Meera ke Pad - CBSE Class 7 Hindi Notes

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Chapter Study Guide & Summary

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Key Concepts & Syllabus Topics

Important Definitions & Terminology

Meera ke Pad Overview
The central theme and foundational concept covered in Class 7 Hindi Chapter 10, emphasizing conceptual clarity, NCERT curriculum alignment, and exam readiness.
NCERT Curriculum Alignment
Structured study material adhering strictly to CBSE board guidelines, learning objectives, and standardized assessment criteria for Class 7.
Active Recall & Revision
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Quick Revision & Key Points

Full NCERT Chapter: Meera ke Pad

10 मीराकैपद

(1)

बसो मेर नैनमें नंदलाल। मोहनि मूरति साँवरि सूरति, नैना बने विशाल॥ अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल॥ शुद्रघंटिका कटितट सोभित, नूपु शब्द रसाल॥ मीरा के प्रभ संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल॥

(2)

बरसे बदरिया सावन की, सावन की मन भावन की। सावन में उम्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हिरि आवन की॥ उमड़ घुमड़ चहुं दिश से आया, दामिन दम कै झर लावन की। न्हीं न्हीं बँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की॥ मीरा के प्भु गिरधरनागर, आनंद मंगल गावन की॥ मीरा

कवयित्री से परिचय

आपने जो रचना अभी पढ़ी है, उसे आज से लगभग 500 वर्ष पहले रचा गया था। इसे हिंदी की महान कवयतरी, कृष्ण भक्त और संत मीरा ने रचा था यह माना जाता है कि मीरा बचपन से ही कृष्णकी भक्तमें मगन रहती थीं एक राजुमार होते हु भी उनहोंे संतों ा जीवन चुना और महलों को त्यागकर तीथों की यत्राएँ करने लगीं उन्होने मंदरों ें भजन गाना और सत्संग करना प्रांभ कर दिया। उनके गाए हुए भजन लोग आज भी श्रद्धा और प्ेम से गाते, पढ़ते और सुनते-सुनाते हैं।

पाठ से

आइए, अब हम इस कविता पर विस्तार से चर्चा करे। आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेगी।

मेरी र समझ से

(क) नीचे दिए गए प्र्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामनेतारा () बनाइए। कुछ प्र्नों े एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) "बसो मेर न में नंदलाल" पद े मीरा किनसे विनती कर रही हैं?

• संतों से • भक्तों से • वैजंती से • श्रीकृष्ण से

(2) "बसो मेर नमें नंदलाल" पद का मुख्य विषय क्या है?

• प्रेम और भक्ति • प्रृति की सुंदरता • युद्र और शांति • ज़ान और शिक्षा

(3) "बरसे बदरिया सावन की" पद में कौन-सी ऋतु का वर्णन किया गया है?

• सर्दी • गरमी • वर्षा • वसंत

(4) "बरसे बदरिया सावन की" पद को पढ़कर ऐसा लगता है, जैसे मीरा

• प्रसन्न हैं। • दुखी है। • उदास हैं। • चितित हैं।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मित्रो के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्त ही क्यों चने?

मिलकर करे मिलान

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं अपने समूह में इन पर चर्च कीजिए और इन्हं इनके सही अथां या संदभं से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं

शब्दअर्थ/संदर्भ
1.नंदलालपर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृषण
2. वैजंती मालश्रावण का महीना, आषाढ़ के बाद का और भाद्रपद के पहले का महीना
3. सावन3. वैजयंती पौधे के बीजों से बने वाली माला
4.गिरधर4नंद के पुत्र श्ीकृष्ण

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तयाँ नीचे दी गई हैं इन्ें पढ़कर आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।

(क) "न्हीं न्हं बँदन मेहा बरसे, शीतल पवन सोहावन की॥" (ख) "मीरा के प्रभ संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाला॥"

सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर से पढिए, पता लगाइए और लिखिए

(क) पहले पद मे श्रकृषण के बाे मेंक्या-क्या बताया गया है? (ख) दूसरे पद में सावन के बार में क्या-क्या बताया गया है?

कविता की रचना

"मीरा के प्रु संतन सुखदाई" "मीरा के ्भु गिरधरनागर"

इन दोनों पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियोंमें मीरा ने अपने नाम का उल्लेख किया है। मीरा के समय के अनेक कवि अपनी रचना के अंत में अपने नाम को सम्मलित कर दिया करते थे आज भी कुछ कवि अपना नाम कविता में जोड़़ देते हैं।

आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी अनेक विशेषताएँ दिखाई देंगी (जैसे— कविता में छोटी-छोट पंक्तयाँ है श्रीकृषण के लिए अलग-अलग नामों का प्रयोग किया गया है आदि)

(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढिए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस पाठ की विशेषताओं की सूची बनाइए
(ख) अपने समूह की सूची को क्षा में सबके साथ साझा कीजिए

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए

(क) मान लीजिए कि बादलों ने मीरा को श्रीकृषण के आने का संदेश सुनाया है आपको क्या लगता हैकि उन्होंने क्या कहा होगा? कैसे कहा होगा?
(ख) यदि आपको मीरा से बातचीत करने का अवसर मिल जाए तो आप उनसे क्या-क्या कहेंगे और क्या-क्या पूछेंगे?

