[2]
तीन बुद्धिमान
एक समय की बात है कि एक निधिन व्यक्त के तीन बेटे थे। वह प्राय: अपने बेटों से कहता "मेरे बेटो! हमारे पास न तो रूपया-पैसा है और न ही सोना-चाँदी इसलिए तुम्हे एक दूसरे प्रकार का धन संचित करना चाहिएहर वस्तु और स्थिति को पूर्णित: समझने और जानने का प्रयास करो। कुछ भी तुम्हारी दृष्ट से न बच पाए। रुपये-पैसे के स्थान पर तुम्हरे पास पैनी दृष्ट होगी और सोने-चादी के स्थान पर तीत् बुद्ि होगी। ऐसा धन संचित कर ले पर तुमहें कभी किसी प्रकार की कमी न रहेगी और तुम दूसरों की तुलना में उन्नीस नहीं रहोगे।"
समय बीता और कुछ समय पश्चात पिता चल बसे बेटे मिलकर बैठे, उन्होंने सारी स्थिति पर विचार किया और फिर बोले— "हमोरे लिए यहा कुछ भी तो करने को नहीं आओ, घूम फिरकर जगत देखें आवश्यकता होने पर हम चरवाहों या खेत मेंश्रमिकों का काम कर लेंगे। हम कहीं भी क्यों न हों, भूखे नहीं मरेंगे"
अंतत: वेतैयार होकर यत्रा पर चल दिए
उन्होंने सुनसान-वीरान घाटियाँ लाँघीं और ऊँचे-ऊँचे पहाड़़ों को पार किया। इस तरह वे लगातार चालीस दिनों तक चलते रहे।
उनके पास जितना खाने-पीने का सामान था, अब तक समाप्त हो गया था। वे थककर चूर हो गए थे और उनके पैरों ं छाले पड़ गए थे कितु सड़क थीकि समत होने को नहीं आरी थीे आराम करने के लिए रुके और पुन: आगे चल दिए अंत में उन्हे अपने सामने वृ्ष और मकान दिखाई दिएवे एक बड़े नगर के पास पहुँच गए थे
तीनों भाई बहुत प्रसन् हुए और शीग्रता से पग बढ़ाने लगे। जब वे नगर के बिलकुल निकट पहुँच गए तो सबसे बड़ा भाई अचानक रुका, उसने धरती पर दृष्ट डाली और बोला—
"थोड़ी ही देर पहले यहाँ से एक बहुत बड़ा ऊँट गया है"
वे थोड़ा और आगे गए तो मझला भाई रुका और सड़क के दोनों ओर देखकर बोला "संभवत: वह ऊँट एक आँख से नहीं देख पाता हो।"
वे कुछ और आगे गए तो सबसे छोटे भाई ने कहा "ऊैंट पर एक महिला और एक बच्चा सवा थे"
"बिलकुल सही!" दोनों बड़़ भाइयों ने कहा और वे तीनों फर आगे बढ़ चले कुछ समय पश्चात एक घुड़सवार उनके पास से निकला। सबसे बड़े भाई ने उसकी ओर देखकर पूछा "घुडसवार, तुम किसी खोई हुई वसतु को ढँढ रे होन?" घड़सवार
ने घोड़ा रोककर उत्तर दिया
"हाँ"
"तुम्हारा ऊँट खो गया हैन?" सबसे बड़े भाई ने पूछा।
"हाँ"
"बहुत बड़ा-सा?"
"हाँ"

"वह एक आँख से नहीं देख पाता हैन?" मझले भाई ने पछा।
"एक छोटे-से बच्चे के साथ उस पर महिला सवार थी न?" सबसे छोटे भाई ने सवाल किया।
घुड़सवार ने तीनों भाइयों को शंका की दृष्ट से देखा और बोला आह तो तुम्हरे पास है मेरा ऊँट तुरंत बताओ, तुमने उसका क्या किया?
"हमनेतु्होरे ऊँट का मुह तक नहीं देखा', भाइयोंन उत्तर दिया। "तो तुम्हें उसके बारेमें सभी बातेंकैसे पता चलीं?"
