इस उच्च पद पर सुशोभित होंगे

इस विज्ञापन ने सारे मुल्क में तहलका मचा दिया। ऐसा ऊँचा पद और किसी प्रकार की कैद नहीं? केवल नसीब का खेल है। सैकड़ों आदमी अपना-अपना भाग्य परखने के लिए चल खड़े हुए। देवगढ में नए-नए और ंग-बिरंगे मनुष्य दिखाई देने लगे प्रत्येक रेलगाड़ी से उम्मीदवारों का एक मेला-सा उतरता। कोई पंजाब से चला आता था कोई मद्रास से, कोई नए फैशन का परेी, कोई पुरानी सादगी पर मिटाहुआ रंगीन एमामे, चोगे और नाना प्रकार के अंगरखे और कंटोप देवगढ में अपनी सज-धज दिखाने लगे। लेकिन सबसे विशेष संख्या ग्रजुएटों की थी, क्योकि सनद की कैद न 11

सरदार सुजानसिंह ने इन महानुभावों के आदर-सत्कार का बड़ा अच्छा प्रबंध कर दिया था हर एक मनुष्य अपने जीवन को अपनी बुद्द के अनुसार अच्छे रूप में दिखाने की कोशिश करता था। मिस्टर 'अ' नौ बजे दिन तक सोया करते थे, आजकल वे बगीचेमे टहलते हुए ऊषा का दर्शन करते थे मिस्टर 'द', 'स' और 'ज से उनके घरों पर नौकरों की नाक में दम था, लेकिन ये सज्जन आजकल 'आप' और 'जनाब' के बगर नौकरो से बातचीत नहीं करते थे मिस्टर 'ल' को किताब से घृणा थी, परंतु आजकल वे बड़े-बड़ गरंथ देखने-पढ़नेमेंडूबे रहते थे जिससे बात कीजिए वह नम्रता और सदाचार का देवता बना मालूम देता था लोग समझते थे कि एक महीने का झंझट है, किसी तरह काट लें, कहीं कार्य सिद् हो गया तो कौन पूछता है?

लेकिन मनुष्यों का वह बूढ़ा जौहरी आड में बैठ हुआ देख रहा था कि इन बगुलों मे हंस कहाँ छिपा हुआ है।

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एक दिन नए फैशनवालों को सूझी कि आपस में हॉकी का खेल हो जाए। यह प्स्ताव हाकी के मंजे हुए खिलाड़ियों ने पेश किया। यह भी तो आखिर एक विद्ा है। इसे क्यों छिपा रखें संभव है, कुछ हाथों की सफ़ाई ही काम कर जाए। चलिए तय हो गया, फील्ड बन गई, खेल शुरू हो गया और गेंद किसी दफ्तर के अप्रेटिस की तरह ठोकरें खाने लगी0

रियासत देवगढ में यह खेल बिल्कुल निराली बात थी पढे-लिखे भलेमानुस लोग शतरंज और ताश जैसे गंभीर खेल खेलते थे दौड़-कूद के खेल बच्चों के खेल

खेल बड़ उत्साह से जारी था। धावे के लोग जब गेंद को लेकर तेज़ी से उड़ते तो ऐसा जान पड़ता था कि कोई लहर बढ़ती चली आती है। लेकिन दूसरी ओर के खिलाड़ी इस बढ़ती हुई लहर को इस तरह रोक लेते थे कि मानो लोहे की दीवार है। संध्या तक यही धूमधाम रही। लोग पसीने से तर हो गए। खून की गरमी आँख और चेहरे से झलक रही थी। हाफते-हॉफते बेदम हो गए, लेकिन हार-जीत का निर्णय न हो सका।