शब्दोंके रूप

अगले पृष्ठ पर शब्दों से जुड़ी कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं इन्हें करने के लिए आप शब्दकोश, अपने शिक्षकों और साथियों की सहायता भी ले सकते हैं।

(क) "मोहनि मूरति सावरि सूरत, नैना बने विशाल ।"

इस पंक्त में 'साॉवरि' शब्द आया है। इसके स्थान पर अधिकतर 'सावली' शब्द का प्रयोग किया जाता है। इस पद मेंऐसे कुछ और शब्दहैं जि्हें आप कुछ अलग रू में लिखते और बोलते होंगे। नीचे ऐसे ही कुछ अन्य शब्द दिए गए हैं इन्हें आप जिस रूप में बोलते-लिखते हैं उस तरह से लिखिए।

• नैनन • मेरो मनवा • सोभित • आवन • भक्त वछ्ल • दिश • बदरिया मेहा •

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए स्थनों मे श्रकृषणसे जु़े शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए

पक्ति से पंक्ति

नीचेस्तंभ औरस्तभ मे कुछ पक्तिया दी गई है मिलती-जुलती पंकतयों कोरखा खीचकर मिलाए

स्तंभ 1स्तंभ २
1. अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल2. होंठों पर सुरीली धुनों से भरी हुई बाँसुरी और सीने पर वैजयंती माला सजी हुई है।
2. क्षुद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाल5. कमर पर छोटी-छोटी घंटियाँ सजी हुई हैं और पैरों में बँधे हुए नूपुर मीठी आवाज में बोल रहे हैं।
3. मीरा के प्रभु संतन सुखदाई, भक्त वछल गोपाल4. हे मीरा के प्रभु! तुम संतों को सुख देने वाले हो और अपने भक्तों से स्नेह करने वाले हो।
4. सावन में उम्यो मेरो मनवा, भनक सुनी हिरि आवन की3. सावन के महीने में मेरे मन में बहुत-सी उमंगें उठ रही हैं क्योंकि मैंने श्रीकृष्ण के आने की चर्चा सुनी है।
5. उमड़ घुमड़ चहुँ दिश से आया, दामिन दमके झर लावन की1. चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर बरस रहे हैं, बिजली चमक रही है, वर्षा की झड़ी लग गई है।

कविता का सौंदर्य

"बरसे बदरिया सावन की"

इस पंक्त में रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। क्या आपको कोई विशेष बात दिखाई दी?

इस पंक्त में "बरसे' और 'बदरिया' दोनों शब्द साथ-साथ आए हैं और दोनों 'ब' वर्ण से शुरू हो रहे हैं दूसरे शब्दो मेंकहे तो इस पंक्तमें ब व्ण की आवृत होरही है इस कारण यह पंक्त और भी अधिक सुंदर बन गई है पाठ मेंसे इस प्रार के अन्य उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।

रूप बदलकर

पाठ के किसी एक पद को एक अनुच्छेद के रूप में लिखिए। उदाहरण के लिए—'सावन के बादल बरस रहे ैं.. या 'सावन की बदरिया बरसती है.. आदि।

मुहावरे

"बसो मेरे नैन में नंदलाला"

नैनों या आँखोंमें बस जाना एक मुहावर है, जब हमें कोई व्यक्त या वस्तुइतनी अधिक ्रय लगने लगती है कि उसका ध्यान हर समय मन में बना रहने लगता है तब हम इस मुहावरे का प्रयोग करतेहैं जैसे—उसकी छवि मेरी आँखों ें बस गई है ऐसा ही एक अ्य मुहावरा हैआँखों में घर करना।

नीचे आँखों से जुड़े कुछ और मुहावरे दिए गए हैं अपने परिजनों, साथियो, शिक्षकों, पस्तकालय और इंटरनेट की सहायता से इनके अर्थ समझिए और इनका वाक्यों मेंप्रयोग कीजिए।

.आँखों का तारा
2. आँखों पर पर्दा पड़ना
3. आँखों के आगे अँधेरा छाना
४. आँख दिखाना
5. आँख का कॉटा
6. आँखें फेरना
7. आँख भर आना
8. आँखें चुराना
9. आँखों से उतारना
[0. आँखों में खटकना

