Nahin Hona Beemar - CBSE Class 7 Hindi Notes

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Chapter Study Guide & Summary

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Key Concepts & Syllabus Topics

Important Definitions & Terminology

Nahin Hona Beemar Overview
The central theme and foundational concept covered in Class 7 Hindi Chapter 5, emphasizing conceptual clarity, NCERT curriculum alignment, and exam readiness.
NCERT Curriculum Alignment
Structured study material adhering strictly to CBSE board guidelines, learning objectives, and standardized assessment criteria for Class 7.
Active Recall & Revision
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Quick Revision & Key Points

Full NCERT Chapter: Nahin Hona Beemar

एक दिन मुझे साथ लेकर नानीजी हमारे पड़ोसी सुधाकर काका को देखने गई, जो बीमार थे वे अस्पताल में भरती थे अस्पताल जाने का यह मेरा पहला अवसर था।

एक ब़ से वा्डमें कई एक जैसे पलंग लाइन से लगे हुए थे सब पर एक जैसी सफेद चादर और लाल कंबला। सफेद दीवारे, ऊँंची छत, खिड़कियों पर हे परदे और फ्श एकदम चमकता हुआ एक पलंग पर सुधाकर काका लेटे हुए थे एकदम पास पहुँचने पर दिखाई दिया। हमें देखकर सुधाकर काका जैसे खुश हो गए। नानीजी ने उनके सिर पर हाथ फेरा और उनके सिरहाने खड़ी हो गई और हालचाल पूछने लगीं।

अस्पताल का माहौल मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हे-हे पेड़ झूम रहे थे। न ट्रैफिक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी..। सिर्क लोगों के धीरेधीरे बातचीत करने की धीमी-धीमी गुनगुना बाकी एकदम शांति

तभी सफेद कपड़ं में एक नर्स आई। न्स ने नानीजी को देखकर अभिवादन में सिर हिलाय

ा और काका को दवा खिलाई नानीजी काका के लिए साबदाने की खीर बनाकर लाई थीं नस से पूछा कि खिला दू क्या? नर्स के हा कहने पर उसके जाने के बाद नानीजी ने चम्मच से धीरे-धीरे काका को साबूदाने की खीर खिलाई काका ने बहुत स्वाद लेकर खीर खाई। क्या ठाठ हैं बीमारों के भी। मैंने सोचा... ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो! काश! सुधाकर काका की जगह मैं होता! मैं कब बीमार पडूँगा! कुछ रोज बाद एक दिन मेरा स्कूल जाने का मन नहीं किया। मैने होमवर्क भी नहीं किया था। स्कल जाता तो जरूर सजा मिलती। मैने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं। मैं रजाई से निकला ही नहीं नानीजी उठाने आई तो मैने कहा, "मैं आज बीमार हूँ"

"क्या हो गया?

"मे सिर में दर्दहो रहा है। पेट भी दुख रहा है और मुझे बुखार भी है"

नानीजी चली गई।

मैं रजाई में पड़ा-पड़ा घर में चल रही गतिविधियों का अनुमान लगाता रहा। अब छोटे मामा नहाकर निकले। अब कुसुम मौसी रोज की तरह नाश्ता छोड़कर कॉलेज बस पकड़ने भागी। अब मुनू अपना जूता ढूँढ़ रहा है। अब छोटे मामा ने साइकिल उठाईं अब सब चले गए। अब घर में मैं अकेला रह गया।

पता नहीं कब झपकी-सी आ गई। तभी नानाजी आए "क्या हो गया? क्या हो गया?"