अँधेरा हो गया था इस मैदान से ज़रा दूर हटकर एक नाला था उस पर कोई पुल न था। पथिकों को नाले में से चलकर आना पड़ता था खेल अभी बंद ही हुआ था और खिलाड़ी लोग बैठे दम लेरे थे कि एक किसान अनाज से भरी हुई गा़ी लिए हुएउस नाले में आया लेकिन कुछ तो नाले मेंकीचड़ था और कुछ उसकी चढ़ाई इतनी ऊँची थी कि गाड़ी ऊपर न चढ़ सकती थी। वह कभी बैलों को ललकारता, कभी पहियो को हाथ से ढकेलता, लेकिन बोझ अधिक था और बैल कमज़ोर गाड़ी ऊपर को न चढ़ती और चढ़ती भी तो कुछ दूर चढ़कर फिर खिसककर नीचे पहुँच जाती। किसान बार-बार जोर लगाता और बार-बार झुझलाकर बैलों को मारता, लेकिन गाड़ी उभरने का नाम न लेती। बेचारा इधर-उधर निराश होकर ताकता मगर वहाँ कोई सहायक नज़र न आता। गाड़ी को अकेले छोड़कर कहीं जा भी नहीं सकता। बड़ी आपत्त में फँसा हुआ था इसी बीच में खिला़ी हाथों में डंडे लिए घूमते-घामते उधर से निकले

किसान ने उनकी तरफ सहमी हुई आँखों से देखा; परंतु किसी से मदद माँगने का साहस न हुआ। खिलाड़ियों ने भी उसको देखा मगर बंद आँखों से, जिनमें सहानुभूति न थी उनमेंस्वार्थ था, मद था, मगर उदारता और वात्सतल्य का नाम भी न था।

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लेकिन उसी समूह में एक ऐसा मनुष्य था जिसके हृदय में दया थी और साहस था आज हॉकी खेलते हुए उसके पैोंमें चोट लग गई थी लंगड़ाता हुआ धीरे-धीर चला आता था। अकस्मात उसकी निंगाह गाड़ी पर पड़ी ठिठक गया। उसे किसान की सूरत देखते ही सब बाते जात हो गई डंडा एक किनारे रख दिया। कोट उतार डाला और किसान के पास जाकर बोला, "मै तु्हारी गड़ी निकाल दू?"

किसान ने देखा एक गठे हुए बदन का लंबा आदमी सामने खड़ा है। झुककर बोला, "हजू,मं आपस कैसे कहू युक नेकहा, मालूम होता है तुम यहाँ बडी देर से फसे हो अच्छा, तुम गाड़ी पर जाकर बैलों को साधो, मैं पहियों को ढकेलता हू, अभी गाड़ी ऊपर चढ़ जाती है।"?

किसान गा़ी पर जा बैठा युवक ने पहिये को जोर लगाकर उकसाया। कीचड़ बहुत ज्यादा था। वह घुटने तक ज़मीन में गड़ गया, लेकिन हिम्मत न हारी। उसने फिर ज़ोर किया, उधर किसान ने बैलों को ललकारा। बैलों को सहारा मिला, हिम्मत बँंध गई, उन्होंने कंधे झुकाकर एक बार ज़ोर कया तो गाड़ी नाले के ऊपर थी। किसान युवक के सामने हाथ जोड़कर खड़ा हो गया। बोला, "महाराज, आपने आज मुझे उबार लिया, नहीं तो सारी रात मुझे यहाँ बैठना पड़ता" युवक ने हँंसकर कहा, "अब मुझे कुछ इनाम देते हो?" किसान ने गंभीर भाव से कहा, "नारायण चाहेंगे तो दीवानी आपको ही मिलेगी।"

युवक ने किसान की तरफर गौर से देखा उसके मन में एक संदेह हुआ, क्या यह सुजानसिंह तो नहीं हैं? आवाज़ मिलती है, चेहरा-मोहरा भी वहीं। किसान ने भी उसकी ओर तीत्रदृष्ट से देखा। शायद उसके दिल के संदेह को भाँप गया। मुस्कराकर बोला, "गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है"

