Pani re Pani - CBSE Class 7 Hindi Notes

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Chapter Study Guide & Summary

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Key Concepts & Syllabus Topics

Important Definitions & Terminology

Pani re Pani Overview
The central theme and foundational concept covered in Class 7 Hindi Chapter 4, emphasizing conceptual clarity, NCERT curriculum alignment, and exam readiness.
NCERT Curriculum Alignment
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Active Recall & Revision
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Quick Revision & Key Points

Full NCERT Chapter: Pani re Pani

पानीरे पानी

कहाँ से आता है हमारा पानी और फिर कहाँ चला जाता
है हमारा पानी? हमने कभी इस बारे में कुछ सोचा है? सोचा तो नहीं होगा शायद, पर इस बारे में पढ़ा जरू है भूगोल की किताब पढ़ते समय जल-च् जैसी बाते हमें बताई जाती हैं एक सुंदर-सा चित्र भी होता है, इस पाठ के साथा सूरज, समुद्, बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूदें और लो फिर बहती हुई एक नदी और उसके किनरे बसा तु्हारा, हमारा घर,

गाँव या शहर चित्रके दसरे भाग में यही नदी अपने च तरफ का पानी लेकर उसी समुद्रमें मिलती दिखती है। चित्र में कुछ तीर भी बने रहते है। समुद्र से उठी भाप बादल बनकर पानी में बदलती है और फिर इन तीरों के सहरे जल की यात्रा एक तरफ से शुरू होकर समुद्रमें वापिस मिल जाती है। जल-चक्र परा हो जाता है।

यह तो हुई जल-चक्र की किताबी बाता पर अब तो हम सबके घरों में, स्कूल में, माता-पिता क

े कार्यालय में, कारखानों और खेतों में पानी का कुछ अजीब-सा चक्कर सामने आने लगा है। नलों में अब पूरे समय पानी नहीं आता। नल खोलो तो उससे पानी के बदले सू-सू की आवाज आने लगती है पानी आता भी है तो मीठी नींद छोड़कर घर भर की बालटियाँ बर्तन और घड़े भरते फिरो। पानी को लेकर कभी-कभी, कहीं-कहीं आपस में तू-तू, मैंमैं भी होने लगती है।

रोज-रोज के इन झगडेटंटों से बचने के लिए कई घरों में लोग नलों के पाइप में मोटर लगवा लेते हैं इससे कई घरों का पानी खिंचकर एक ही घर में आ जाता है। यह तो अपने आस-पास का हक छीनने जैसा काम है, लेकिन मजबूरी मानकर इस काम को मोहल्ले में कोई एक घर कर बैठे तो फिर और कई घर यही करने लगते हैं। पानी की कमी और बढ़ जाती है। शहरों में तो अब कई चीजों की तरह पानी भी बिकने लगा है यह कमी गाँव-शहरों में ही नहीं बल्क हमारे प्रदेशों की राजधानियों में और दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई और बैंगलोर जैसे बड़ शहरों में भी लोगों को भयानक कष्ट में डाल देती है। देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसी हालत बन जाती है। यह तो हुई गरमी के मौसम की बाता

लेकिन बरसात के मौसम मेंक्या होता है? लो, सब तरफ पानी ही बहने लगता है। हमारे-तुम्हारे घर, स्कूल, सड़कों, रेल की पटरियों पर पानी भर जाता है। देश के कई भाग बाढ़ में डूब जाते हैं यह बाढ़ न गाँवों को छोड़ती है और न मुंबई जैसे बड़ शहरों को कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है, सब कुछ बह जाता है।

ये हालात हमें बतात हैं कि पानी का बेहद कम हो जाना और पानी का बेहद ज्यादा हो जाना, यानी अकाल और बाढ़ एक ही सिक्के के दो पहलू हैं यदि हम इन दोनों को ठीक से समझ सके और सभाल ले तो इन कई समस्याओं से छुटकारा मिल सकता है।