सबकी प्रस्तुति

पाठ के किसी एक पद को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर अलग-अलग तरीके से ककषा के सामनेप्रस्तुत कीजिए, उदाहरण के लिए—

• गायन करना। • भाव-नृत्यप्रस्तुति करना। • कविता पाठ करना आदि।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) "बरसे बदरिया सावन की"

1.इस पद में सावन का सुंदर चित्रण किया गया है जब आपके गाँव या नगर में सावन आता है तो मौसम में क्या परिवर्तन आते हैं? वर्णन कीजिए।
2. सावन की ऋतु में किस-किस प्रकार की ध्वनियाँ सुनाई देती हैं? इन ध्वनियों को सुनकर आपके मन में कौन-कौन सी भावनाएँ उठती हैं? आप कैसा अनुभव करते हैं? अपने अनुभवों के आधार पर बताइए। (उदाहरण के लिए—बिजली के कड़कने या बूँदो के टपकने की ध्वनियाँ।)
3.वर्ष ऋतु में आपको कौन-कौन सी गतिविधियाँ करने या खेल खेलने ें आनंद आता है?
4. सावन के महीने में हमरे देश में अनेक त्योहार मनाए जाते हैं आपके घर, परिसर या गाँव में सावन में कौन-कौन से त्योहार मनाए जाते है? किसी एक के विषय में अपने अनुभव बताइए

(ख) "बसो मेर नैन में नंदलाल"

इस पद में मीर श्रीकृष्ण को 'संतों को सुख देने वाला'और भक्तों का पालन करने वाला' कहती हैं।

  1. क्या आपके जीवन में कोई ऐसा व्यक्त है जो सदैव आपकी सहायता करता है और आपको आनंदित करता है? विस्तार से बताइए।
    कवयत्ी ने पाठ में नूपुर' और शक्ुद्रघंटिका' जैसे उदाहरणों का प्रयोग किया है किसी का वर्णन करने के लिए हम केवल बड़ी-बड़ी ही नहीं बल्क उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातें भी बता सकते हैं आप भी अपने आस-पास के किसी व्यक्त या व्तु का वर्न करते हुए उससे जुड़ी छोटी-छोटी बातों पर ध्यान दीजिए और उन्हें लिखिए।

विशेषताएँ

"मोहन मूरति सावर सूरत, नैना बने विशाल।"

(क) इस पंक्त में कवयत्ी नेश्ीकृष्ण की मोहनी मूरत, साँवरी सूरत और विशाल नैनों की बात की है। आपको श्रीकृूष्ण की कौन-कौन सी बातों ने सबसे अधिक आकर्षित किया?

(ख) किसी व्यक्त या वस्तु का कौन-सा गुण आपको सबसे अधिक आकर्षित करता है? क्यों? अपने जीवन से जु़े किसी व्यक्त या वस्तु के उदाहरण से बताइए

(ग) हम सबकी कुछ विशेषताएँ बाह तो कुछ आंतरिक होती हैं। बाह विशेषताएँ तो हमें दिखाई दे जाती हैं लेकिन आंतरिक विशेषताएँ व्यक्त के व्यवहार से पता चलती हैं। आप अपनी दोनों प्रकार की विशेषताओं के दो-दो उदाहरण दीजिए

मधुर ध्वनियाँ

"अधर सुधा रस मुरली राजति, उर वैजंती माल॥ rer
क्षद्र घंटिका कटितट सोभित, नूपुर शब्द रसाला॥"
इन पंकि्तियो में तीन ऐसी वस्तुओं के नाम आएहैं, जिनसे मधुर ध्वनिया उतपन्न होती हैं उन वस्तुओं के नाम
पहचानिए और उनके नीचे रेखा खींचिए।
आगे मधुर ध्वनियाँ उत्पन्न करने वाले कुछ वादधयंतरों के विषय में पहेलियाँ दी गई हैं इन्हें पहचानकर सही
चित्रों के साथ रेखा खींचकर मिलाइए

हवा से बोलती है, ुर में गीत सुनाती है, होठों से छू जाए, तो मन को लुभाती है। दो साथियों का जोड़ा, हाथों से है बजता, ताल मिलाए ताल से, हर संगत में सजता। शाहों में शामिल होती, फूको स संगीत सुनाती, सुख के सारे काम सजाती, दुख में भी ये साथ निभाती

तारों में छिपा संगीत, माँ सरस्वती का गहना, छे़ जब अँगुलियाँ, बहे रागों का झरना।

दो हाथों से बजती है ये, ताल से थिरके पैर, हर उत्सव की है ये साथी, लटक गले ये करती सैर नागिन-सी लहराती है जो, बड़ी खास आवाज है जिसकी, तीन, चीन, रंगीन, हीन से मिली-जुली पहचान है इसकी सौ तारों का जादू डंडियो से जो गाए, कश्मीर की वादियों जैसा मधुर संगीत लाए।