"बुखार आ गया।" मैंने कराहते हुए कहा।

"देखें!" नानाजी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ पेट देखा और नब्ज देखने लगे। इस बीच नानीजी भी आ गई "क्या हुआ?", नानीजी

"बुखार तो नहींहै।" नानाजी बोले। "आपको पता नहीं चल रहा थर्मीटर लगाकर देखिए" मैने कहा।

मुझे पता था घर में कोई नीं है थर्मीटर लगा भी लियातोदेखेगा कौन? पर खुद को बीमार साबित करने के लिए यह चाल अच्छी थी बहुत दूढ़ा गया पर थर्मीटर मिला ही नहीं। शायद कोई माँगकर ले गया था।

फिर नानाजी की आवाज आई, "ले, पुड़िया खा ले" न चाहते हुए भी मुझे कड़वी पुड़िया खानी पड़ी और काढ जैसी चाय पीनी ड़ी फिर नानाजी बोल,"आज इसे कुछ खाने को मत देना आराम करने दो शाम को देखेगे"

दोनों चले गए

मै पता नहींकब नींदमें गुडुप हो गया।

कुछ देर बाद जब मेरी आँख खुली मुझे बड़ी तेज इच्छा हुई कि इसी समय बाहर निकलकर दिन की रोशनी में अपनी गली की चहल-पहल देखूं देखा जाए कि चंदभाई डाइक्लीनर क्या कर रहे हैं? तेजराम की दुकान पर कितने ग्राहक बैठेहैं? महेश घी सेंटर ने

मलाई का भगोना आँच पर चढ़ाया या नहीं और टेलीफोन के तारों पर कितनी चिड़िया बैठी है? लेकिन मजबूरी थी चाहे जितनी ऊब हो, लेटे ही रहना था।

कुछ देर इधर-उधर की, स्कूल की, दस्तों की बाते सोचता रह.. फिर लेटेले पीठ दुखने लगी तो उठकर बैठ गया। लेकिन बाहर कुछ आहट होते ही फिर से लेट गया।

और खिला गए

अचानक मुझे भूख-सी लगी। फल या साबूदाने की खीर मिलने की उम्मीद की तो सुबह ही हत्या हो चुकी थी अब नानीजी से जाकर कहूँ कि भूख लग रही है तो वे क्या करेंगी? ज्यादा से ज्यादा यही कि दध पी ले। या नानाजी से पूछने चली जाएँगी—वो कह रहा है भूख लगी है। और फिर नानाजी क्या कहेंगे? वही जो सुबह कह रहे थे—तबियत ढीली हो तो सबसे अच्छा उपाय है भूखे रहना। इससे सारे विकार निकल जाएँगे।

क्या मुसीबत है! पड़ रहो! आखिर कब तक कोई पड़ा रह सकता है? इससे तो स्कूल चला जाता तो ही ठीक रहता। सजा मिलती तो मिल जाती। कितना मजा आता जब रिसेस में ठेले पर जाकर नमक मिर्च लगे अमरूद खाते कटर-कटर।

फिर झपकी लग गई।

लेकिन भूख के कारण ठीक से नींद भी नहीं आ रही थी। और आँख जरा लगती भी तो खाने ही खाने की चीजे दिखाई देतीं। गरमागरम खस्ता कचौड़ी.. मावे की बफी.. बेसन की चिक्की... गोलगप्पे। और सबसे ऊपर साबूदाने की खीर! पता नहीं क्यों साबूदाने की खीर सिर्फ उपवास और बीमारी में ही बनाई जाती है जैसे गुझिया सिर्फ होली-दिवाली और पंजीरी सिर्फ पूर्णिमा के दिन ही बनाई जाती है। क्यों?क्या ये चीजे जब इच्छा हो तब नहीं बनाई जा सकतीं। कोई मना करता है?

हे भगवान! यह तो अच्छी खासी बोरियत हो गई पूा दिन कोई कैसे लेटा रहे? और शाम को..। क्या शाम को भी नानाजी बाहर जाने देगे? सारे बच्चे हल्ला मचाते हुए आँगन में खेल रहे होंगे और मैं बिस्तर में पड़ा झख मार रहा होऊँंगा। अक्लमन्द! और बनो बीमार। और आज दिया गया होमवर्क! किससे कॉँपी माँगोगे? मैं रुआसा हो गया।

पास के कमरेमें होती खटर-पटर से अंदाजा हुआ कि मुन्ू स्कूल से आ गया है। तो क्या एक बज गया? अब बरतनों की आवाज आ रही है शायद सब लोग खाना खान बैठरहे है मुनू एक बार भी मुझेदेखने नहीं आया। आया भी होगा तो दबे पाँव आया होगा और मुझे सोता जान लौट गया होगा।

