9 चिड़िया
पीपल की ऊँची डाली पर बैठी चिड़िया गाती है! तु्हें जञात क्या अपनी बोली में संदेश सुनाती है?
चिड़िया बैठी प्रेमप्रीति की रीति हमें सिखलाती है! वह जग के बंदी मानव को मुक्त-मंत्र बतलाती है!
वन में जितने पंछी हैं, खंजन, कपोत, चातक, कोकिल; काक, हंस, शुक आदि वास करते सब आपस मेंहिलमिल!
सब मिल-जुलकर रहते हैं वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं; आसमान ही उनका घर है; जहाँ चाहते, जाते हैं!
रहते जहाँ, वहाँ वे अपनी दुनिया एक बसते हैं दिन भर करते काम, रात में पेड़ों पर सो जाते है!
उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं; जग का सारा माल हड़पकर वे कहते हैं मानव! सीखो तुम हमसे जीना जग में; हम स्वच्छंद और क्यों तुमने डाली है बेड़ी पग में? तुम देखो हमको, फिर अपनी सोने की कड़ियाँ तोड़ो; ओ मानव! तुम मानवता से द्रोहन-भावना को छोडो! पीपल की डाली पर चिड़िया यही सुनाने आती है बेैठ घड़ी भर, हमें चकित कर, गा-कर फिर उड़ जाती है। आरसी प्रसाद सिंह

कवि से परिचय
आरसी प्रसाद सिं प्रकृति और जीवन-संघषों को अपनी रचनाओं मं प्रमुखता से चित्रित करने वाले कवि हैं वे अपनी रचनाओं ें ्रम, करणा, त्याग-बलिदान, मुृक्ति और मिल-जुलकर एक सुदर संसार रचने की कल्पना करते रे हैं जैसा कि चिड़िया

(1911-1996)
कविता में भी आपने पढ़ा उन्होंने चिड़िया के माध्यम से कितनी सुंदर बात कही है"चिड़िया बैठी प्रेमप्रीति की रीत हें सिखलाती है! वह जग के बंदी मानव को मुक्तनमंत्रबतलाती है!" कलापी और आरसी उनके चर्ित कविता संग्रह हैं
पाठ से
आइए, अब हम इस कविता पर विस्तार से चर्चा करें आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेगी।
मेरी समझ से
(क) नीचे दिए गए प्र्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तार () बनाइए। कुछ प्रशनोंके एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1.कविता के आधार पर बताइए कि इनमें से कौन-सा गुण पक्षयों के जीवन में नहीं पाया जाता है? ?

• प्रेम-प्रीति • मिल-जुलकर रहना • लोभ और पाप • निर्भय विचरण
२"सब मिल-जुलकर रहते हैंवे, सब मिल-जुलकर खाते हैं" कविता की यह पंक्त किन भावों की ओर संकेत करती है?
असमानता और विभाजन • • प्रतिस्पधा और संघर्ष • समानता और एकता • स्वार्थ और ईंष्या

."वे कहते हैं, मानव! सीखो, तुम हमसे जीना जग में" कविता मे पक्षी मनुष्य से कैसा जीवन जीने के लिए कहते हैं?
आकाश में उड़ते रहना • बंधन में रहना • स्वच्छंद रहना • संचय करना

(ख) अब अपे मितरो के साथ मिलकर चर्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्र ही क्यों चने?
मिलकर करें मिलान
कविता मेंसे चुनकर कुछ संदर्भ नीचे दए गए हैं अपने समू मेंइन पर बातचीत कीजिए और इन्ें इनके सही भावों से मिलाइए। इनके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने परिजनों और शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं
| संदर्भ | भाव |
| 1. चिड़िया की बोली | 1. बंधन और लालच |
| 2. सोने की कड़ियाँ | 2. श्रम और संतोष |
| . निर्भिय विचरण | 3. बंधन से मुक्ति |
| ४.मुक्ति-मंत्र | 4. स्वतंत्रता और नि्बाध जीवन |
| 5. दिनभर काम | प्रेम और स्वतंत्रता का संदेश |

पंक्तियों पर चर्चा
कविता मे से चुनकर कुछ पंक्तिया नीचे दी गई हैंइन्ेंध्यान से पढिए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अ्थ समझ में आया? अपने विचार ककषा में अपने समूह मे साझा कीजिए और लिखिए
(क) "चिड़िया बैठी प्रे-प्रीति की रीति हमें सिखलाती है!"
(ख) "उनके मन में लोभ नहीं है, पाप नहीं, परवाह नहीं'"
(ग) "सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते है"