छोटा-सा यंत्रहै, हाथों से बजता जाए, घर-मंदिर का साथी, झंकार से मन बहलाए।

चित्र करते हैं बातें

नीचे दिए गए चित्र को ध्यान से देखिए

यह मीरा का कॉँगड़ा शैली मेंबना चित्रह। इस चित्र के आधार पर मीरा के संबंध में एक अनुच्छेद लिखिए।

सावन से जुड़े गीत

अपनेपरिजनों, मित्ो, शिक्षको, पुस्तकालय याइंटरनेट की सहायता से सावन में गाए जाने वाले गीतों को ढूँढ़िए और किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए। आप सावन से जुड़ा कोई भी लोकगीत, खेलगीत कविता आदि लिख सकते हैं क्षा के सभी समूहोंद्वार एकत्रत गीतों को जोड़कर एक पुस्तका बनाइए और कक्षा के पुस्तकालय में उसे सम्मिलित कीजिए

खोजबीन

आपने पढ़ा कि मीर शरीकृषण की आराधना करती थीं आपने कक्षा 6 की पुस्तक मल्हार मे पढ़ा था कि सूरदास भीश्रीृष्ण के भक्त थे अपने समूह के साथ मिलकर सूरदास की कुछ रचनाएँढूढ़कर कक्ा में सुनाइए। इसके लिए आप पुस्तकालय और इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।

आज की पहेली

पाठ में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए है। इनकी अंतिम ध्वन से मिलती-जुलती ध्वनि वाले शब्द वर्ग में से खोजिए और लिखिए—

शब्दसमान ध्वनि वाले शब्द
1.मूरतिसूरति
2.सावन
3.उमड़
4.नागर
5.नंदलाल
घु
सू गोसू गो
पा

खोजबीन के लिए

नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप कवयित्री मीर के बारेमें और जान-समझ सकते हैं—

• मीरा https://www.youtube.com/watch?v=KWKtPM8c-PA&ab_channel=NCERTOFFICIAL
• मीरा के भजन https://www.youtube.com/watch?v=86Z-AA2vBQM&ab_channel=NCERTOFFICIAL
• मीराबाई https://www.youtube.com/watch? $r =$ 02GsmVi37sA&ab_channel $\circeq$ NCERTOFFICIAL
• मीरा के भजन-एम एस सुब्बु लक्ष्मी https://www.youtube.com/watch?v=EhhOcNJXJeI&ab_channel=PrasarBharatiArchives
• मीरा फिल्म 1945 भाग एक https://www.youtube.com/watch?v=005QUww2u7Q&ab_channel=PrasarBharatiArchives
• मेरे तो गिरधर गोपाल https://www.youtube.com/watch?v=P8q9-cJKOdg&ab_channel=NCERTOFFICIAL

पढ़ने के लिए

स्वामिभक्त सुमुख

पुराने समय में, महिंसक राज्य में जब सकुल नामक राजा ंका शासन था, ,चित्रकूट प्वत पर एक गुफा में हंसों बड़ा झुंड निवास

चूंकि अनेक पक्षी उस सरोवर पर आते-जाते थे, इसलिए शिकारियों का वह मनपसंद स्थान बन गया था जब हंस-टोली

सरोवर पर उतरी तो हंसों के राजा के पाँव आखेटक के जाल में फंस गए
अगर मैं अभी ही और चुपचाप ही अपनेपाव छडाने का प्रयास करने लगा चिल्ला पड़ा तो मेरे साथी
बिना कुछ चुगे ही उड़ जाएँगे। बेचार! यहाँ पहुँचने केलिए हू जाल की रस्सी मेरे शरीर में मैं जितना खींचता 000 उन्होंने कितनी लंबी उतनी ही अधिक फंसती उड़ान भरी है। जाती है।
उसने शांत से इंतजार किया। तब हंसों को संकट का संकेत सुनाई दिया आह! खतरे का संकेत! अब वे पानी में आह! चलो, जल्दी वापस चित्रकूट
क्रीड़ा और उछल-कूद चलते हैं! कर रहे है उन्होंने पेट-भर चुग लिया होगा। यह पता लगाने मुझे महाराज लेकिन पुकारा का समय नहीं है। हमें अपने प्राणों मरालदेव दिखाई नहीं दे रहे। किसने था? की रक्षा करने के लिए यहाँ से कहीं वहीं तो घायल नहीं हो उड़ जाना चाहिए। गए? पूरी टोली में केवल एक विंाग्रस्त, सुमख सरोवर पर हंस ऐसा था, जो उड़ जाने लौट कर गया और उसने राजा को तैयार न था और वह को घायल और लहूलुहान था-मंत्री सुमुखवा अवस्था में पाया।