चलो थोड़ी देर के लिए हम पानी के इस चक्कर को भूल जाएँ और याद के अपनी गुल्लक को जब भी हमें कोई पैसा देता है, हम खुश होकर, दौड़कर उसे झट से अपनी गुल्लक में डाल देते हैं एक रुपया, दो रुूपया, पाँच रुूपया, कभी सिक्के, तो कभी छोटे-बड़ नोट सब इसमें धीर-धीरे जमा होते जाते हैं फिर जब कभी हमें कुछ पैसों की जरूरत पड़ती है तो इस गुल्लक की बच्तत का उपयोग कर लेते हैं।

हमारी यह धरती भी इसी तरह की खूब बड़ी गुल्लक है मिटी की बनी इस विशाल गुल्लक मे प्रकृत वर्षा के मौसम में खूब पानी बरसाती है तब रूपयों े

भी कई गुना कीमती इस वर्षं को हमें इस बड़ी गुल्लक में जमा कर लेना चाहिए। हमारे गाँव में, शहर में जो छोटे-बड़ तालाब, झील आद हैं, वे धरती की गुल्लक में पानी भरने का काम करते हैं इनमें जमा पानी जमीन के नीचे छिपे जल के भंडार में धीरे-धीरे रिसकर, छनकर जा मिलता है। इससे हमारा भूजल भंडार समृद् होता जाता है पानी का यह खजाना हमें दिखता नहीं लेकन इसी खजाने से हम बरसात का मौसम बीत जाने के बाद पूरे साल भर तक अपने उपयोग के लिए घर में, खेतों में पाठशाला में पानी निकाल सकते हैं लेकिन एक दौर ऐसा भी आया जब हम लोग इस छिपे खजाने का महत्व भूल गए और जमीन के लालच में हमने

अपने तालाबों को कचरे से पाटकर, भरकर समतल बना दिया। देखते-ही-देखते इन पर तो कहीं मकान, कहीं बाजार, स्टेडियम और सिनेमा आदि खड़े हो गए।

इस ब़ी गलती की सजा अब हम सबको मिल रही है। गमीं के दिनों में हमरे नल सूख जाते हैं और बरसात के दनों में हमारी बस्तियाँ डूबने लगती हैं इसीलिए यदि हमें अकाल और बाढ़ से बचना है तो अपने आस-पास के जलस्तोतों की, तालाबों की और नदियों आदि की रखवाली अच्छे ढंग से करनी पड़ेगी।

जल-चक्र हम ठीक से समझे, जब बरसात हो तो उसे थाम लें, अपना भूजल भंडार सुरक्षित रखें, अपनी गुल्लक भरते रहें, तभी हमें जरूरत के समय पानी की कोई कमी नहीं आएगी। यदि हमने जल-चक्र का ठीक उपयोग नहीं किया तो हम पानी के चक्कर में फँसते चले जाएँगे।

— अनुपम मिश्र

लेखक से परिचय

अनुपम मिश्र एक प्रखर लेखक, संपादक और जाने-माने पर्यावरणविद होने के साथ-साथ छायाकार भी थे पर्यावरण संक्षण क्षेत् में उन्होने अनेक प्रयोगात्मक

कार्य किए हैं आज भी खरे हैंतालाब उनकी सवाधिक चर्चित ुस्तक है ब्रल लिप सहित इसका अनुवाद अनेक भाषाओं में ो चुका है साफ माथे का समाज उनकी एक और महत्वपू्ण ु्तक है वेगाधी शांत प्रतिष्ठान सेप्रकाशित होने वाली पत्रका गांधी मार्ग े संस्थापक और संपादक भी थे

पाठ से

आइए, अब हम इस पाठ को थोड़ा और निकटता से समझते हैं आगे दी गई गतिविधियाँ इस कार् में आपकी सहायता करेंगी।

मेरी समझ से

(क) निम्नलिखित प्रनों क सही उतर कौन-साहै उसक सानेतारा () बनाइए कुछ प्र्नो के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं

(1) हमा भूजल भंडार निम्नलिखित में से किससे समृद्ध होता है?