निदान महीना पूर हुआ चुनाव का दिन आ पहुँचा। उम्मीदवार लोग प्रातःकाल ही से अपनी किस्मतों का फैसला सुने के लिए उत्सुक थे दिन काटना पहाड़ हो गया। प्रत्येक के चेहे पर आशा और निराशा के रंग आते थे। नहीं मालूम, आज किसके नसीब जागंगे! न जाने किस पर लक्मी की कृपादृष्ट होगी संध्या समय राजा साहब का दरबार सजाया गया। शहर के रईस और धनाढ्य लोग, राज्य के कर्मचारी और दरबारी तथा दीवानी के उम्मीदवारों का समूह, सब रंग-बिरंगी सज-धज बनाए दरबार में आ विराजे! उम्मीदवारों के कलेजे धड़क रहे थे जब सरदार सुजानसिंह नेखड़े होकर कहा, "मेरे दीवानी के उम्मीदवार महाशयो! मैने आप लोगों को जो कष्ट दिया है, उसके लिए मुझे ्षमा कीजिए। इस पद के लिए ऐसे पुरूष की आवश्यकता थी, जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्मबला। हृदय वह जो उदार हो, आत्मबल वह जो आपत का वीरता के साथ सामना करे और इस रियासत के सौभाग्य से हमें ऐसा पुरुष मिल गया। ऐसे गुणवाले संसार में कम हैं और जो है, वे कीति और मान के शिखर पर बैठे हुए हैं उन तक हमारी पहुँच नहीं मै रियासत के पंडित जानकीनाथ-सा को दीवानी पाने पर बधाई देता हू"

रियासत के कर्मचारियों और रईसो ने जानकीनाथ की तऱफ देखा उम्मीदवार दल की आँखें उधर उठीं, मगर उन आँखों में सत्कार था, इन आँखों में ईष्या। सरदार साहब ने फिर फरमाया, "आप लोगों को यह स्वीकार करने में कोई आपत्ि न होगी कि जो पुरुष स्वयं जख्मी होकर भी एक गरीब किसान की भरी हुई गाड़ी को दलदल से निकालकर नाले के ऊपर चढ़ा दे उसके हृदय में साहस, आत्मबल और उदारता का वास है ऐसा आदमी गरीबों को कभी न सतावेगा। उसका संकल्प दृढ़ है, जो उसके चित को स्थर रखेगा। वह चाहे धोखा खा जाए, परंतु दया और धर्म से कभी न हटेगा" λ

—प्रेमचंद

लेखक से परिचय

हिंदी के एक महान लेखक और कथा-सप्राट के नाम से प्रसिद्धप्ेमचंद का वास्तविक नाम धनपतराय था उन्होंने समाज-सुधार और राष्टीय भावना से ओत-प्रोत कई कहानियाँ और उपन्यास लिखे उनकी अनेक कहानियाँ जैसेईदगाह, बड़े भाईसाहब, गु्ली डंडा, दो बैलों की कथा आदि बड़ों औरब्चों े बीच बुत पढ़ी और सराही गई हैं।


(1880-1936)

पाठ से

मेरी समझ से

आइए, अब हम कहानी 'परीक्षा' के बारेमें कुछ चर्चा कर लेते हैं।

(क) आपकी समझ से नीचे दिए गए प्र्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा () बनाइए-

(1) महाराज ने दीवान को ही उनका उत्राधिकारी चुने का कार्य उनके किस गुण के कारण सौंपा?

सादगी उदारता बल नीतिकुशलता

(2) दीवान साहब द्वार नौकरी छोड़ने के निश्चय का क्या कारण था? परमात्मा की याद राज-काज सँभालने योग्य शक्त न रहना बदनामी का भय चालीस वर्ष की नौकरी पूरा हो जाना

(ख) अब अपने मित्ोंके साथ चर्चा ीजिए कि आपने येउत्र ही क्यों चने?

शीर्षक

(क) आपने जो कहानी पढ़ है इसका नाम प्रेचंद ने परीकषा' रखा है अपने समूह में चर्च करके लिखिए कि उन्होंने इस कहानी का यह नाम क्यों दिया होगा? अपने उत्तर के कारण भी लिखिए।
(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देना हो तो क्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए?