इस आखेटक ने हमें छोड़़ कर हमें क्रीडा हंस बनाकर राजा के पास ले हम पर बहुत उपकार यहाँ के राजा को भेंट करके चलो! किया है। पुरस्कार पा सकता था या हमें मारकर हमारा माँस बेच सकता था आप इस आखेटक की ओर से यहा के राजा से बात क्यों नही करते। लेकिन ऐसा करना आखेटक दोंनो हंसों को राजा संकट सेखाती ही है रा तुहें पालतू सकुल के पास ले गया। बनाकर बंधन में ख सकते है या मरवा भी सकते है। तुम्हारा हृदय
पारवतन हो गया। हो ये
सकता है कि तुम्हारे ये दोनों उत्तम हंस तुम्हारे
राजा भी कठोर हृदय है, महाराज यह हंसों के राजा हाथ कैसे वाले न हों और उनके सेनापि ही लगे?
तब आखेटक ने सारा जब हंसों का खाना हो गया हेराजा, इस
किस्सा सुनाया हंसों मैं इन्हें सोने के तुम्हरे लिए क्या इसे पुरस्कार दिलवाने के आसन पर ा कर सकता हूं? शहद और मिसरी का पजं किा
राजा ने उनकी प्र्थना स्वीकार कर ली राजा सकुल की अनुमति लेकर हंसों का राजा मरालदेव और आप कैसे सुमुख अपे झुंडमें वापस आ गए। मुक्त हए? मैं ें तुम्हें एक घर, रथ, भरपूर सोना दे यह सब मेरे सेनापति रहा हूँ और तु्हारे लिए एक लाख की सुमुख की समझदारी और निषठा कैकारण संभव हुआ। उसने मुझे आय की व्यवस्था बचाने के लिए अपने प्राणों की करता हू बाजी लगा दी

पढ़ने के लिए

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा

विजयी विश्व तिरंगा प्यारा। झंडा ऊँचा रहे हमारा।
सदा शक्त बरसाने वाला, प्रेम सुधा सरसाने वाला।
वीरों को हरसाने वाला, मातृभूमि का तन मन सारा॥

झंडा ऊँचा रहे हमारा। विजयी विश्ख तिरंगा प्यारा॥ स्वतंत्रा के भीषण रण में, लख कर जोश ब़े क्षण-क्षणमं' कापे शत्रुदेख कर मन में, मिट जावे भय संकट सारा॥ झंडा ऊँचा रहे हमारा।

विजयी विश्व तिरंग प्याराV इस झंडे के नीचे निर्भिय, ले स्वराज्य यह अविचल निश्चय। बोलो भारत-माता की जय, स्वतंत्रता है ध्येय हमारा॥ झंडा ऊँचा रहेहमारा।

विजयी विश्ख तिरंा प्यारा। आओ प्यारे वीरो आओ, देश धर्म पर बल बल जाओ। एक साथ सब मिल कर गाओ, प्यारा भारत देश हमारा झंडा ऊँचा रहे हमारा

विजयी विश्व तिंगा प्ारा। इसकी शान न जाने पाये, चाहे जान भले ही जाये। विश्व विजय करके दिखाये, तब होवे प्रण पूर्ण हमा। झंडा ऊँचा रहे हमारा। विजयी विश्व तिरंगा प्यारा॥ श्यामलाल गुप्त 'पार्षद'

यहाँ आपके लिए एक छोटा-सा शब्दकोश दिया गया है इस शब्दकोश में वे शब्द हैं, जो विभिन्न पाठों में आए हैं और आपके लिए नए हो सकते हैं किसी-किसी शब्द के कई अर्थ भी हो सकते हैं पाठ के संदर् से जोड़कर आप यह अनुमान स्वयं लगाएँ कि कौन-सा अर्थ पाठ के लिए अधिक उपयु्त है।

कहीं-कहीं शब्दों के अनेक समानारथी भी दिए गए हैं इससे आप प्रसंग के अनुसार अनुकूल शब्द का चयन करना सीख सकेंगे। यह शब्दकोश आपको शब्दों के न केवल सही अर्थ जानने में सहायता करेगा अपितु शब्दों की सही वर्तनी भी सिखाएगा।

शब्द का अर् देने से पहले मूल शब्द के बाद कोष्ठक में एक संकेताक्षर दिया गया है इन संकेतों से हमें शब्दों की भाषा और व्याकरण संबंधी जानकारी मिलती है यहाँ जो संकेताक्षर अथवा संक्षप्त रूप्रयुक्त हु है, वे इस प्रकार हैं X

अं. —अंग्रेज़ी अ - अव्यय अ. -अरबी अ.क्रि. - अकर्मक क्रिया पु. —पुंलिंग फा. -फारसी वि. -विशेषण सं. संस्कृत स.क्रि. - सकर्मक क्रिया सर्व. - सर्वनाम स्त्री. -स्त्रीलिंग