• नल सूख जाने से। • पानी बरसने से। • तालाब और झीलों से। बाढ़ आने से।

(2) निन्नलिखित में से कौन-सी बात जल-चक्रसे संबंधित है?

• वर्षा जल का संग्रह करना। • समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर बरसना। • नदियों का समुद् में जाकर मिलना। • बरसात मेंचारों ओर पानी ही पानी दिखाई देना। (3) "इस बड़ी गलती की सजा अब हम सबको मिल रही है" यहाँ किस गलती की ओर संकेत किया गया है?

• जल-चक्र की अवधारणा को न समझना। • आवश्यकता से अधिक पानी का उपयोग करना। • तालाबों को कचरे से पाटकर समाप्त करना। भूजल भंडारण के विषय में विचार न करना। (ख) अब अपने मि्रोंके साथ संवाद कीजिए और कारण बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुनें?

मिलकर करें मिलान

पाठ में से कुछ शब्द समूह या संदर्भ चुनकर स्तंभ 1 में दिए गए हैं और उनके अर्थ स्तंभ 2 में दिए गए हैं अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और रेखा खींचकर सही मिलान कीजिए।

जाना।
स्तंभ 1स्तंभ 2
1. वर्षा जल संग्रहण2. वर्षा के जल को प्राकृतिक अथवा कृत्रिम रूप से (मानवीय प्रयासों से) धरती में संग्रह करना।
2. जल संकट3. जल की अत्यधिक कमी होना।
3. जल-चक्र4. समुद्र से उठी भाप का बादल बनकर पानी में बदलना और वर्षा के द्वारा पुनः समुद्र में मिल जाना।
4. भूजल1. जमीन के नीचे छिपा जल भंडार।

पंक्तियों पर चर्चा

इस पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तयाँ नीचे दी गई है न्हे ध्यान से पढिए और अपने सहपाठियों से चरचा कीजिए

• "पानी आता भी है तो बेवक्ता"
• "देश के कई हिस्सों में तो अकाल जैसे हालात बन जाते हैं" "कुछ दिनों के लिए सब कुछ थम जाता है"

• "अकाल और बाढ एक ही सिक्क के दो पहलू हैं"

सोच-विचार के लिए

लेख को एक बार पुन: पढिए और नि्नलिखित के विषय में पता लगाकर लिखिए

(क) पाठ में धरती को एक बहुत बड़ी गुल्लक क्यों कहा गया है?
(ख) जल-चक्र की ्रक्रिया कैसेपूरी होती है?
(ग) यदि सारी नदियाँ, झीलें और तालाब सूख जाएँ तो क्या होगा?
(घ) पाठ में पानी को रुपयों से भी कई गुना मूल्यवान क्यों बताया गया है?

शीर्षक

(क) इस पाठ का शीर्षक 'पानी रे पानी' दिया गया है पाठ का यह नाम क्यों दिया गया होगा? अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए। अपने उत्तर का कारण भी लिखिए।

(ख) आप इस पाठ को क्या नाम देना चाहेंगे? इसका कारण लिखिए।

शब्दों की बात

बात पर बल देना

• "हमारी यह धरती भी इसी तरह की एक गुल्लक है" • "हमारी यह धरती इसी तरह की एक गुल्लक है"

(क) इन दोनों वाक्यों को ध्यान से पढिए। दूसरे वाक्य में कौन-सा शब्द हटा दिया गया है? उस शब्द को हटा देने से वाक्य के अर् में क्या अंतर आया है, पहचान कर लिखिए।
(ख) पाठ में ऐसे ही कुछ और शब्द भी आए हैं जो अपनी उपस्थिति से वाक्य में विशेष प्रभाव उत्पन्न करते हैं पाठ को फिर से पढिए और इस तरह के शब्दों वाले वाक्यों को चुनकर लिखिए।