"क्योंकि हम अपनी आँखों और बुद्द से काम लेना जानतेहै", भाइयों ने उतर दिया। "शीप्रता से उस दिशा में अपना घोड़ा दौड़ाओ। वहाँ तुमहे तुम्हारा ऊँंट मिल जाएा।" "नहीं', ऊँंट के स्वामी ने उतर दिया, "मैं उस दिशा मे नहीं जाऊँंगा मेरा ऊँंट तुम्हरे पास है और तुमहे ही उसे मुझे लौटाना पड़गा"
"हमने तो तुमहरे ऊँंट को देखा तक नहीं', भाइयो ने चितित होते हुए कहा। लेकिन घुड़सवार
उनकी एक भी सुने को तैयार नहीं था उसने अपनी तलवार निकाल ली और उसे जोर से घुमाते हुए तीनो भाइयों को अपने आगे-आगे चलने का आदेश दिया। इस प्रकार वह उन्हें सीधे अपने देश के राजा के भवन में ले गया। इन तीनों भाइयों को सुरक्षा कर्मियों को सौंपकर वह स्वयं राजा के पास गया।
"मैं अपने रेवड़ों को पहाड़ों पर लिए जा रहा था', उसने कहा, "और मेरी पत्नी मेरे छोटे-से बेटे के साथ एक बड़े-से ऊँट पर मेरे पीछे-पीछे आ रही थी। किसी कारण उनका ऊँंट पीछे रह गया और वे रस्ते से भटक गए। मैं न्हें ूढने गया तो मुझे रासत में तीन ्यक्त मिले जो पैदल चले जारहे थे मुझेपूा विश्खास है कि उन्होने मेरा ऊँंट चुराया है और मेरीपत्नी तथा बेटे को मार डाला है।"
"तुम ऐसा क्यों समझते हो?" जब वह व्यक्त अपनी बात कह चुका तो राजा नेपूछा "इसलिए कि मैंने उन लोगों से इस संबंध में एक भी शब्द नहीं कहा था फिर भी उन्होंने मुझे यह बताया कि ऊँंट बहुत बड़ा था और एक आँख से नहीं देख पाता था तथा उस पर एक महिला बच्चे के साथ सवार थी।"
राजा ने थोड़ी देर सोच-विचार किया और फिर बोला—
"जैसा कि तुम कहते होतम्हे बताए बिना ही तु्हरे ऊँट के विषय में न्होंने सभी कुछ इतनी अच्छी तरह से बताया है तो अवश्य उन्होने उसे चुराया होगा जाओ, उन चोरों को यहाँ लाओ"
ऊँट का स्वामी बाहर गया और तीनों भाइयों को साथ लेकर झटपट अंदर आया। "चोरो, तुरंत बताओ!" रज उनहें धमकाते हुए बोला "तुरंतउतर दो, तुमने इस आदमी का ऊंट कहाँ छिपाया है?"
"हम चोर नहीं हैं हमने इसका ऊँट कभी नहीं देखा"', भाइयोंने उतर दिया
तब राजा बोला— "इस व्यक्त के कुछ भी बताए बिना तुमने ऊंट के विषय में सब कुछ बिलकुल सही बता दिया। अब तुम यह कहने का कैसे साहस करते हो कि तुमने उसे नहीं चुराया?" "महाराज, इसमें तो आश्र्य की कोई बात नहीं है।" भाइयों ने उत्तर दिया "बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम कुछ भी अपनी दृष्ट से नहीं चूकने देते हमने अपने परिवेश
को पैनी दृष्ट से देखने और बुद्ि से सोचने के प्रयास में बहुत समय लगाया है इसीलिए ऊंट को देखे बिना ही हमने बता दिया कि वह कैसा है।"
राजा हँंस दिया।
"किसी को भी देखे बिना ही उसके विषय में क्या इतना कुछ जानना संभव हो सकता है?"
