
मैया मैं नहिं माखन खायो

मैया मैं नहिं माखन खायो। भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो। चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ पेरे घर आयो॥ मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो ग्वाल-बाल सब बैर पर है, बरबस मुख लपटायो॥ तू माता मन की अति भोरी, इनके कहे पतियायो। जिय तेरे कछु भेद उपजि हैं जानि परायो जायो॥ ये ले अपनी लकुटि कमरिया, बहुतहिं नाच नचायो। सूरदास तब बिहँस जसोदा, लै उर कंठ लगायो॥

—सूरदास


कवि से परिचय
आपने जो रचना अभी पढ़ी है, वह सूरदास द्वारा रचित है। माना जाता है कि उनका जन्म 15वीं शताब्दीमें हुआ था सूरदास ने अपना अधिकांश जीवन मथुरा, गोवर्धन सहित बरज के ्षे्ो मे श्रकुण के गुणगान में भजन गते हुए बिताय उनकी रचनाएँ ब्रजभाषा में उपलबध है े रचनाएँ इतनी सुंर हैं कि आज भी लोगों के बीच बहुत प्रचलित हैं उनकी अधिकतर कविताओं ेंश्रीकृष्ण की बाल-लीलाओं का मनोहारी वर्णन है ये कविताएँ अत्यंत लोकप्िय हैं और देशभर र प्रेम से गायी जाती हैं अपनी उत्कृषट रचनाआओं के लिए वे महाकव सूरदास कहलात हैं उनकी मतयु 16वी शताब्दी में हुई थी

पाठ से
मेरी समझ से
(क) नीचे दए गए प्र्नो का सटीक उत्त कौन-साहै? उसके सामनेतार (*) बनाए (1) मै माखन कैसे खा सकता हू? इसके लिएश्ीकृषण ने क्या तर्क दिया?
मुझे तुम पराया समझती हो। मेरी माता, तुम बहुत भोली हो। मुझे यह लाठी-कंबल नहीं चाहिए। मेरे छोटे-छोटे हाथ छीके तक कैसे जा सकते हैं?
(2) श्रीकृषण मा के आने से पहले क्या कर रहे थे?
गाय चरा रहे थे। माखन खा रहे थे। मधुबन में भटक रहे थे मित्रों के संग खेल रहे थे।
(ख) अब अपने मित्रो के साथ चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से चुनकर यहाँ कुछ शब्द दिए गए हैं अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हं इनके सही अर्थ या संदर् से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
| शब्द | अर्थ या संदर्भ | ||
| 1. | जसोदा | 1. | समय मापने की एक इकाई (तीन घंटे का एक पहर होता है। एक दिवस में आठ पहर होते हैं। |
| 2. | पहर | 2. एक वट वृक्ष (मान्यता है कि श्रीकृष्ण जब गाय चराया करते थे, तब वे इसी वृ्ष के ऊपर चढ़कर वंशी की ध्वन | |
| 3. | लकुटि 3. कमरिया | से गायों को पुकारकर उन्हें एकत्रित करते) गोल पात्रके आकार का रस्सियों का बुना हुआ जाल जो छत या ऊँची जगह से लटकाया जाता है ताकि उसमें रखी हुई खाने-पीन की चीज़ो (जैसे— दूध, दही 3 आदि) को कुते, बिल्ली आदि न पा सकें। | |
| 4. | बंसीवट | यशोदा, श्रीकृष्ण की माँ, जिन्होंने श्रीकृष्ण को पाला था। | |
| 5. | मधुबन | 5. | जन्म देने वाली, उत्पत्न करने वाली, जननी, माँ। |
| 6. | छीको | 6. | गाय पालने वालों के बच्चे, श्रीकृषण के संगी साथी |
| 7. | माता | 7. मथुरा के पास यमुना के किनारे का एक वना। | |
| 8. | ग्वाल-बाल | लाठी और छोटा कंबल, कमली (मान्यता है कि श्रीकृषण | |
| लकुटि-कमरिया लेकर गाय चराने जाया करते थे)। | |||
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई है इ्हेंध्यान से पढिए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपनी कक्षा में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए
क) "भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोह पठायो"
(ख) "सूरदास तब बिहँसि जसोदा, लै उर कंठ लगायो"
सोच-विचार के लिए
पाठ को एक बार फिर से पदढिए और निम्नलिखित प्र्नोंके उतर ढूढकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए
(क) पद में श्रीकृषण ने अपने बारे मे क्या-क्या बताया है? (ख) यशोदा माता ने श्रीकृष्ण को हँसते हुए गले से क्यों लगा लिया?
कविता की रचना
"भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मोहि पठायो चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ पे घर आयो॥"
इन पंक्तियों के अंतिम शब्दों को ध्यान से देखिए। 'पठायो' और 'आयो' दोनों शब्दों की अंतिम ध्वन एक जैसी है। इस विशेषता को 'तुक' कहते हैं इस परे पद में प्त्येक पंक्त के अंतिम शब्द का तुक मिलता है। अनेक कवि अपनी रचना को प्रभावशाली बनाने के लिए तुक का उपयोग करते हैं।
(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढिए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस पद की अंतिम पंक्त में कवि ने अपना नाम भी दिया है आदि
(ख) अपने समूह की सूची को क्षामें सबके साथ साझा कीजिए
अन्मान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए
(क) श्रीकृषण अपनी माँ यशोदा को तर्क क्यो दे रहे होंगे? (ख) जब माता यशोदान श्रीकृष्ण को गले से लगा लिया, तब क्य हुआ होगा?
शब्दों के रूप
नीचे शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई है। इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं
(क) "भोर भयो गैयन के पाछे"
इस पंक्त में 'पाछे' शब्द आया है। इसके लिए 'पीछे' शब्द का उपयोग भी किया जाता है। इस पद में ऐसे कुछ और शब्द हैंजन्हें आप कुछ अलग रूप में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं उस प्रकार से लिखिए।