सोच-विचार के लिए
नीचे कविता की कुछ पंक्तियाँ और उनसे संबंधित प्रशन दिए गए हैं कविता पढ़ने के बाद अपनी समझ के आधार पर प्रशनों के उत्तर दीजिए
(क) "सब मिल-जुलकर रहते है वे, सब मिल-जुलकर खाते हैं" पक्षियों के आपसी सहयोग की यह भावना हमारे लिए किस प्रकार उपयोगी है? स्पष्ट कीजिए।
(ख) "जो मिलता है, अपने श्म से उतनाभर लेलेतेहैं"पक्षी अपनी आवश्यकता भर ही संचय करते हैं मनुष्य का स्वभाव इससे भिन्न कैसे है?
(ग)"हम स्वच्छंद और क्यों तुमने, डाली है बेड़ी पग मे?" पकषी को स्वच्छंद और मनुष्य को बेड़ियों मेंक्यों बताया गया है?
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर संवाद कीजिए
- चिड़िया मनुष्य को स्वतंत्रता का संदेश देती है, आपके अनुसार मनुष्य के पास किन कायों को करने की स्वतंत्रता है और किन कायों को करने की स्वतंत्रता नहीं है?
- चि़िया और मनुष्य का जीवन एक-दूसरे से कैसे भिन्न है? nur
- चिड़िया कहीं भी अपना घर बना सकती है, यदि आपके पास चिड़िया जैसी सुविधा हो तो आप अपना घर कहाँ बनाना चाहेंगे और क्यों?
4.यदि आप चिड़िया की भाषा समझ सकते तो आप चिड़िया से क्या बातें करते?
कविता की रचना
"सब मिल-जुलकर रहते हैं वे सब मिल-जुलकर खाते हैं"

रेखांकित शब्दों पर ध्यान दीजिए। ये शब्द लिखने-बोलने ें एक जैसे हैं इस तरह की शैली प्राय: कविता में आती है। अब आप सब मिल-जुलकर नीचे दी गई कविता को आगे बढ़ाइए
संकेत—सब मिल-जुलकर हँसते हैं वे सब मिल-जुलकर गाते है.
भाषा की बात
"पीपल की ऊँंची डाली पर बैठी चिड़िया गाती है! तुम्हें जञात क्या अपनी बोली में संदेश सुनाती है?"
रेखांकित शब्ों पर ध्यान दीजिए। गाती' और 'सुनाती रेखांकित शब्ों से चिड़िया के गाने और सुनाने के कार्य का बोध होता है। वे शब्द जिनसे कार्य करने या होने का बोध होता है, उन्हे क्रिया कहते हैं कविता में ऐसे क्रिया शब्दों को ढूढ़कर लिखिए और उनसे नए वाक्य बनाइए।
पाठ से आगे
भावों की बात

(क) जब आप नीचे दिए गए दृ्य देखते है तो आपको कैसा महसूस होता है? अपने उत्र के कारण भी सोचिए और बताइए। आप नीचे दिए गए भावों में से शब्द चुन सकते हैं आप किसी भी दृश्य के लिए एक से अधिक शब्द भी चुन सकते हैं। −
प्र, वीरता, दया, रण, क्ा, हसी, आनंद,ड,घणा, आ् मता, शंति, सुख दु इच्या, गर्, निराशा, आभार,उत्साह, चिंता, आत्मविश्वास, सहानुभूत, उदासीनता, शंका
दृश्य
आपको कहीं से किसी पक्षी के चहचहाने की आवाज सुनाई देती है।
2.शाम के समय किसी पे़ पर अनगिनत पक्षी एक साथ चहचहा रहे हैं।
.कोई गाय अपने बच्चे को दूध पिला रही है
.कोई व्यक्त अपने वाहन की खिड़की से कूड़ा बाहर फेक देता है
- कोई बच्चा किसी व्यर्थ कागज को कूड़ेदान में डाल देता है।
6कोई व्यक्त बिना हेलमेट पहने बहुत तेज बाइक चला रहा है।
दो प्राणी किसी कारण लड़ रहे हैं
8.एक ब्यक्त जिसके पैर नहीं हैं वह विशेष रूप से बनाई गई तिपहिया गाड़ी पर यात्रा कर रहा है।
किसी स्थान पर नेन्रही व्यक्तयों के लिए भारती (ब्रल) लिपि में सूचनाओं के बोर्ड लगे हैं।
कोई व्यक्त किसी को अपशब्द कह रहा है।
१कोई व्यक्त किसी जरूरतमंद भूखे को भोजन दे रहा है।
१2. कोई लड़का स्वादिष्ट भोजन बनाकर अपनी बहन को खिला रहा है।
(ख) उपर्यक्त भावों में से आप कौन-से भाव कब-कब अनुभव करते हैं? भावों के नाम लिखकर उन स्थितियों के लिए एक-एक वाक्य लिखिए।
(संकेत—आत्मविशखास- जब मैं अकेल प़ोस की दुकान से कुछ खरीदकर ले आता हूँ)
आज की पहेली
कविता में आपने कई पक्षियों के नाम पढ़। अब आपके सामने पक्षियों से जड़ी कुछ पहेलियाँ दी गई हैं। पक्षियों को पहचानकर सही चित्ों के साथ रेखा खींचकर जोडिए

चित्र की बात
इन तीनों चित्रो को ध्यान से देखिए और बताइए
आप पक्षयों को इनमें से कहाँ देखना पसंद करेंगे और क्यों?