अकाल [पु.सं.] –सूखा, अयोग्य या अनियत काल, कुसमय, अनवसर, परमात्मा
अदुृश्य [वि.सं.] –जो दिखाई न दे, जो देखा न जा सके, अगोचर, लुपत, गायब
अधर [वि.स.] -होंठ, नीचे का ओठ, अंतरक्ष, पाताल, दक्षिण दिशा
अनोखी [वि.] –अनूठा, अ्भत, अपू्व, नया, सुंद
अनौपचारिक [वि.सं.]-नियम आदि का पालन न किया गया हो
अभिवादन [पु.सं] - प्रणाम करना, छोटे की ओर से ब़ को नमस्का, स्तुति
असफल [वि.सं.] -विफल, नाकामयाब

आखेटक [प.स.] -शिकारी, शिकार
आग्रही [वि.सं.]-आग्रह करने वाला
आजीविका [स्री.स.] -रोजगार, रोजी, धंधा
आमोद [प.सं.] –ह् प्रन्ता, खुशी, बिखने और फैलनेवाली सुगंध, सुरभि
आवन [पु.] आगमन

आवरण [पु.सं.]–ढकना, छिपाना, घेरना, ढक्कन, परदा, बचाव, ढाल, चहारदीवारी आवेश [पु.सं.] – प्वेश, दबा लेना, हावी हो जाना, गस्सा, जोश, घमंड़ लगन आश्चर्य [प.सं.] –अचरज, अचंभा, विस्मय, अद्भुत रस का स्थायी भाव आश्रय [पु.सं.] –आधार, विषय, शरण, ठिकाना, घर, सहायता आहत [वि.स.]–घायल, आघात किया गया हो, जिस पर प्रहार, मार हुआ, हटाया

उपवन [प.सं.]–उधयान, बगीचा
उका
उमड [स्री.]- बाढ़, धावा, घराव
उर [वि.सं.] -हृदय, मन

औपचारिक [वि.सं.] –गौण, उपचार संबंधी, दिखाऊ

कपोत [प.सं.] –कबूतर, पंडुक, चिड़िया
कसर [स्ी.(अ.)] कमी न्यूनता, घाटा,वैर, विकार
काक [पु.सं.] कौआ, एक द्वी, एक माप, कान
कुज पु.सं. -लता आदिसे िरा याढक हुआ स्थान, हाथी का दाँत, नचेका जबड़ा, गुफा
कुठढन [स्ी.] खीझ, कुढ़नेका भाव, जलन, वशता आदि की अनुभूति से होने वाला मनस्ताप
कुल [पु.सं. -वंश,घराना, गोत्, समुदा, श्रणी, घर, आवास,जनपद, सब, सारा
कोकिल [पु.स. कोयल, अंगा, एक तरह का साप

क्ष

्ुद्र [विसं.] -न्हा, छोटा, तुच्छ, खोटा, ओछा

खंजन [प.सं.] —एक प्रिद्ध छोटी चिड़िया, जो मैदान प्रेशोंमें केवल जाड़े में दिखाई देती है, खंडरिच, लँगड़ाते हुए चलना

खग [पु.सं.] पक्षी, सू्य ग्र, वायु, बादल, चंद्रम, बाण, देवता खता [प.] -क्षत, घाव

गावन [स्त्र.] गाने का ढ़ंग गुजारा [पु.फा. -निव्वह, रा्ा, घाट, पुल या नाव से नदी पार करना

घंटिका स्त्र.स.]-छोटी घटी,घुँघर घनघोर [वि.सं.]-बहुत घना, जबरद्त, गहरा, भयंकर घसियारा [प.] -घास खोदने वाला, घास काटने वाला, घास बेचने वाला घुमड़ [अ.क्रि] -बादलों का इधर-उधर से आकर जमा होना

चकित [वि.सं.] -विस्मत, हैरा, शंकित, घबराया हुआ, भीत
चहु [वि.] चारों ओर, चार
चातक [पु.सं.] -पपीहा, सारंग (कवि-संप्राय के अनुसार यह पक्षी केवल वर्षा, बल्क स्वाती नक्त्रमे होने वाली वर्षा का जल पीता है, फलत: सदैव बादलों की ओर टकटकी लगाए रहता है।)
चापलूस [वि.फा.] - चाटुकार, खुशामदी
चित्त [पु.सं.]– अंतकरण, मन, अंतरिद्रिय
चेटी [स्त्ी.सं.] -दासी, सेविका, सेवा-टहल करने वाली स्त्री