समानार्थी शब्द

नीचे दिए गए वाक्योंमें रखांकित शब्दोंके स्थान पर समान अर्थ देने वाले उपयु्त शब्द लिखिए इस कार्य के लिए आप बादल मेंसे शब्द चुन सकते हैं।

(क) सुरज की किरणेंपड़ते ही फूल खिल उठे। (ख) समुद्र का पानी भाप बनकर ऊपर जाता है। (ग) अचानक बादल गरजने लगे। (घ) जल-चक् में हवा की भी बहुत बड़ी भमिका है।

सूर्य, मेघ, भास्कर,
पवन, वारिद, वायु, दिवाकर,
जलद, वाष्प, समीर,
दिनकर, नीरद

उपसर्ग

"देश के कई हिस्सो में तो अकाल जैसे हालात बन जात हैं"

उपर्युक्त वाक्य मे रेखांकित शब्दमें अ' ने काल' शब्द में जुड़कर एक नया अर्थ दिया है। काल का अर्थ हैसमय, मृत्यु। जबकि अकाल का अर् हैकुसमय, सूखा। कुछ शब्दांश किसी शब्द के आरभ में जुड़कर उसके अर् में परिवर्तन कर देते हैं या कोई विशेषता उत्पन्न कर देते हैं और इस प्रकार नए शब्दों का निमाण करते हैं। इस तरह के शब्दांश 'उपसर्ग' कहलाते हैं।

आइए, कुछ और उपसगों की पहचान करते है अब आप भी उपसर्ग क प्रयोग से नए शब्द बनाकर उनका वाक्यो मे प्रयोग कीजिए

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) धरती की गुल्लक में जलराशि की कमी न हो इसके लिए आप क्या-क्या प्रयास कर सकते हैं, अपने सहपाठियों के साथ चर्चा करके लिखिए।
(ख) इस पाठ में एक छोटे से खंड में जल-चक् की प्रक्रिया को प्र्तुत किया गया है। उस खंड की पहचान करें और जल-चक्र को चित्र के माध्यम से प्रस्तुत करें
(ग) अपने द्वा बनाए गए जल-चक् के चित्रका विवरण प्रसतुत कीजिए।

सृजन

(क) कल्पना कीजिए कि किसी दिन आपके घर में पानी नहीं आया। आपको विद्यालय जाना है आपके घर के समीप ही एक सार्वजनिक नल है आप बालटी आदि लेकर वहाँ पहुँचते हैं और ठीक उसी समय आपके पड़ोसी भी पानी लेने पहुँच जातेहै। आप दोनों ही अपनी-अपनी बालटी पहले भरना चाहते है। ऐसी परिस्थित में आपस में किसी प्कार का विवाद (तू-तूमैं-मैं) न हो, यह ध्यान में रखते हुए पाँच संदेश वाक्य (स्लोगन) तैयार कीजिए।

(ख)

छ) "सूरज, समुद्र बादल, हवा, धरती, फिर बरसात की बूदें और फिर बहती हुई एक नदी और उसके किनोरे बसा तुम्हारा, हमारा घर, गाँव या शहर'"

इस वाक्य को पढ़कर आपके सामने कोई एक चित्र उभर आया होगा, उस चित्र को बनाकर उसमे रंग भरिए

पानी रे पानी

नीचे हम सबकी दिनचयं से जुड़ी कुछ गतिविधियों के चित्रहैं। उन चित्रो पर बातचीत कीजिए जो धरती पर पानी के संकट को कम करने में सहायक हैं और उन चि्रों पर भी बात करें जो पानी की गुल्लक को जल्दी ही खाली कर रहे हैं।

सबका पानी

'सभी को अपनी आव्यकता के अनुसार पर्यप्त पानी कैसे मिले' इस विषय पर एक परिचर्चा का आयोजन करें परिचर्ा के मुख्य बिंदुओं को आधार बनाते हुए रिपोर्ट तैयार करें

