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रहीम के ढोहे*
रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि ।
जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि ॥ तरुवर फल नहिं खात हैं सरवर पियहिं न पान । कहि रहीम पर काज हित, संपति संँचहि सुजान॥
रहिमन धागा प्रेम का, मत तो़ो छिटकाय । टूटे से फिर ना मिले, मिले गाँठ पर जाय ॥ रहिमन पानी राखिये बिनु पानी सब सून। पानी गए न ऊबरै, मोती, मानुष, चून॥ रहिमन बिपदाहू भली, जो थोरे दिन होय। हित अनहित या जगत में, जानि परत सब कोय ॥ रहिमन जिहा बावरी, कहि ग सरग पताल । आपु तो कह भीतर रही, जूती खात कपाल ॥ कहि रहीम संपत सगे, बनत बहुत बहु रीत । बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत ॥
कवि से परिचय

रहीम भक्तिकाल के एक प्रसिद्रकवि थे ऐसा माना जाता हैकि उनका जन्म 16वीं शताब्द में हुआ था उन्होने नीति, भक्त और प्रेम संबंधी रचनाएँ कीं उन्होंने अवधी और ब्रजभाष दोनों में कविताएँ लिखी हैं रहीम रामायण, महाभा आदिप्रसिद्ध्रंों के अ्छे जानकार थे उनकी मृत्य 17वीं शताब्ी मे हुई थी आज भी आम जन-जीवन में उनके दोहे बहुत लोकप्रय है।
पाठ से
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्र्नों का सबसे सही (सटीक) उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (*) बनाइए—
(1) रहिमन जिहा बावरी, कह गइ सरग पताला आपु तो कहि भीतर रही, जूती खात कपाल।" दोहे का भाव है
सोच-समझकर बोलना चाहिए मधुर वाणी में बोलना चाहिए। धीरे -धीरे बोलना चाहिए। सदा सच बोलना चाहिए।
(2) "हिमन देखिबड़न को, लघ न दीजिये डारि जहा काम आवे सुई, कहा करे तलवारि" इस दोहे का भाव क्या है?
तलवार सुई से बड़ी होती है। सुई का काम तलवार नहीं कर सकती। तलवार का महत्व सुई से ज्यादा है। हर छोटी-बड़ी चीज का अपना महत्व होता है। (ख) अब अपने मित्ोंके साथ चर्चा कीजिए और कारण बताईइए कि आपने यही उत्त क्यो चने?
मिलकर करें मिलान
पाठ में से कुछ दोहे स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके भाव स्तंभ ें दिए गएहैं अपने समू मे इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही भाव से मिलान कीजिए।
| स्तंभ 1 | स्तंभ २ | |
| रहिमन धागा ्रम का, मत तोड़ो छिटकाया टूे से फिर ना मिले, मिले गाँठ परि जाय॥ | 1. सज्जन परहित के लिए ही संपत्ि संचित करते हैं। | |
| 2. 3. | कहि रहीम संपति सगे, बनत बहुत बहु रीत। बिपति कसौटी जे कसे, ते ही साँचे मीत॥ | सच्चे मित्र विपत्ति 2. या विपदा में भी साथ रहते हैं |
| तरुवर फल नहिं खात हैं सरवर पियहिं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति संँचहि सुजान। | 3. प्रेम या रिश्तों को सहेजकर रखना चाहिए। | |
पंक्तियों पर चर्चा
नीच दिए गए दोहों पर समूह में चर्चा कीजिए और उनके अर्थ या भावार्थ अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—
(क) "रहिमन बिपदाह भली, जो थोरे दिन होया हित अनहित या जगत में जानि परत सब कोया।"
(ख) "रहिमन जिहा बावरी, कहि गई सरग पताला। आपु तो कह भीतर रही, जूती खात कपाल।,"
सोच-विचार के लिए
दोहों को एक बार फिर से पढिए और निम्नलिखित के बार में पता लगाकर अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए—
- "रहिमन धागा प्रेम का, मत तोड़ो छिटकाय। टूटे से फिर ना मिले, मिले गाॉँठ पर जाया।"
(क) इस दोहे मे मिले' के स्थान पर 'जु़े' और छिटकाय' के स्थान पर 'चटकाय' शब्द का प्रयोग भी लोक में प्रचलित है। जैसे—
टूट से फिर ना जुड़, जड़ गॉँठ पड़ जाया।"
इसी प्रकार पहले दोहेमें डारि' के स्थान पर 'डार', 'तलवारि' के ्थान पर 'तरखार' और चौथे दोहे में मानुष' के स्थान पर 'मानस' का उपयोग भी प्रलित हैं ऐसा क्यो होता है?