(ख) पद में से कुछ शब्द चुनकर नीचे स्तंभ 1 में दिए गएहैं और स्तंभ 2 में उनके अर्थ दिए गए हैं। शब्दों का उनके सही अथों से मिलान कीजिए
| स्तंभ 1 |
| 1. मुसकाई, हँसी |
| उपजि जानि |
| 2. उपजना, उत्पन्न होना 3. जायो NC जानकर, समझकर |
| जिय विश्वास किया, सच माना 4. 4. |
| 5. पठायो बाँह, हाथ, भुजा 5 t to be |
| पतियायो प्रकार, भाँति, रीति 6. 6. |
| बहियन 7. 7. मन, जी |
| बिधि 8. 8. जन्मा |
| बिहॉँसि 9. 9. मला, ं, लगाया, पोता |
| 10. भटक्यो 10. इधर-उधर घूमा या भटका |
| 11. लपटायो 11. भेज दिया |
"तू माता मन की अति भोरी"
भोरी' का अर्थहै 'भोली'। यहाँ 'ल' और 'र' वर्ण परस्पर बदल गए है आपने ध्यान दिया होगा कि इस पद में कुछ और शब्दोंमें भी 'ल' या 'ड' और 'र' में र्ण-परिवर्तन हुआ है ऐसे शब्द चुनकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
पंक्ति से पंक्ति
नीचे स्तंभ में कुछ पंक्तियाँ दी गयी हैं और स्तंभ 2 में उनके भावा्थ दिए गए हैं रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 | स्तंभ २ |
| भोर भयो गैयन के पाछे, मधुबन मैं छोटा बालक हूं मेरी बाहें छोटी हैं, मोहि पठायो। मैं छीके तक कैसे पहुँच सकता हू? | |
| 2. पर घर आयो। | चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ तेरे हृदय में अवश्य कोई भेद है, जो 2. मुझे पराया समझ लिया। |
| मैं बालक 3. | बहिंयन को माँ तुम मन की बड़ी भोली हो, इनकी छीको केहि बिधि पायो। बातों में आ गई हो। O |
| 4. ग्वाल-बाल बरबस मुख लपटायो। | बैर परे हैं, सुबह होते ही गायों के पीछेमुझे मधुबन सब 4. भेज दिया। |
| तू माता मन की अति भोरी, इनके 5. कहे पतियायो। | 5. चार पहर बंसीवट में भटकने के बाद साँझ होने पर घर आया। |
| जिय तेरे कछु भेद उपजि है, 6. जानि परायो जायो। | ये सब सखा मुझसे बैर रखते है, इन्होंने 6. मक्खन हठपू्वक मेरे मुख पर लिपटा दिया। |
पाठ से आगे
आपकी बात
"मैया मैं नहि माखन खायो"
यहाँ श्रीकृषण अपनी माँ के सामने सिद्ध करने का प्रयास कर रहे हैं कि उन्होंने माखन नहीं खाया है। कभी-कभी हमें दूसरों के सामने सिद्ध करना पड़ जाता है कि यह का्य हमने नहीं किया। क्या आपके साथ भी कभी ऐसा हुआ है? कब? किसके सामने? आपने अपनी बात सिद् करने के लिए कौन-कौन से तर्क दिए? उस घटना के बारे में बताइए
घर की वस्तुएँ
"मैं बालक बहियन को छोटो, छीको केहि बिधि पायो।" 'छीका' घर की एक ऐसी वस्तुहै जिसे सैकड़ों-वर् से भारत में उपयोग
में लाया जा रहा है।