निर्भय विचरण



"सीमा-हीन गगन में उड़ते, निर्भय विचरण करते हैं'"
कविता की इन पंक्तियों को पढ़िए और इन चित्रों को देखिए। इन चित्रों को देखकर आपके मन में क्या वेचार आ रहे हैं?
(संकेत—जैसे इन चि्ों ें कौन निरिथय विचरण कर रहा है?)
साथ-साथ
"वन में जितने पंछी हैं, खंजन, कपोत, चातक, कोकिल; काक, हंस, शुक आदि वास करते सब आपस में हिलमिल!"
- वन में सारे पक्षी एक साथ रह रहे हैं हमरे परिवेश में भी पशु-पक्षी साथ रहते हैं आप विचार कीजिए कि हमारे परिवेश में उनका रहना क्यों आवश्यक है?
२.हम अपने आस-पास रहने वाले पशु-पक्षियों की सहायता कैसे कर सकते हैं?

शब्द एक अर्थ अनेक
"उनके मन में लोभ नहीं है", इस पंक्त में 'मन' का अर्थ चित्त (बुद्द) है किंतु 'मन शब्द के अ्य अर्थ भी हो सकते हैं अब नीचे कुछ और पंक्तयाँ दी गई हैं उ्हें भी पढिए
(क) आज मेरा मन पहाड़ों पर जाने का कर रहा है। (ख) व्यापारी ने किसान से 10 मन अनाज खरीदा।
उपर्यक्त वाक्यों मे 'मन' शब्द का प्रयोग अलग-अलग अरथो/संदभो में किया गया है। इस प्रकार हम देखते हैकि एक ही शब्द दूसे संरभमें अलग-अलग अर् दे रहा है आइए, इससे संबंधित एक और रोचक उदाहरण देखते हैं—
"मंगल ने मंगल से कहा कि मंगल को मंगल पर मंगल होगा"
(संकेत-इस वाक्यमें एक व्यक्त दूसरेव्यक्त से दिन, ग्ह और शुभ कार्य की च्ा कर रहा है)
आगे कुछ और ऐसे ही शब्द दिए गए हैं दिए गए शब्दों का अलग-अलग अथां या संदभों मेंप्रयोग कीजिए—
(क) कर व) जल (ग) अर्थ (घ) फल (ड) आम
रचनात्मकता
(क) खुले आसमान में पे़ोंकी टहनियों, छतों और भवनों आदि पर बैठे याउड़ते पक्षी बहुत मनमोहक लगते हैं अपनी पसंद के ऐसे कुछ दृश्यों का कोलाज बनाकर कक्ा मे प्रदर्शित कीजिए
(ख) "स्वतंत्रता और ्ेम" का संदेश देने वाला एक पोस्टर बनाइए। इसमें इस कविता की कोई पंक्त या संदेश भी सम्मिलित कीजिए
हमारा पर्यावरण
मनुष्य बिना सोचे-समझे जंगलों की लगातार कटाई कर रहा है, जिससे पशु-पक्षियों का जीवन प्रभावित हो रहा है। मनुष्य द्वारा किए जा रहे ऐसे कायों की एक सूची बनाइए, जिनसे पर्ावरण व हमारे परिवेश के पशु-पक्षियों के लिए संकट की स्थिति उत्पन्न हो रही है। इस संकट की स्थिति से बचने के लिए क्या-क्या उपाय किए जा सकते है? लिखिए। आप इस कार् में शिक्षक, इंटरनेट और पुस्तकालय की सहायता भी ले सकते हैं।
(संकेत—जैसे- ऊँचे भवनों का निर्म..
परियोजना कार्य
(क) पर्यावरण संरक्षण के लिए हम अपने स्तर पर कुछ प्रयास कर सकते हैं आप अपने विद्ालय, आस-पास और घरों मेंदेखिए कि किन-किन कायो में प्लास्टिक के थैले का प्रयोग किया जाता है? उन कायों की सूची बनाइए। अब इनमें प्रयोग किए जा रहे प्लास्टिक के थैलों के विकल्पों पर विचार कीजिए और लिखिए। (संकेत—जैसे- हम प्लास्टिक के थैले की जगह कागज या कपड़े के थैले का प्रयोग किन-किन कायो में कर सकते हैं)
(ख) सभी विद्ाथी परयावरण बचाओ' विषय पर एक नुक्कड नाटक तैया कें और उसकीप्र्तुति वि्यालय प्रांगण में करें
झरोखे से
कविता में पक्षियों के 'सीमा-हीन गगन में उड़े' की बात कही गई है। पक्षियों का आकाश में उड़ना उदे्यपूर् है पकषयों की उड़ान से जड़ी एक रोचक जानकारी आगे दी गई है इसे पढ़कर आप पक्षियों की उड़ान से जड़े कुछ नए तथ्यों को जान पाएँगे।
प्षियों की प्रवास यात्राए
पक्षयों की प्रवास यात्ाएँ सब से विचित्र और रहस्यूण होत हं हर साल शरद ऋतु और शुरू जा़ों मे अनक पक्षी एशिया,यूरोप तथा अमरीका के उत्ती भागों मे स्थत अपने स्थानों से चलकर गरम देशों में आ जातेहैं वसंत तथा गरमियों मेंवे फिर वापस उत्तरमें पहुँच जाते हैं
वे समय के इतने पक्के होतेहैं कि इनके आने-जाने के एक-एक दिन की ठीक गणना की जा सकती है। हाँ ्रतिकूल मौसम के कारण कभी देर हो जाए तो बात दूसरी है।
कुछ प्रातियोंके पकषी थो़ ही दूरीपर जात हैं हर पक्ी थोड़ा बहुत तो इधर-उधर जाता-आता है ही। कभी रहन-सहन के क्टों के कारण तो कभी खाना कम हो जाने के कारण इस प्रकार का आवागमन मुख्यतः उत्तर भारत मे देखने को मिलताहै जहाँ पर मौसम भिन्न-भिन्न और तीव्रता लिए हुए होते हैं
जो पक्षी ऊँचे पहा़ों पर गरमियाँ बिताते हैं वे जाड़ं में निचली पहाड़यों, तराई अथवा मैदानों मे चले आत हैं। इस प्रकार का आवागमन भारतमें बहुत अधिक पाया जाता है, जहाँ गंगा के क्ेत्रके बराबर में ही विशाल हिमालय है।
इन छोटे-छोटे वीर यात्रियों को अपनी समस्त लंबी-लंबी यत्राओंके बीच भारी कष्ट झेलने पड़ते है और बड़-बड़ संकटों का सामना करना पड़ता है कभी जंलों कभी मैदनों और कभी समुद्रके ऊपर से गुजरना होता है कभी भयंकर तूफ़ान आ जाते हैं और वे अपने मारग से भटक जाते हैं बहुधा वे आँधियों के थेड़ोंसे समुद्रकी ओर पहुँच जाते है और फिर एकदम नीचे पठारो में समा जाते हैं। रात को नगर का तीब्रप्रकाश इ्हे भटका देता हैी कुछ पक्षी बीच में रुक-रुक कर यात्ा करते हैं