पंक्तियों पर चर्चा

कहानी में े चुनकर यहाँ कुछ पंक्तिया दी गई हैं इन्हे ध्यान से पढिए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर् समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

"इस पद के लिए ऐसे पुरुष की आवश्यकता थी, जिसके हृदय में दया हो और साथ-साथ आत्मबल। हृदय वह जो उदार हो, आत्मबल वह जो आपत्त का वीरता के साथ सामना करे। ऐसे गुणवाले संसार में कम हैं और जोहै, वे कीति और मान के शिखर पर बैे हु है'"

सोच-विचार के लिए

कहानी को एक बार फिर से पढिए, निम्नलिखित के बारे ें पता लगाइए और लिखिए

(क) नौकरी की चाह में आए लोगोंने नौकरी पाने के लिए कौन-कौन से प्रयल किए?
(ख) "उसे किसान की सूरत देखते ही सब बातें जात हो गई'" खिलाड़ी को कौन-कौन सी बाते पता चल गई?
(ग) "मगर उन आँखों ें सत्कार था, इन आँखो मेंईंष्या" किनकी आँखो में सत्कार था और किनकी आँखों मेंईंष्या थी? क्यों?

खोजबीन

कहानी में से वे वाक्य खोजकर लिखिए जिनसे पता चलता हैकि

(क) शायद युवक बूढ़ किसान की असलियत पहचान गया था। (ख) नौकरी के लिए आए लोग किसी तरह बस नौकरी पा लेना चाहते थे

कहानी की रचना

"लोग पसीने से तर हो गए। खून की गरमी आँख और चेहरे से झलक रही थी।"

इन वाक्यों को पढ़कर आँखों के सामने थकान से चूर खिलाडियों का चित्र दिखाई देने लगता है। यह चित्रा्मक भाषा है ध्यान देंगे तो इस पाठ में ऐसी और भी अनेक विशेष बातें आपको दिखाई देंगी।

कहानी को एक बार ध्यान से पढिए। आपको इस कहानी में और कौन-कौन सी विशेष बातें दिखाई दे रही हैं? अपने समूह में मिलकर उनकी सूची बनाइए।

समस्या और समाधान

इस कहानी में कुछ समस्याएँहैं और उसके समाधान भी हैं कहानी को एक बार फिर से पढ़कर बताइए कि—

(क) महाराज के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा? (ख) दीवान के सामने क्या समस्या थी? उन्होंने इसका क्या समाधान खोजा? (ग) नौकरी के लिए आए लोगों के सामने क्या समस्या थी? न्हंने इसका क्या समाधान खोजा?

मन के भाव

"स्वार्थ था, मद था, मगर उदारता और वात्सल्य का नाम भी न था" इस वाक्य में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खिंची हुई है। ये सभी नाम हैं लेकन दिखाई देने वाली वस्तुओं, व्यक्तयों या जगहों के नाम नहींहैं। ये सभी शब्द मन के भावों के नाम हैं आप कहानी मेंसे ऐसे ही अन्य नामों को खोजकर नीचे दिए गए रिकत स्थानों में लिखिए

कहानी में युवक और किसान की बातचीत संवादों के रूप में दी गई है। यह भी बताया गया है कि उन दोनों ने ये बाते कैसे बोलीं अपने समूह के साथ मिलकर तैयारी कीजिए और कहानी के इस भाग को क्षा में अभिनय के द्वारा प्र्तुत कीजिए प्र्येक समूह से अभिनेता या अभिनेत्री कक्षा में सामने आएँंगे और एक-एक संवाद अभिनय के साथ बोलकर दिखाएँगे।

विपरीतार्थक शब्द

"विदा का कम, परंु क्तव्य का अधिक विचार किया जाएगा"

कम' का विपरीत अर् देने वाला शब्द है 'अधिक'। इसी प्रकार के कुछ विपरीतार्थक शब्द नीचे दिए गए हैं लेकिन वे आमने-सामने नहीं हैं रेखाएँ खींचकर विपरीतार्थक शब्दों के सही जोड़े बनाइए—

स्तंभ 1स्तंभ २
आना 1.निर्दयी 1.
2. गुण )e2. निराशा
3. आदर3. जीत
4. स्वस्थ4. अवगुण
कम5. अस्वस्थ
दयालु 6अधिक 6.
1Ot योग्य 7.7. जाना
8. अयोग्य
8. हार9. अनादर
9. आशा

"गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है"