..वो खाना खा रहे हैं चबाने की आवाजे आ रही हैं देखो! उन्होंने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा? पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं

माँग लेता। लेकिन नहीं भूखे रहो!! इससे सारे विकार निकल जाएँगे विकार निकल जाएँ बस। चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ

.. आज क्या खाना बना होगा? खुशबू तो दाल-चावल की आ रही है। अरहर की दाल में हीँंग-जीरे का बघार और ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया और आधा चम्मच देसी घी। फिर उसमें उन्होने नीबू निचोड़ा होगा। थोड़ा-सा इस बीमार को भी दे दे कोई।

..लेकिन खुशबू तो किसी और चीज की है क्या हरी मिर्च तली गई है? उसे दाल-चावल में मसलकर खा रहे हैं जब रहा नहीं गया तो मैं रजाई फेककर खड़ा हो गया। दबे पाँव दरवाजे तक गया और चुपके से झककर देखा

हाँ, दाल-चावल, तली हुई हरी मिर्ची

लेकिन मुन्न आम चस रहा था आम! इस मौसम में! जरूर बंबई वाले चाचाजी ने भेजे होंगे कैसे चूस रहा है पूरी गुठली मुह मं ठूसे जैसे आम कभी देखेनहों भुक्कड़ कहीं का पूरा हाथ भी सान रहा है।

मैजलन, गुसे और कुढनमें पँव पटकता वापस बिस्त में आ गया उस पूरे दिनमुझे भखे पेट ही रहना पड़ा। सारे विकार निकल गए

इसके बाद स्कूल से छुटी मारने के लिए मैने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया। —स्वयं प्रकाश

लेखक से परिचय

स्वयं प्रकाश हिंदी के जाने-माने लेखक थे उनकी कहानियाँ बच्चों और बड़ों के दिलों को छू जाती हैं स्वयं प्रकाश की कहानियाँ पढ़ते हुए लगता है मानो वे हमारे ही जीवन की कहानियाँ हैं हमारे ही अनुभव उन्होंने लिख दिए हैं उन्होंने बच्चों के लिए कई

मनोरंजक कहानियाँ लिखीं हैं, जिनमें उनके साहसिक कारनामे, मित्रता और जीवन के छोटे-छोटे लेकिन महत्वपूर्ण पहलुओं को बड़ी रोचकता से प्र्तुत किया गया है।

स्वयं प्रकाश की कहानियों की विशेषता यह है किउन्हें पढ़ते समय ऐसा लगता है, जैसे कोई पुाना मित्र बातें कर रहा हो उनकी कहानियाँ न केवल मनोरंजन करती हैं बल्क सोचने-समझने के लिए नई दिशाएँ भी देती हैं मत्रा और भार, अगली किताब, ज्योत रथ के सारथी, फीनिक्स आदि इनकी कई रचनाएँ हैं

पाठ से

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्र्नों का सही उत्त कौन-सा है? उसके सामने तार () बनाइए कुछ प्र्नो के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं

(1) बच्चे के विद्यालय न जाने का मुख्य कारण क्या था?

• उसका विद्यालय जाने का मन नहीं था। • उसका साबूदाने की खीर खाने का मन था। • उसने गृहकार्य नहीं किया था। • उसे बुखार हो गया था।

(2) कहानी के अंत में बच्चे ने कहा, "इसके बाद स्कूल से छुटी माने के लिए मैने बीमारी का बहाना कभी नहीं बनाया" बच्चे ने यह निर्िय लिया क्योंकि

• घर में रहने के बजाय वि्यालय जाना अधिक रोचक है। • बीमारी का बहाना बनाने से साबूदाने की खीर नहीं मिलती। • झूठ बोलने से झूठ के खुलने का डर हमेशा बना रहता है। • इस बहाने के कारण उसे दिनभर अकेले और भूखे रहना पड़ा। (3) "लेटे-लेटेपी दुखने लगी इस बत सेबच्चे के बर मेक्ापता चलता है • उसे बिस्तर पर लेटे रहने के कारण ऊब हो गई थी। • उसे अपनी बीमारी की कोई चिता नहीं रह गई थी। • वह बिस्तर पर आराम करने काआनंद ले रहा था। • बीमारी के कारण उसकी पीठ में द्द हो रहा था। (4) "क्या ठाठ हैं बीमारों के भी!" बच्चे के मन में यह बात आई क्योकि • बीमार व्यक्त को बहुत आराम करने को मिलता है • बीमार व्यक्त को अच्छे खाने का आनंद मिलता है। • बीमार व्यक्ति को विद्यालय नहीं जाना पड़ता है। • बीमार व्यक्ति अस्पताल में शांति से लेटा रहता है।