(ख) इस दोहे मे प्रम के उदाहरण में धागे का प्रयोग ही क्यों किया गया है? क्या आप धागे के स्थान पर कोई अन्य उदाहरण सुझा सकतेहै? अपने सुझाव का कारण भी बताइए
- "तरुवर फल नहिं खात हैं सरवर पियहं न पान। कहि रहीम पर काज हित, संपति
संचहि सुजान।"
इस दोहे मे प्रकृति के माध्यम से मनु्य के किस मानवीय गुण की बात की गई है? प्रकृति से हम और क्या-क्या सीख सकते हैं?
शब्दों की बात
हमने शब्ों के नए-नए रूप जाने और समझेो अब कुछ करके देखें
शब्द-संपदा
कविता में आए कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं इन शब्दों को आपकी मातृभाषा में क्या कहते हैं? लिखिए
| कविता में आए शब्द | मातृभाषा में समानार्थक शब्द |
| तरुवर | |
| बिपति | |
| छिटकाय | |
| सुजान | |
| सरवर | |
| साँचे | |
| कपाल |
शब्द एक अर्थ अनेक
"रहिमन पानी राखिये, बिनु पानी सब सूना
पानी गए न ऊबर, मोती, मानुष, चूना"
इस दोहे में पानी ' शब्द के तीन अर् हैं—सम्मान, जल, चमका। इसी प्रकार कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं आप भी इन शब्दो के तीन-तीन अर्थ लिखिए। आप इस कार्य में शब्दकोश, इंटरनेट, शिक्षक या अभिभावकों की सहायता भी ले सकते हैं।

पाठ से आगे
आपकी बात
"रहिमन देखि बड़ेन को, लघु न दीजिये डारि जहाँ काम आवे सुई, कहा करे तलवारि।"
इस दोहे का भाव है—न कोई बड़ा है और न ही कोई छोटा है। सबके अपने-अपने काम हैं, सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता और महत्ा है चाहे हाथी हो या चींटी, तलवार हो या सुई, सबके अपने-अपने आकार-प्रकार हैं और सबकी अपनी-अपनी उपयोगिता और महत्व है। सिलाई का काम सुई से ही किया जा सकता है, तलवार से नहीं सुई जोड़ने का काम करती है जबकि तलवार काटने का। कोई वस्तु हो या व्यक्त, छोटा हो या बड़ा, सबका सम्मान करना चाहिए। अपने मनपसंद दोहे को इस तरह की शैली में अपने शब्दों में लिखिए। दोहा पाठ से या पाठ से बाहर का हो सकता है।
रहीम, कबीर, तुलसी, वृंद आदि के दोहे आपने दृश्य-श्रव्य (टी.वी.रेडियो) माध्यमों से कई बार सुने होंगे। कक्षा में आपने दोहे भी बड़ मनोयोग से गाए होंगे। अब बारी है इन दोहों की रिकॉर्डिं (ऑडियो या विजुअल) की रिकॉर्डिंग सामान्य मोबाइल से की जा सकती है इ्ें अपने दोस्तों के साथ समूह में या अकेले गा सकते हैं यदि संभव हो तो वाधयंत्रोंके साथ भी गायन करें रिकॉर्डिंग के बाद दोे स्वयं भी सुनें और लोगों को भी सुनाएँ रहीम, वृ्द, कबीर, तुलसी, बिहारी आदि के दोहे आज भी जनजीवन में लोकप्रिय है। दोहे का प्रयोग लोग अपनी बात पर विशेष ध्यान दिलाने के लिए करते हैं जब दोहे समाज में इतने लोकप्िय है तो क्यों न इन दोहों को एकत्र कें और अंत्यक्षरी खेलें अपने समूह में मिलकर दोहे एकतर कीजिए। इस कारय में आप इंटरनेट, पुस्तकालय और अपने शिक्षकों या अभिभावकों की सहायता भी ले सकते हैं।
आज की पहेली
- दो अक्षर का मेरा नाम, आता हू खाने के काम उल्टा होकर नाच दिखाऊँ, मैं क्यों अपना नाम बताऊँ
- एक किले के दो ही द्ार, उनमें सैनिक लकड़ीदार टकराएँ जब दीवारों से, जल उठे सारा संसार।
खोजबीन के लिए
रहीम के कुछ अन्य दोहे पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से पढ़, देखें व समझें।