यह वाक्य एक कहावत है। इसका अर्थ है कि कोशिश करने पर ही सफलता मिलती है। ऐसी ही एक और कहावत है,"जिन खोजा तिन पाइयाँ गहरे पानी पैठ" अर्थात परिश्रम का फल अवश्य मिलता है।
कहावते ऐसे वाक्य होते हैं जिन्हें लोग अपनी बात को और अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयोग करते हैं आपके घर और पास-पड़ोस में भी लोग अनेक कहावतों का उपयोग करते होंगे नीचे कुछ कहावतें और उनके भावार्थ दिए गए हैं आप इन कहावतों को कहानी से जोड़कर अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए

  • अधजल गगरी छलकत जाए—जिसके पास थोड़ा जान होता है, वह उसका दिखावा करता है। अब पछताए होत क्या जब चिड़ियाँ चुग गई खेतसमय निकल जाने के बाद पछताना व्यर्थ होता है।
    एक अनार सौ बीमार—कोई ऐसी एक चीज़ जिसको चाहने वाले अनेक हों। जो गरजते हैं वे बरसते नहीं हैंजो अधिक बढ़-चढ़कर बोलते हैं वे काम नहीं करते हैं।
    जहाँ चाह, वहाँ राहजब किसी काम को करने की इच्छा होती है, तो उसका साधन भी मिल जाता है।
    (संकेत—विज्ञापन में तो एक नौकरी की बात कही गई थी, लेकिन उम्मीदवार आ गए हज़ारों।
    इसे कहते हैं—एक अनार सौ बीमार।)

पाठ से आगे

अनमान या कल्पना से

(क) "दूसरे दिन देश के प्रसिद् पत्रो में यह विज्ञापन निकला" देश के प्रसिद्वपत्ो में नौकरी का विज्ञापन किसने निकलवाया होगा? आपको ऐसा क्यो लगता है?
(ख) "इस विज्ञापन ने सारे मुल्क में तहलका मचा दिया।"" विज्ञापन ने परे देश में तहलका क्यों मचा दिया होगा?

विज्ञापन

"दूसरे दिन देश केप्रसिद्वपत्रो मे यह विज्ञापन निकला कि देवगढ़ के लिए एक सुयोग्य दीवान की जरूरत है।"

(क) कहानी मे इस विज्ञापन की सामग्री को पढिए इसके बाद अपने समूह में मिलकर इस विज्ञापन को अपनी कल्पना का उपयोग करते हुए बनाइए। (संकेत—विज्ञापन बनाने के लिए आप एक चौकोर कागज़ पर हाशिया बनाइए। इसके बाद इस हाशिए के भीतर के खाली स्थान पर सुदर लिखाई, चित्ो, रंगों आदि की सहायता से सभी आवश्यक जानकारी लिख दीजिए। आप बिना रंगों या चित्रं के भी विज्ञापन बना सकते हैं।)

(ख) आपने भी अपने आस-पास दीवारों पर, समाचार-पत्ो में या पत्रिकाओं में मोबाइल फोन या दूरदर्शन पर अनेक विज्ञापन देखे होंगे। अपने किसी मनपसंद विज्ञापन को याद कीजिए। आपको वह अच्छा क्यों लगता है? सोचकर अपने समूह में बताइए। अपने समूह के बिंदुओं को लिख लीजिए।

(ग) वज्ञापनों से लाभ होते हैं हानि होती हैं, या दोनों? अपने समूह में चर्चा कीजिए और चर्चा के बिंदु लिखकर कक्षामें साझा कीजिए

आगे की कहानी

परीक्षा' कहानी जहाँ समाप्त होती है, उसके आगे क्या हुआ होगा। आगे की कहानी अपनी कल्पना से बनाइए।

आपकी बात

(क) यदि कहानी में दीवान साहब केस्थान पर आप होते तो योगय व्यक्त को कैसे चनते? (ख) यदि आपको कक्ा का मॉनिटर चुनने के लिए कहा जाए तो आप उसे कैसे चुनंगे? उसमे किन-किन गुणों को देखेंगे? गुणों की परख के लिए क्या-क्या करेंगे?