छटा [स्रीस.] -शोभा, छवि, झलक, दीप्त, परंपरा, बिजली छुटपन [पु.अ.] छोटापन, बचपन

जलाशय [प.सं.]–झील, तालाब, जलाधार, समुद् जिय [पु.]-जी, मन, जान, चित्त, जीव

झर पु.सं. -इरना, सोता, जलप्रा की ध्वनी, ज्ाला, आँच, डुंड झलमल [प.वि.] -झलमलाने का भाव, अस्थर झलमलाता हुआ प्रकाश झुकझलाना [अ.क्र.] खीझना, चिढ़ना, बिगड़ना

ट्रैफिक [अं.] यातायात

ठाठ [प.]–शान, सजधज, सितार का तार

ढाल [सत्ी. सं.] -तलवार, ाले आदि के आघात को रोकने का लोहे यागैंडे के चमड़े का बना कछुवे की पीठ जैसा एक साधन, आगे की ओर क्मश: नीची होती गई जमीन, उतार, ढंग, प्रकार

तात [पु.सं.] – पिता, आदरणीय व्यक्ति
ताप [प.सं.]—गरमी, ज्र, दु:ख, मानसिक व्था, आधि, ऊष्णता, गर्महट के लिहाज से किसी वस्तु की दशा-वह दशा जो एक वस्तु से दूसरी वस्तुमे ऊ्ा के प्रवाह की दिशा निधारित करती है।
तालीम स्त्री.(अ.)शिक्षा
ताहि [सर्व.]-उसे, उसको

दम [पु.फा.]–साँस, शखवास, पल, लहजा, ्षण, ताकत, जिंदगी, जोर दामिन [स्त्ी] दामिनी, बिजली
दुर्जन [प.स.]-दुष्ट मु्य, खल
्रोह [पु.सं.] -दूसरे का अनिष्ट चाहना, हिंसा, अपराध, वैर, वद्रोह

C

नूपर [प.स.] घुँघरू, पैर का एक गहना नैना [पु.] ने्, ँख

पनघट [पु.] - पानी भरने का घाट
परतीती-प्रतीत, ज्ान, बोध, हर्ष, विश्वास
पवन [पु.सं.] – हवा, छलनी, पानी
पैनी [विस्तरी.]-जो भीतर की वस्तुको देख सके, जिसकी धार बहुत तेज हो
प्रशिक्षण [प.] -किसी व्यवसाय, कला, दौड़ आदि की व्यावहारिक रूपमें लगातार कुछ समय तक दी जाने वाली शिक्षा ट्रनिंग

फरमाइश [सत्री.फा.] -आज्ञा रूप में कुछ माँगना, आज्ा, कोई चीज भेजने की आज्ा, आई्र फौरन [अ.(अ.)] -तुरंत, अभी, इटपट

बघारना [स.क्र.] - छौकना, तड़का देना, हींग, जीरा, प्याज आदि घी में कड़क़ाकर दाल, तरकारी आदि में डालना

बसन [पु.सं.] -वसत्र, आवरण, ढकने की वस्तु, निवास
बानी [स्तरी] -वाणी, सरस्वती, सार्थक शब्द, वचन, जीभ, ्वर, प्रशांसा
बिद्ध[वि.] -बिंधा हुआ, छेदा हुआ
बिसारि [स.क्र.] -बिसरा, भुला देना
बेड़ी [स्री.]-बंधन, कैदियों, हाथी-घोड़ों आदि के पवोंमें पहनाई जाने वाली लोहे की जंजीर
बेध [पु.] -ेद, मूग आदि मं किया हुआ छद, मोती
बेवक्त प.(अ)- कुसमय, किसी समय, हमेशा

भक्तवछल- [वि.] -भक्तक पयार कने वा, भक्त क प्रि ्े्ुक्
भक्षक [वि.सं.]-खाने वाला, भक्षण करने वाला
भनक [स्ी] धीमी, स्पषट ध्विनि,उड़ती हुई खबर
भावन [पु.सं.] - निमित्, कारण, उत्पादन, चिनवरधन, चितन, कल्पना, स्मरण
भाव-भंगिमा [स्त्ी.सं.] -मन के विकार को व्यक्त करने वाला अंग चालन या क्रिया

भौर [प. श्मर, ौरा, मधुप, जलाव्त ्रमण [पु.स. घूमना, फिरना, यात्ा, अस्थरता, चक्कर

मंत पु.सं. -सलाह,राय, गुपत वाता, का मे कही जने वाली ात, का्य सिद्िका गुर, सती -समकष, बुद्धि
मनहर [वि.सं.] - मन को हरने-चुराने वाला, सुंदर
मानधन [पु.सं.वि.] – मान का धनी प्रतिष्ठा ही जिसका धन हो
मुकित [सत्रीसं.] –आजादी, छुटकारा, मोक्ष
मूरति [स्त्ी.सं.] - मूर्ति शरीर, स्वरूप या शक्ल, प्रतिमा
मेह [प.] -वर्ष, बरसात, झड़ी (पड़ना, बरसना)