दैनिक कायो में पानी

(क) क्या आपने कभी यह जानने का प्रयास किया है कि आपके घर में एक दिन में औसतन कितना पानी खर्च होता है? अपने घर में पानी के उपयोग से जुड़ी एक तालिका बनाइए। इस तालिका के आधार पर पता लगाइए—

• घर के कायों में एक दिन में लगभग कितना पानी खर्च होता है? (बालटी, घड़े या किसी अन्य बर्तन को मापक बना सकते हैं) • आपके माँ और पिता या घर के अन्य सदस्य पानी बचाने के लिए क्या-क्या उपाय करते हैं?

(ख) क्या आपको अपनी आवश्यकतानुसार पानी उपलबध हो जाता है? यदिहाँ तो कैसे? यदि नहीं, तो क्यं?

(ग) आपके घर में दैनिक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए पानी का संचयन कैसे और किन पात्रो में किया जाता है?

जन-सुविधा के रूप में जल

नीचे दिए गए चित्रो को ध्या से देखिए—

इन चित्रो के आधार पर जल आपू्ति की स्थिति के बरे में अपने साथियों से चर्च कीजिए और उसका विवरण लिखिए।

बिन पानी सब सून

(क) पाठ मेंभूजल स्तर के कम होने के कुछ कारण बताए गएहैं जैसे—तालाबोंमें कचरा फेककर भरना आदि। भूजल स्तर कम होने के और क्या-क्या कारण हो सकते हैं पता लगाइए और क्षामेंप्र्तुत कीजिए। (इसके लिए आप अपने सहपाठियों, शिक्षकों और घर के सदस्यों की सहायता भी ले सकते हैं)

(ख) भूजल स्तर की कमी सेहमें आजकल किन कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है?

() आपके वि्यालय, गाव या शहर केस्थानी प्रशासन द्रा भूजल स्तर बढ़ाने के लिए क्या-क्या प्रयास किए जा रहे हैं, पता लगाकर लिखिए।

यह भी जानें

वर्षा-जल संग्रहण

वर्ष के जल को एकत्र करना और उसका भंडारण करके बाद में ्रयोग करना जल की उपलब्धता मे वृद्दि करने का एक उपाय है इस उपाय द्वरा वर्षा का जल एकत्रकरने को 'वर्षा जल संग्रहण' कहते हैं वर्षा जल संग्रहण का मूल उदेशय यही है कि "जल जहाँ गरे वहीं एकत्रकीजिए" वर्ष जल संग्रहण की एक तकनीक इस प्रकार है

छत के ऊपर वर्षा-जल संग्रहण

इस प्रणाली में भवनों की छत पर एकत्रत वरषा जल को पाइप द्ारा भंडारण टंकी मे पहुँचाया जाता है। इस जल में छत पर उपस्थित मिट्टी के कण मिल जातेहैं अत: इसका उपयोग करने से पहले इसे स्वच्छ करना आवश्यक होता है।

अपने घर या विद्यालय के आस-पास, मुहल्ले या गाँव में पता लगाइए कि वर्षा जल संग्रहण की कोई विधि अपनाई जा रही है या नहीं? यदि हाँ तो कौन-सी विध है? उसके विषय में लिखिए। यदि नहीं, तो अपने शिक्षक या परिजनों की सहायता से इस विषय में समाचार पत् के संपादक को एक पत्र लिखिए।

आज की पहेली

जल के प्राकृतिक सोत हैं—वर्ष, नदी, झील और तालाबा दिए गए वर्ग में जल और इन प्राकृतिक सोतों के समानार्थी शब्द दूंढिए और लिखिए

पा
नीला
अंबुनी
रेरिलि
ता
वापाटि
बारिप्रवाहिनी
गिणी

पानी से संबंधित गीत या कविताओं का संकलन कीजिए और इनमें से कुछ को अपनी कक्षा मे प्र्तुत कीजिए। इसके लिए आप अपने परिजनों एवं शिक्षक अथवा पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं

झरोखे से

आपने तालाबों और नदियों से रिसकर धरती रूपी गुल्लक में जमा होने वाले पानी के संबंध में यह रोचक लेख पढ़ा। अब आप तालाबों के बनने के इतिहास के विषय में अनुपम मिश्र के एक लेख 'पाल के किनारे रखा इतिहास' का अंश पढ़िए। λ

पाल के किनारे रखा इतिहास

"अच्छे-अच्छे काम करते जाना', राजान कूड़न किसान से कहा था।

कूड़न, बुढ़न, सरमन और कौराई थे चार भाई। चारों सुबह जल्दी उठकर अपने खेत पर काम करने जाते दोपहर को कूड़न की बेटी आती पोटली में खाना लेकर।

एक दिन घर सेखेत जाते समय बेटी को एक नुकीले पत्थर से ठोकर लग गईं उसे बहुत गुस्सा आया। उसने अपनी दराँती से उस पत्थर को उखाड़ने की कोशश की। पर लो, उसकी दराँती तो पत्थर पर पड़ते ही लोहे से सोने में बदल गई और फिर बदलती जाती हैंइस लम्बे किस्से की घटनाएँ बड़ी तेजी से पत्थर उठाकर लड़की भागी-भागी खेत पर आती है। अपने पिता और चाचाओं को सब कुछ एक सास में बता देती है। चारों भाइयों की साँस भी अटक जाती है जल्दी-जल्दी सब घर लौटतेहैं उन्हे मालूम पड़ चुक है कि उनके हाथ में कोई साधारण पत्थर नहींहै, पारस है। वे लोहे की जिस चीज को छूते हैं वह सोना बनकर उनकी आँखों में चमक भर देती है।

पर आँखों की यह चमक ज्यादा देर तक नहीं टिक पाती कूड़न को लगता है कि देर-सबेर राजा तक यह बात पहुँच ही जाएगी और तब पारस छिन जाएगा। तो क्या यह ज्यादा अच्छा नहीं होगा कि वे खुद जाकर राजा को सब कुछ बता दे।

किस्सा आगे बढ़ता है। फिर जो कुछ घटता है, वह लोहे को नहीं बल्क समाज को पारस से छुआने का किस्सा बन जाता है।

राजा न पारस लेता है, न सोना सब कुछ कू़न को वापस देते हुए कहता है, "जाओ इससे अच्छे-अच्छे काम करते जाना, तालाब बनाते जाना।"

यह कहानी सच्ची है, ऐतिहासिक हैनहीं मालूम। पर देश के मध्य भाग में एक बहुत बड़ हिस्से में यह इतिहास को अगूठा दिखाती हुई लोगों के मन में रमी हुईह। यहीं के पाटन नामक क्षत्में चार बहुत ब़े तालाब

आज भी मिलते हैं और इस कहानी को इतिहास की कसौटी पर कसने वालों को लजाते हैंचारों तालाब इन्हीं चारों भाइयो के नाम पर हैं बूढ़ा सागर है, मझगवाँ में सरमन सागर है, कुआग्राम में कौराई सागर है तथा कुडम गांवमे कुडम सागर। सन 1907 मेंगजेटियर के मध्यम से इस देश का इतिहास लिखने के लिएघूम रहे एक अगरेज ने भी इस इलाके में कई लोगों से यह किस्सा सुना था और फिर देखा-परखा था इन चार बड़ तालाबों को। तब भी सरमन सागर इतना बड़ा था कि उसके किनारे पर तीन बड़े-बड़े गाँव बसे थे और तीनों गाँव इस तालाब को अपने-अपने नामों से बॉँट लेते थे पर वह विशाल ताल तीनों गाँवों को जोड़ता था और सरमन सागर की तरह स्मरण किया जाता था। इतिहास ने सरमन, बुढ़ान, कौराई और कूड़न को याद नहीं खा