ताकि थकान न हो कुछ ऐसे पक्षी भी हैं जो खाने और आराम करने के लिए बिना रके लगातार बहुत लंबी-लंबी यात्ाएँपूरी कर लेत हैं कछ पक्षी केवल दिन में उ़ते हैंतो कुछ दिन और रत दोनों समया किंतु अधिकतर पक्षी सूर्यस्त के बाद अपनी यात्ा पर बढ़ते जाते हैं।
पक्षी प्रय: दल बनाकर उड़ते हैं सारस और हंस जब आकाश में 'वी (V) की आकृत में उड़ते जाते हैं तब तुरंत हमारा ध्यान उधर खिंचा चला जाता है अबाबील, चकदिल, फुदकी, समुद्तटीय पक्षी तथा जलपक्ष दलोंमें इकटे हो जाते हैं प्रत्येक दल में एक ही प्रकार के पक्षी होते हैं हर दल में परों की तेज फड़फड़ाहट और चहचहाहट होती है। उसके बाद वे धरती से हवा में उठ जाते हैं और आकाश को चीरते हुए आगे ही आगे बढ़ते जाते हैं।
पक्षी-जगत, रष्ट्री पुस्तक न्यास, दिल्ली
साझी समझ
आप इंटरनेट या किसी अन्य माध्यम की सहायता से अन्य प्रवासी पक्षयों के बार में रोचक जानकारी एकत्रित कीजिए और प्रवासी पक्षियो पर लेख लिखिए
खोजबीन के लिए
नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप जीव-जगत के बार में और भी जान-समझ सकते हैं
• हमारा पर्यावरण https://youtu.be/gKvAoGtZY11?si=3Z9zHAxMzeosnm7L