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों। अपने मितरोंके साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चनं?

मिलकर करे मिलान

पाठ में स चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्ें इनके सही अथ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने परिजनों और शिक्षकों की सहायता ले सकते है।

क्र.सं.शब्दअर्थ
1.साबूदानासागू नामक वृक्ष के तने का गूदा, सागूदाना। यह पहले आटे के रूप में होता है और फिर कूटकर दानों के रूप में सुखा लिया जाता है।
2.वार्डकिसी विशिष्ट कार्य के लिए घेरकर बनाया हुआ स्थान।
3.नर्सवह व्यक्ति जो रोगियों, घायलों या वृद्धों आदि की देखभाल करे।
4.रजाईएक प्रकार का जाड़े का ओढ़ना जिसका कपड़ा दोहरा होता है और जिसमें रुई भरी होती है।
5.थर्मामीटरशरीर का तापमान (जैसे बुखार) नापने का एक छोटा यंत्र।
6.काढ़ाकई तरह की जड़ी-बूटियों और औषधियों को उबालकर उनके रस से बना पेय। इसे सर्दी-जुकाम, खाँसी-बुखार और पाचन से जुड़ी समस्याओं में लाभदायक माना जाता है।
7.ड्राइक्लीनररेशमी, ऊनी, मलमल जैसे नाजुक कपड़ों को पानी, साबुन और डिटर्जेंट के बिना मशीनों से साफ करने वाला व्यक्ति।
8.ताजमहलउत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित 17वीं सदी में निर्मित एक विश्व-प्रसिद्ध स्मारक जो सफेद संगमरमर से बना है।
9.अरहरएक दाल जिसे तुअर भी कहते हैं।

पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तिा नीचे दी गई हैं इन्हे ध्यान से पढिए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर् समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए—

(क) "मैने सोचा बीमार पड़ने के लिए आज का दिन बिलकुल ठीक रहेगा। चलो बीमार पड़ जाते हैं"
(ख) "देखो! उ्होने एक बार भी आकर नहीं पूछा कि तू क्या खाएगा? पूछते तो मैं साबूदाने की खीर ही तो माँगता। कोई ताजमहल तो नहीं माँग लेता। लेकिन नहीं! भूखे रहो! इससे सारे विकार निकल जाएँगे। विकार निकल जाएँ बस। चाहे इस चक्कर में तुम खुद शिकार हो जाओ। "

सोच-विचार के लिए

पाठ को एक बार फिर ध्यान से पढिए, पता लगाइए और लिखिए

(क) अस्पताल में बच्चे को कौन-कौन सी चीजे अच्छी लगी और क्यों?
(ख) कहानी के अंत में बच्चे को महसूस हुआ कि उसे स्कूल जाना चाहिए था। क्या आपको लगता हैकि उसका निर्णय सही था? क्यों?
(ग)जब बच्चा बीमार पड़ने का बहाना बनाकर बिस्तर पर लेटा रहा तो उसके मन में कौन-कौन से भाव आ रहे थे?
(संकेतमन में उत्न होने वाले विकार या विचार को भाव कहते है, उदाहरण के लिएक्रोध, दुख, भय,
करुणा, प्रेम आदि)

(घ) कहानी में बच्चे ने सोचा था कि "ठाठ से साफ-सुथरे बिस्तर पर लेटे रहो और साबूदाने की खीर खाते रहो" आपको क्या लगता है, असल में बीमार हो जाने और इस बच्चे की सोच में कौन-कौन सी समानताएँ और अंतर होंगे?