लेकिन इन लोगों ने तालाब बनाए और इतिहास को उनके किनारे पर ख दिया था

देश के मध्य भाग में, ठीक हृदय में धड़काने वाला यह किस्सा उत्तर-दक्षिण, पूरब-पश्चिम-चारं तरफ किसी न किसी रूप में फैला हुआ मिल सकता है और इसी के साथ मिलते हैं सैंकड़ों हजारो तालाब। इनकी कोई ठीक गिनती नहीं है। इन अनगिनत तालाबों को गिनने वाले नहीं इन्हें तो बनाने वाले लोग आते रहे और तालाब बनते रहे। (U

किसी तालाब को राजा ने बनाया तो किसी को रानी ने किसी को किसी साधारण गृहस्थ ने तो किसी को किसी असाधारण साधु-संत नेजिस किसी ने भी तालाब बनाया, वह महाराज या महात्मा ही कहलाया। एक कृत् समाज तालाब बनाने वालों को अमर बनाता था और लोग भी तालाब बनाकर समाज केप्रति अपनी कृत्ता जापित करते थे

साझी समझ

'पानी रे पानी' और 'पाल के किनोरे रखा इतिहास' में आपको कौन-कौन सी बातें समान लगीं? उनके विषय में अपने सहपाठियों के साथ चर्चा कीजिए।

पढ़ने के लिए

आकाश में अधेरा छया हुआ था बादल आकाश में मंडरते हुए एक-दसरे से टकरा जाते तो बिजली चमक उठती और गर्जन होता। फिर मूसलाधार वर्ष होने लगी कुछ ही दे में गड़ढे और नालियाँ पानी से भर गई

छः वर्षय विशवेश्वैया अपने घर के बरामदे मेंखड़ा इसदृ्य को निहार रहा था गली में पंक्तियोंमें खड़े पेड़ बारिश में धुल जाने के कारण साफ व सुदर दिखाई दे रहे थे पतियों और टहनियों से पानी की बूँदे टप-टप गिर रही थीं थोड़ी ही दूरी पर हे-भरे धान के खेत लहलहा रहे थे।

जहाँ विशवेश्वैया खड़ा था वहीं निकट की नाली का पानी उमड़-घुमड़ रहा था उसमें भँवर भी उठ रहे थे उसने एक जलप्रपात का रूप धारण कर लिया था। वह एक बहुत ही बड़े पत्थर को अपने साथ बहा कर ले जा रहा था जिससे उसकी शक्ति का प्रदर्शन होता था। विशवेश्वैया ने हवा और सर्य की शक्त को भी देखा था सामूहिक रूप से वे प्रकृति की असीम शक्ति की ओर संकेत कर रहेथे प्कृति शक्त है। मुझेप्रृति के बार मे सब कुछ जानना चाहिए' वह छोटा-सा लड़का बुदबुदाया।

फिर उसने थोड़ी दूरी पर, निभीकता से मूसलाधार वर्ष में ख़ी एक आकृति को ताडपत्र की छतरी हाथ में लिए देखा। वह उसे तुरंत पहचान गया। उसके कपड़े फटे हुए थे वह कमजोर और भूखी लग रही थी वह एक झोपड़ी मे रहती थी उसके बच्चे कभी स्कूल नहीं जाते वह गरीब थी। विश्वेश्वरैया ने सोचा 'वह इतनी गरीब क्यों है?'

उन्होंने बड़ी गभीरता से प्रृति और गरीबी के कारण के बर में जाने का प्यास किया

वह परिवार के बड़ों से इन बातों का उतर जानना चाहते थे। वह अपने अध्यापकों से भी जिरह करते। वह उनसे प्रकृति के बारे में पूछते— ऊर्जा के कौन से प्रचलित सोत हैं? कैसे इस ऊरजा को पकड़ कर इस्तेमाल में लाया जा सकता है?

वह यह भी पूछते कि आखिर इतने लोग गरीब क्योंहैं? नौकरानी फटी साड़ी क्यों पहनती है? वह झोपड़ी मे क्यो रहती है? क्या उसे अपने बच्चों को स्कू नहीं भेजना चाहिए?