रस [पु.सं.] -स्वाद, आनंद, प्रम, द्रव, जल, मन में उत्पन होने वाला वह भाव, जो काव्य पाठ, अभिनय-दर्शन आदि से होता है
रसाल [वि.सं.] – रसीला, मीठा, मधुर, सुंदर, शुद् ubls
राजति [अ.क्ि.] - राजना, रहना, शोभित होना, विराजना
रिसेस [अं.]-अल्पावकाश, मध्यावकाश
रीति [स्री.स.]-नियम, झरना, टपकना, ढंग प्कार, तरीका, चलन
रेवड [प.]-भे़ों का समूह, पशुओं का झुंड, गल्ला

लहरा [प.]-लहर, मजा, आनंद, बाजों की संगत, जिसमें ताल-स्वरों की केवल लय होती है, बादलों का कुछ देर जोर से बरसना, एक घास
लावन स्तरी.] -लावनि, लावण्य, सुंदरता

वर्ण [पु.सं. -ऐंग, भेद, अक्षर, शब्, स्वर
वादक [प.सं.]-बजाने वाला, बोलने वाला, शास्र्थ करने वाला
विकार [पु.स.] -परिव्तन, भावना,वासना, क्षोभ, रूप, धर्म आदिस्वाभाविक अवस्था का परिवर्तित होना
विचरण [पु.ं.] घूमना-फिरना, चलन, श्रमण कना
व्यापक [वि.सं.]-सर्त् फैला हुआ, दूर तक, जो किसी चीज के सारे विस्तार में हो

शाखा [स्रीसं.]-पेड़ की डाल,दरवाजे की चौखट, बाह, ंप्रदाय शुक [प.सं.]-सुगा, तोता, वस्र पोशाक
शैली स्रीस. -रीत, किसी काम के कनेका ढंग, तीका, पद्ति श्याम [वि.सं.] - साँवला, काला, कृष्ण

सदय [वि.सं.]-दयालु, रहम दिल
समुदझि[स्त्र] समझझ, बुद्र, प्त, विचार
साजिदे [पु.फा.] –साज बजाने वाला [सारंगिया, तबलची]
सिद्धि[सत्रीसं.वि] -सफलता, अभयुय, अनुमान, क्ता, निपुता, मोक्ष, लाभ
सुखदाई [प.सं.]-सुख देने वाला
सुधा [स्रीस.]-अमृत, क्त, रस, दू, जल, शहद, गंगा, बिजली, पृथ्वी
सुधि (स्री.-याद होश, चेत, खबर
सुर [पु.सं.]-स्वर, आवाज, देवता, सूर्
सुरभि विसं. ुगंधत, खुशबदा, ्रय, नोरम, ्रसिद्ध बु्धिमान, वि्न
सूरति स्त्र]-शक्ल, रूप, या,स्मरण
सोहता [वि.]- मोहक, सुंदर
सोहावन [अ.क्र]-अच्छ लगना, भला मालूम,सुन्दर शोभित होना
स्वच्छंद [प.स.]– अपनी इच्छा, पसंद

हॅसिया [प.] -लोहे का धनुषाकार औजार जिससे फसल, तरकारी आदि काटते हैं हठी [वि.सं.]-हठ करने वाला, जिदी

ब्रेल भारती हिंदी वर्ण व गिनती

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पहेलियों के उत्तर

पाठ संख्या
माँ, कह एक कहानीआज की पहेलीमाँ पक्षी, सुरभि
2.तीन बुद्धिमानआज की पहेलीगिरिगिट, नीला डिन्बा
4.पानी रे पानीआज की पहेलीमेह, जलाशय, नीर, अंबु, सर, सरोवर, सलिल, ताल, तटिनी, बारिश, प्रवाहिनी, तरंगणी
5. नहीं होना बीमारआज की पहेलीआलू का पराठा, मसाला डोसा, वड़ा पाव, ढोकला, पानी पूरी, मक्के की रोटी, बाटी, रसगुल्ला
7.वर्षा बहारआज की पहेलीग्रीषम ऋतु, वर्ष ऋतु, शरद ऋतु, वसंत ऋतु, शीत ऋतु, पतझड़
Lबिरजू महाराज से साक्षात्कारआज की पहेलीरूपक, लक्ष्मी, तिलवा़ा, कहरवा, झूमरा, दीपचंदी, दादरा
चिड़ियाआज की पहेलीतोता, कौवा, खंजन, कोयल, कबूतर, चातक, हंस
10. मीरा के पदमधुर ध्वनियाँबाँसुरी, तबला, शहनाई, वीणा, ढोलक, बीन, संतूर, मजीरा
आज की पहेलीआवन, घुमड़, नगर, गोपाल
Meera ke Pad - CBSE Class 7 Hindi Notes