(संकेत— आप अपने अनुभवों के आधार पर इस प्रश्न पर विचार कर सकते हैं कि कहानी वाले बच्चे की कल्पना वास्तविकता से कितनी अलग है।)

(उ) नानीजी और नानाजी ने बच्चे को बीमारी की दवा दी और उसे आराम करने को कहा। बच्चे को खा नहीं दिया गया। क्या आपको लगता है कि उन्होंने सही किया? आपको ऐसा क्यों लगता है?

अनुमान और कल्पना से

(क) कहानी के अंत में बच्चा नानाजी और नानीजी को सब कुछ सच-सच बताने का निरणय कर लेता तो कहानी में आगे क्या होता?

(सकेत—उसका दिन कैसे बदल जाता? उसकी सोच और अनुभव कैसे होते?)

(ख) कहानी मेंबच्चे की नानीजी के स्थान पर आप हैं आप सारे नाटक को समझ गए हैं लेकिन चाहतेहैं कि बच्चा सारी बात आपको स्वयं बता दे अब आप क्या करेगे?

(संकेत—इस सवाल में आपको नानीजी की जगह लेकर सोचना है और एक मनोरंजक योजना बनानी है जिससे बच्चा आपको स्वयं सारी बातें बता दे।)

(ग) कहानी में बच्चे के स्थान पर आप हैं और घर में अकेले हैं अब आप ऊबने से बचने के लिए क्या-क्या करेंग?
(घ) कहानी के अंत मेंबच्चे को लगा कि उसे स्कूल जाना चाहिए था कल्पना कीजिए, अगर वह स्कूल जाता तो उसका दिन कैसा होता? अगले दिन जब वह स्कूल गया होगा तो उसने क्या-क्या किया होगा?
(ड) कहानी में नानाजी और नानीजी ने बच्चे की बीमारी ठीक करने के लिए उसे दवाई दी और खाने के लिए कुछ नहीं दिया। अगर आप नानीजी या नानाजी की जगह होते तो क्या-क्या करते?

कहानी की रचना

"अस्पताल का माहौल मुझे बहुत ही अच्छा लग रहा था बड़ी-बड़ी खिड़कियों के पास हरे-हरे पेड़ झूम रहे थे न ट्रैफिक का शोरगुल, न धूल, न मच्छर-मक्खी..। सिर्फ लोगों े धीरे-धीरे बातचीत करने की धीमी-धीमी गुनगुन। बाकी एकदम शांति"

इन पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन पंक्तियों ें ऐसा लग रहा है मानो हमारी आँखों के सामने अस्पताल का चेत्र-सा बन गया हो। लेखन में इसे चित्रात्मक भाषा' कहते हैं। अनेक लेखक अपनी रचना को रोचक और सरस

बनाने के लिए उपयुक्त स्थानों पर अनेक वस्तुओं, कायों, स्थानों आदि का विस्तार से वर्णन करते हैं

लेखक ने इस कहानी को सरस और रोचक बनाने के लिए और भी अनेक तरीकों का उपयोग किया है। उदाहरण के लिए, उन्होने कहानी में बच्चे द्वारा कल्पना करने' का भी प्रयोग किया है (जब बच्चा अकेले

लेटे-लेटे घर और बाहर के लोगों के बारेमें सोच रहा है) इस कहानी में ऐसी कई विशेषताएँ छिपी है।

(क) इस पाठ को एक बार फिर से पढिए और अपने समू में मिलकर इस पाठ की अन्य विशेषताओं की सूची बनाइए। अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

(ख) कहानी में से निम्नलिखित के लिए उदाहरण खोजकर लिखिए

विशेष बिंदुकहानी में से उदाहरण
बच्चे द्वारा पिछली बातों को याद किया जाना
हास्य यानी हँसी-मजाक का उपयोग किया जाना
बच्चे द्वारा सोचने के तरीके में बदलाव आना
कहानी में किसी का किसी बात से अनजान होना
बच्चे द्वारा स्वयं से बातें किया जाना

समस्या और समाधान

कहानी को एक बार पुन: पढ़कर पता लगाइए

(क) बच्चे के सामने क्या समस्या थी? उसने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?