धीरेधीरे इस लड़के को प्रकृति और जीवन के बार में अंतदृष्ट प्ापत होने लगी उन्हेंमहसूस हुआ कि ज़ान असीमित है। उसे बिना रुके, सीखते रहना होगा तभी उन्हें उन प्रशनों के उतर मिल सकते हैं जो उन्होने उठाए थे उन्होने निश्चय किया कि वह जीवनपर्यत तक छात्र बने रहेंगे क्योंकि बहुत कुछ सीखना बाकी है इसी संकल्प में उनकी महानता की कुजी थी मोक्षगुंडम विशवेश्वैया का जन्म मैसूर (जो अब कर्नाटक मेंहै) केमुेनहल्ली नामक स्थान पर 15 सितंबर 1861 को हुआ था उनके पिता वै्य थे वर्षं पहले उनके पूर्वज आंधर प्रदेश के मोक्षगुंडम से यहाँ आए और मैसूर में बस गए थे

दो वर्ष की आयु से ही उनका परिचय रामायण, महाभारत और पंचतंत्रकी कहानियों से हो गया था ये कहानियाँ हर रात घर की वृद् महिलाए उन्हे सनाती थीं कहानियाँ शिक्षाप्रद व मनोरंजक थीं इन कहानियों से विशवेश्ैया ने ईमनदारी, दया और अुशासन जैसे मूल मानवीय मू्यों को आत्मसात किया विशवेश्वैया चिकबल्लापु के मिडिल व हाईस्कूल में पढ़ेी जब उन्हे गाड सेव द किंग' (ईश्वर राजा को सुरक्षित रखे) वाला गीत गाने को कहा गया तोउन्हें पता चला कि भारत एक ब्रिटिश उपनिवेश है, अपने मामलों में भी भारतीयों को कुछ कहने का अधिकार न था भारत की अधिकांश संपत्त विदेशियों ने हड़प ली थी।

क्या उनके घर में काम करने वाली नौकरानी विदेशी शासन के कारण गरीब है? यह प्रशन विश्ेशवैया के मस्तष्क में उमड़ता-घुमइ़ता रहा। राष्टीयता की चिंगारी जल उठी थी और उनके जीवन में यह अंत समय तक जलती रही। विश्वेश्वरैया जब केवल चौदह वर्ष के थे तभी उनके पिता की मृत्युहो गई क्या वह अपनी पढ़ाई जारी रखें इस प्र्न पर तब विचार-विमरश हुआ जब उन्होंने अपनी माँ से कहा, "अम्मा, क्या मैं बंगलौर जा सकता हूँ? मैं वहाँ मामा रामैया के यहाँ रह सकता हूं वहाँ मैं कॉलेज मे प्रवेश ले लूगा"

पर बेटा.. तम्होरे मामा अमीर नहीं हैं तुम उन पर बोझ क्यों बना चाहते हो?" उनकी माँ ने तर्क किया।

अमा.. मं अपनी जरूतों के लिए स्वयं कमाऊँंगा मैंबचों को ट्यूशन पढा दूंगा अपनी फीस देने और पुस्तके खरीदन के लिए मैं काफी धन कमा लूँगा मे ख्याल से े पास कुछ पैसे बच भी जाएगे, जिन्हेमैं मामा को दे दूंा," विशवेश्वैया ने समझाया।

उनके पास हर प्रशन का उत्तर था—समाधान ढूढ़े की कषमता उनके पूरे जीवन में लगातार विकसित होती रही और इस कारण वह एक व्यावहारिक व्यक्त बन गए। यह उनके जीवन का सार था और उनका संदेश था पहले जानो, फिर करो। बड़ होकर यही विश्वेश्वैया एक महान इंजीनियर बने।

आर. के. मर्ति (अधनवाद—सुमन जैन)

Pani re Pani - CBSE Class 7 Hindi Notes