नीचे कुछ और घरेल वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं इन्हें आपके घर में क्या कहते हैं? चित्ों के नीचे लिखिए। यदि किसी चित्र को पहचानने में कठनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं। 0



आप जानते ही हैं कि श्रीकृषण को मक्खन बहुत पसंद था दूध से दही, मक्खन बनाया जाता है और मक्खन से घी बनाया जाता है। नीचे दूध से घी बनाने की प्रक्रिया संबंधी कुछ चित्र दिए गए हैं। अपने परिवार के सदस्यों, शिक्षकों या इंटरनेट आदि की सहायता से दूध से घी बनाने की प्रक्रिया लिखिए।

समय का माप
चार पहर बंसीवट भटक्यो, साँझ परे घर आयो॥"
(क) पहर' और 'साझ' शब्दों का प्रयोग समय बताने के लिए किया जाता है समय बताने के लिए और कौन-कौन से शब्दों का प्रयोग किया जाता है? अपे समू में मिलकर सूची बनाइए और कक्षा में साझा कीजिए (संकेतकल, ऋतु, वर्ष, अब, पखवाड़ा, दशक, वेला, अवधि आदि)
(ख) श्रीकृष्ण के अनुसार वे कितने घंटे गाय चराते थे?
(ग) मान लीजिए वे शाम को छह बजे गाय चराकर लौटे वे सुबह कितने बजे गाय चराने के लिए घर से निकले होंगे?
(घ) 'दोपहर' का अर्थ है 'दो पहर' का समय। जब दूसरे पहर की समाप्त होती है और तीसरे पहर का प्रारंभ होता है यह लगभग 12 बजे का समय होता है, जब सूर् सिर पर आ जाता है। बताइए दिन के पहले पहर का प्रारंभ लगभग कितने बजे होगा?
हम सब विशेष हैं
(क) महाकवि सूरदास दृष्टिबाधित थे। उनकी विशेष क्षमता थी उनकी कल्पना शक्त और कविता रचने की कुशलता। हम सभी में कुछ न कुछ ऐसा होता है जो हमें सबसे विशेष और सबसे भिन्न बनाता है। नीचे दिए गए व्यक्तियों की विशेष क्षमताएँ क्या हैं, विचार कीजिए और लिखिए आपकी आपके किसी परिजन की आपके शिक्षक की आपके मित्र की
(ख) एक विशेषक्षमता ऐसी भी है जो हम सबके पास होती है। वह क्षमता है सबकी सहायता
करना, सबके भले के लिए सोचना। तो बताइए, इस क्षमता का उपयोग करके आप इनकी सहायता कैसे करेंगे—
एक सहपाठी पढ़ना जानता है और उसे एक पाठ समझ में नहीं आ रहा है। एक सहपाठी को पढ़ना अच्छा लगता है और वह देख नहीं सकता। एक सहपाठी बहुत जल्दी-जल्दी बोलता है और उसे कक्षा में भाषण देना है। एक सहपाठी बहुत अटक-अटक कर बोलता है और उसे ककषा में भाषण देना है।
एक सहपाठी को चलनेमें कठिनाई है और वह सबके साथ दौड़ना चाहता है। एक सहपाठ प्रतिदन विध्ालय आता है और उसे सुन में कठिनाई है।
आज की पहेली
दूध से मक्खन ही नहीं बल्क और भी बहुत कुछ बनाया जाता है नीचे दूध से बनने वाली कुछ वस्तुओं के चित्र दिए गए हैं। दी गई शब्द-पहेली में उनके नाम के पहले अक्षर दे दिए गए हैं नाम पूरे कीजिए

| खो | द | म | ल | ||
| प | छा | ||||
| मि | |||||
| घी | श | ||||
| आ |
सूरदास द्ारा रचित कुछ अन्य रचनाएँ खोजे व पढ़ें