(ख) नानीजी-नानाजी के सामनेक्या समस्या थी? उन्होंने उस समस्या का क्या समाधान निकाला?

शब्द से जुड़े शब्द

नीचे दिए गए स्थाो में'बीमा ' से जु़ेशबद पाठ में े चुनकर लिखिए

कहानी में से वे वाक्य ढूँढ़कर लिखिए जिनसे पता चलता हैकि

(क) कहानी में सदी के मौसम की घटनाएँ बताई गई ै। (ख) बच्चे को बहाना बनाने के परिणाम का आभास हो गया। (ग) बच्चे को खाना-पीना बहुत प्रिय है। (घ) बच्चे को स्कूल जाना अच्छा लगता है।

शीर्षक

(क)आपने जो कहानी पढ़ है, इसका नाम 'नहीं होना बीमार' है। अपने समूह में चर्चा करके लिखिएकि इस कहानी का यह नाम उपयुक्त है या नहीं अपने उत्तर के कारण भी बताइए।
(ख) यदि आपको इस कहानी को कोई अन्य नाम देन हो तोक्या नाम देंगे? आपने यह नाम क्यों सोचा, यह भी बताइए।

अभिनय

कहानी में से चुनकर कुछ संवाद नीचे दिए गए हैं आपको इनहें अभिनय के साथ बोलकर दिखाना है प्रत्येक समूह से बारी-बारी से छात्र/छात्राएँ कक्ामें सामने आएँगे और एक संवाद अभिनय के साथ बोलकर दिखाएँगे—

  1. "बुखार आ गया? मैंने कराहते हुए कहा।
  2. "आपको पता नहीं चल रहा। थ्मामीटर लगाकर देखिए।" मैंने कहा।
  3. "मेर सिर में दर्द हो रहा है पेट भी दुख रहा है और मुझे बुखार भी है"
  4. नानाजी आए। बोले, "अब कैसा है सिरदर्द?"
    5.फिर नानाजी बोले, "आज इसे कुछ खाने को मत देना। आराम करने दो। शाम को देखेंगे।"

चेहरों पर मुस्कान, मुह में पानी

(क) इस कहानी में अनेक रोचक घटनाएँहैंजन्हें ढ़कर चेहेपर मुस्कान आ जाती है। इस कहानी में किन बातों को पढ़कर आपके चेहरे पर भी मुस्कान आ गई थी? उन्हे रेखांकित कीजिए।

(ख) इस कहानी में किन वाक्यों को पढ़कर आपके मुह मे पानी आ गया था? उन्हें रेखांकित कीजिए।

(इन्हे रेखांकित करने के लिए आप किसी अन्य रंग का उपयोग कर सकते हैं)

लेखन के अनोखे तरीके

मै बिना आवाज किए दरवाजे तक गया और ऐसे झककर देखने लगा जिससे किसी को पता न चले कि मैं बिस्तर से उठ गया हूँ।

इस बात को कहानी में इस प्रकार विशेष रूप से लिखा गया है "दबे पाँव दरवाजे तक गया और चुपके से झककर देखा"

इस कहानी में अने स्थानों पर वाक्योंको विशे ढंग से लिखा गया है साधारण बातों को कुछ अलग तरह से लिखने से लेखन की सुंदरता बढ़ सकती है।

नीचे कुछ वाक्य दए गए हैं कहानी में ढूँढिए कि इन बातों को कैसे लिखा गया है

  1. ऐसा लगा मानो हमें देखकर सुधाकर काका खुश हो गए

  2. खिड़कियाँ बहुत बड़ी थीं और उनके बाहर हे पेड़ हवा से हिल रहे थे

  3. वहाँ केवल लोगों के फुसफुसाने की आवाजे आरही थीं

  4. फुसफुसाने की आवाजों के सिवा वहाँ कोई आवाज नहीं थी

  5. बीमार लोगों के बहुत मजे होते हैं nuh

  6. मैं झूठमूठ बीमार पड़जाता हूँ।

विराम चिह्न

"देखें!" नानाजी ने रजाई हटाकर मेरा माथा छुआ पेट देखा और नबज देखने लगे इस बीच नानीजी भी आ गई "क्य हुआ?", नानीजी ने पूछा