"कोई नए फैशन का प्रमी, कोई पुरानी सादगी पर मिटा हुआ"
हमारे आस-पास अनेक वस्तुएँ ऐसीहै जिन्े लोग नया फैशन या पुराना चलन कहकर दो भागों में बाँट देतेहै जो वस्तु आपके माता-पिता या दादा-दादी के लिए नई हो, हो सकता है वह आपके लिए पुरानी हो, या जो उनके लिए पुरानी हो, वह आपके लिए नई हो। अपने परिवार या परिजनों से चर्चा करके नीचे दी गई तालिका को पूरा कीजिए

मेरे लिए नई वस्तुएँमेरे लिए पुरानीवरस्तुएँCपरिवार के बड़ों केलिए नई वस्तुएँपरिवार के बड़ों केलिए पुरानी वस्तुएँ
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वाद-विवाद

"आपस मे हॉकी का खेल हो जाए। यह भी तो आखिर एक विद्ा है।" क्या हॉकी जैसा खेल भी विद्या है? इस विषय पर कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। इसे आयोजित करने के लिए कुछ सुझाव आगे दिए गए हैं

कक्ामें पहले कुछ समूह बनाएँ फि पर्ची निकालकर निधारित कर लीजिए कि कौन समू पक्ष में बोलेंगे, कौन विपक्ष में आधे समूह इसके पक्ष में तक दीजिए, आधे समूह इसके विपक्ष में।
सभी समूहों को बोलने के लिए 5-5 मिनट का समय दिया जाएगा।
ध्यान रखें कि प्रत्येक समूह का प्रत्येक सदस्य चर्चा करने, तर्क देने आदि कायों में भाग अवश्य ले

अच्छाई और दिखावा

"हर एक मनुष्य अपने जीवन को अपनी बुद्द के अनुसार अच्छे रूप में दिखाने की कोशिश करता था"
अपने समू में निम्नलिखित पर चर्चा कीजिए और चर्चा के बिंदु अपनी लेखन-पुस्तिका में लिख लीजिए

(क) हर व्यक्त अपनी बुद्ध के अनुसा स्वयं को अच्छा दिखाने की कोशिश करता है। स्वयं को अच्छा दिखाने के लिए लोग क्या-क्या करतेहैं? (संकेत—मेहनत करना, कसरत करना, साफ़र-सुथे रहना आदि)

(ख) क्या 'स्वयं को अच्छा दिखाने' में और 'स्वयं के अच्छा होने'में कोई अंत है? कैसे?

परिधान तरह-तरह के

"कोट उतार डाला"

कोट' एक परिधान का नाम है कुछ अन्य परिधानों के नाम और चित्र नीचे दिए गए हैं परिधानों के नामों को इनके सही चित्र के साथ मिलाइए इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? लिखिए—

चित्रनामऔर क्या कहते हैं
O)eदुपद्टा
गमछा
लहँगा
फिरन
धोती
अचकन
पगड़ी

आपकी परीक्षाएँ

हम सभी अपने जीवन में अनेक प्रकार की परीक्षाएँ लेते और देते हैं आप अपने अनुभवों के आधार पर कुछ परीक्षाओं के उदाहरण बताइए। यह भी बताइए कि किसने, कब, कैसे और क्यो वह परीक्षा ली t

(सकेत— जैसे, किसी को विश्वास दिलाने के लिए उसके सामने साइकिल चलाकर दिखाना, स्कूल या घर पर कोई परीक्षा देना, किसी को किसी काम की चुनौती देना आदि)

आज की पहेली

आज आपकी एक रोचक परीकषा है यहाँ दिए गए चित् एक जैसे हैं ा भि्न? इन चित्ों मे कुछ अंतर हैं। देखते हैं आप कितने अंतर कितनी जल्दी खोज पाते हैं

झरोखे से

पाठ में दिए गए क्यू.आर. कोड के माध्यम से आप एक और कहानी पढ़ंगे। इस कहानी में भी कोई किसी की परीक्षालेरहा है यह कहानी हमरे देश के बहुत होनहा बालक और उसके गरु चाणक्य के बार में है इसे हिंदी के प्रसिद्व लेखक जयशंकर प्रसाद ने लिखा है।

खोजबीन के लिए

पुस्तक में दए गए क्यू.आर. कोड की सहायता से आप्रेमचंद के बारे में और जान-समझ सकते है, साथ ही उनकी अन्य कहानियों का आनंद भी उठा सकते हैं

.ईदगाह नादान दोस्त दो बैलों की कथा

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