पिछले पृछपर दिए गएवाक्योंकोधयान सेेखए इन वा्योंमेंआपको कुछ शबदोंसे पहले याबा मेंकछ चिह दिखाई दे हे हैं इन्हें विराम चिह्न कहते हैं।

अपने समूह के साथ मिलकर नीचे दिए गए विराम चिह्न को कहानी ें ढूढिए ध्यानपूर्वक देखकर समझिए कि इनका प्रयोग वाक्यों में कहाँ-कहाँ किया जाता है। आपने जो पता किया, उसे नीचे लिखिए

आव्यकता हो तो इस प्रशन का उत्तर पता करने के लिए आप अपने परिजनों, शकषकों पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता ले सकते हैं।

कैसी होगी गली

"मुझे बड़ी तेज इच्छा हुई कि इसी समय बाहर निकलकर दिन की रोशनी में अपनी गली की चहल-पहल देखूं" आपने कहानी में बच्चे के घर के साथ वाली गली के बारे में बहुत-सी बातें पढ़ी हैं उन बातों और अपनी कल्पना के आधार पर उस गली का एक चित्र बनाइए।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) बच्चे ने अस्पताल के वातावरण का विस्तार से सुंदर वर्णन कियाहै इसी प्रकार आप अपनी कक्षा का वर्णन कीजिए
(ख) कहानी में बच्चे को घर में अकेले दिन भर ले रहना पड़ा था क्या आप कभी कहीं अकेले रहे हैं? उस समय आपको कैसा लग रहा था? आपने क्या-क्या किया था?
(ग) कहानी में आम खाने वाले मुन्ू को देखकर बच्चे को ईंष्या हुई थी क्या आपको कभी किसी से या किसी को आपसे ईंष्या हुई है? आपने तब क्या किया था ताकि यह भावना दूर हो जाए?

(घ) कहानी में नानाजी-नानीजी बच्चे का पूरा ध्यान रखने का प्रयास करते हैं आपके घर और विद्यालय में आपका ध्यान कौन-कौन रखते हैं? कैसे?

(ड) आप अपने परिजनों और मितरों का ध्यान कैसे रखते हैं? क्या-क्या करते हैं या क्या-क्या नहीं करते हैं ताकि उन्हें कम-से-कम परेशानी हो?

बहाने

(क) कहानी में बच्चे ने बीमारी का बहाना बनाया ताकि उसे स्कूल न जाना पड़ं क्या आपने कभी किसी कारण से बहाना बनाया है? यदि हाँ, तो उसके बारे में बताइए। उस समय आपके मन में कौन-कौन से भाव आ-जा रहे थे? आप कैसा अनुभव कर रहे थे?

(ख) आमतौर पर बनाए जाने वाले बहानों की एक सूची बनाइए।

(ग)बहाने क्यों बनाने पड़ते हैं? बहाने न बनाने पड़ं, इसके लिए हम क्या-क्या कर सकते हैं?

अनुमान

"में रजाई ें पड़ा-पड़ा घर में चल रही गतिविधियों का अनुमान लगाता रहा"

कहानी ें ब्चेने ने प्का के अनुमन लगएहैं कयाआपने कभी किसी अनेव्क्तास्तुाप- पक्षीस्थान आद के विषय में अनुमान लगाएहैं? किसके बारे में? क्या? कब? विस्तार से बताइए। (संकेत—जैसे पेड़ से आने वाली आवाज सुनकर किसी प्रणी का अनुमान लगाना; कहीं दूर रहने वाले किसी संबंधी/रिशतेदार के विषय में सुनकर उसके संबंध में अनुमान लग़ाना।)

घर का सामान

"बहुत ढूढ़ा गया पर थर्मामीटर मिला ही नहीं शायद कोई माँगकर ले गया था।"

कहानी में बच्चे के घर पर थर्मीटर (तापमापी) खोजने पर वह मिल नहीं पाता। आमतौर पर हमारे घरो में कोई न कोई ऐसी वस्तु होती है जिसे खोजने पर भी वह नहीं मिलती, जिसे कोई माँगकर ले जाता है या हम जिसे किसी से माँगकर ले आते हैं अपने घर को ध्यान में रखते हु ऐसी वस्तुओं की सूची बनाइए—

जो खोजने पर भी नहीं मिलती हैंजो कोई माँगकर ले जाते हैंजो आप किसी से माँगकर लाते हैं

खान-पान और आप

(क) कहानी में सुधाकर काका को बीमार होने पर साबूदाने की खीर दी गई थी। आपके घर में किसी के बीमार होने पर उसे क्या-क्या खिलाया जाता है?

(ख) कहानी में बच्चे को बहुत-सी चीजे खाने का मन है। आपका क्या-क्या खाने का बहुत मन करता है?

(ग) कहानी में बच्चा सोचता है कि साबूदाने की खीर सिरफ बीमारी या उपवास मेंक्यों मिलती है। आपके घर में ऐसा क्या-क्या है, जो केवल विशेष अवसरों या त्योहारों पर ही बनता है?

(घ) कहानी में बच्चा सोचता है कि अगर वह स्कूल जाता तो उसे ठेले पर नमक-मर्च वाले अमरूद खाने को मिलते। आप अपने विद्यालय में क्या-क्या खाते-पीतेहैं? विद्यालय में आपका रचिकर भोजन क्या है?

(ड) इस कहानी में भोजन से जड़ी ब्चे की कई रोचक बातेंबताई गई हैं आपके बचपन की भोजन से जड़ी कोई विशेष याद क्या है, जिसे आप अब भी याद करते हैं?

(च) कहानी में बच्चा भोजन की सुंगध से रजाई फेंककर रसोई में झाकने लगा। क्या आपके साथ कभी ऐसा हुआ है कि घर में किसी विशेष खाने की सुगध से आप भी रसोई में जाकर तुरत देखना चाहते हैं किक्या पक रहा है? आपको किस-किस खाने की सुंगध सबसे अधिक पसंद है?

आज की पहेली

कहानी में आपने खाने-पीने की अनेक वस्तुओं के बारे में पढ़ाहै। अब हम आपके सामने खाने-पीने की वस्तुओं या व्यंजनों से जुड़ी कुछ पहेलियाँ लाए हैं इनहें बूझिए और उतर लिखिए

पहेली उत्तर
1.रोटी जैसा होता है ये, पर आलू से भरा-भराघी-तेल साथी हैं इसके, दही-चटनी से हरा-भरा
2. दाल-चावल का मेल है यह तो, भारत भर में तुम इसे पाओ,दक्षिण में ये खूब है बनता, चटनी-सांभर संग-संग खाओ,गोल-तिकोना इसका आकार, गरम-गरम तुम इसे बनाओ,कौन-सा व्यंजन होता है यह, बोलो बोलो नाम बताओ।
3नाशते का यह बड़ा है खास, महाराष्ट् में इसका वास,मिर्च-मसाले से भरपूर, संग बटाटा भी मशहूर,चटपटी चटनी लगी किसे? बूझो नाम तो खाएँ इसे!
4.बेसन से बने चौकोर या गोल, गुजरात में बड़ा है बोल।खाने में नर्म, पानी भरे, धनिया मिर्ची संग सजे।
5. गोल-गोल पानी से भरके, चटनी सोंठ संग इसे खाओ उत्तर-दक्षिण पूरब-पश्चिम, गली-मुहल्लो में भी पाओ। खद्टी-मीठी, तीखी हाय, खाना तो इसे हर कोई चाहे!
. होर साग संग मुझको पाओ, मक्खन के संग मुझको खाओ। आटा मेरा हल्का पीला, स्वाद मेरा है बड़ा रंगीला।
7. आग में पकती हू, सोधा-सा स्वाद, साथ में खाओ चूरमा, बन जाए फिर बात, गरम दाल से मुझको प्यार, राजस्थान का मैं उपहार
8. गोल-गोल और शखेत रंग का रस से भरा हुआ हू खूब। मीठी दनिया का महाराजा चाशनी मीठी डूब-डूब।lishad
Nahin Hona Beemar - CBSE Class 7 Hindi Notes