उसने पूछा।
"हाँ, संभव है", भाइयों ने उत्तर दिया "तो ठीक है हम अभी तु्हारी सच्चाई की जाँच कर लेंग"
राजा ने उसी समय अपने मंत्र को बुलाया और उसके कान में कुछ फुसफुसाया। मंत्री तुरंत महल के बाहर चला गया। लेकिन शी्र ही वह दो सेवकों के साथ लौटा जो एक बहुत बड़ी-सी पेटी लाए थे दोनों ने पेटी को बहुत सावधानी से द्ार के पास ऐसे रख दिया कि वह राजा को दिखाई दे सके और स्वयं एक ओर हट गए। तीनों भाई दूर से खड़े उ्े देखते रहे उन्होने इस बात को ध्यान से देखा कि पेटी कहाँ से और कैसे लाई गई थी और किस ढंग से रखी गई थी। "हाँ, तो चोरों हे बताओ कि उसपेटीमेंक्याहै?" राजा नेकहा।
"महाराज, हम तो पहले ही यह विनती कर चुके हैं कि हम चोर नहीं है", सबसे बड़ भाई ने कहा "पर यदि आप चाहते हैं तो मैं आपको यह बता सकता हूं कि उस पेटी में क्या है। उसमे कोई छोटी-सी गोल वस्तु है"
"उसमें अनार है", मझला भाई बोला। "हा, और वह अभी कच्चा है", सबसे छोटे भाई ने कहा

यह सुनकर राजा नेपेटी को पास लाने का आदेश दिया। सेवकों न तुरंत आदेश पूरा किया। राजा ने सेवकों से पेटी खोलने के लिए कहा। पेटी खुल जाने पर उसने उसमें झका। जब उसे उसमे कच्चा अनार दिखाई दिया तो उसके आश्चर्य की कोई सीमा न रही।
आश्चर्यचकित राजा ने अनार निकालकर वहाँ उपस्थित सभी लोगों को दिखाया। तब उसने ऊंट के मालिक से कहा—
"इन लोगों ने यह स्षट कर दिय है कि ये चोर नही हैं वास्तव मे थे बहुत ही बुद्धिमान लोग हैं। तुम इनके बताए रास्ते पर जाकर अपने ऊँंट को खोजो।"
राजा के महल में उस समय उपस्थित सभी लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था। किंत सबसे बढ़कर तो स्वयं राजा चकित था उसने सभी तरह के अच्छे और स्वादिष्ट भोजन मँंगवाए और लगा इन भाइयों की आवभगत करने।
"तुम लोग बिलकुल निदोंष हो और जहाँ भी जाना चाहो जा सकते हो किंतु जाने से पहले तुम मुझे सारी बात विस्तार के साथ बताओ। तुमहें यह कैसे पता चला कि उस व्यक्त का ऊँंट खो गया है और तुमने यह कैसे जाना कि ऊँंट कैसा था?"
सबसे बड़ भाई ने कहा—
"धूल पर उसके पैरों के चिहनों से मुझे पता चला कि कोई बहुत बड़ा ऊँंट वहाँ से गया है। जब मैंने अपने पास से जानेवाले घुड़सवार को अपने चारों ओर नजर दौड़ाते देखा तो उसी समय मेरी समझ में यह बात आ गई कि वह क्या खोज रहा है"
"बहुत अच्छा!"राजा ने कहा "अच्छा, अब यह बताओ कि तुम मे से किसने इस घुड़सवार को यह बताया था कि उसका ऊँट एक ही आँख सेदे पाता है? उसका तो सड़क पर चिह्न नहीं रहा होगा" 0
"मैने इस बात का अनुमान ऐसे लगाया कि सड़क के दायीं ओर की घास तो ऊँट ने चरी थी, मगर बायीं ओर की घास ज्यों की त्यों थी", मझले भाई ने उतर दिया।
"बहुत उत्म!" राजा ने कहा, "तुम में से यह अनुमान किसने लगाया था कि उस पर बच्चे के साथ एक महिला सवार थी?"
"मैने", सबसे छोटेभाई ने त्तर दिया, "मैने देखा क एक स्थान पर ऊंटकेघुटने टेककर बैने के चिहन बने हुए थे उनके पास ही रेत पर एक महिला के जूतों के चिह्न दिखाई दिए साथ ही छोटे-छोटे पैरों के चिह्न थे जिससे मुझे पता चला कि महिला के साथ एक बच्चा भी था" "बहुत अच्छा! तुमने बिलकुल सही कहा है", राजा बोला— "लेकिन तुम लोगों को यह कैसे पता चला कि पेटी में एक कच्चा अनार है? यह बात तो मेरी समझ में बिलकुल नहीं आरही"

सबसे बड़े भाई ने कहा
"जिस तरह दोनो व्यक्त उसे उठाकर लाए थे, उससे बिलकुल स्पष्ट था कि वह थोड़ी भी भारी नहीं है। जबवेपेटी को रख रहे थेतोमुझे उसके अंदर किसी छोटी-सी गोल वस्तु के लुढ़कने की ध्वनि सुनाई दी"
मझला भाई बोला—
"मैने ऐसा अनुमान लगाया कि चूंकि पेटी उदचान की ओर से लाई गई है और उसमें कोई छोटी-सी गोल वस्तु है तो वह अवश्य अनार ही होगा। कारण कि आपके महल के आसपास अनार के बहुत-से पेड़ लगे हुए है"
"बहुत अच्छा!" रा ने कहा और उसने सबसे छोटे भाई से पूछ "लेकिन तुमहें यह कैसे पता चला कि अनार कच्चा है?"
"इस समय तक उद्यान में सभी अनार कच्चे हैं यह तो आप स्वयं ही देख सकते है', उसने उत्तर दिया और खुली हुई खिड़की की ओर संकेत किया।
राजा ने बाहर देखा तो पाया कि उद्यान में लगे अनार के सभी वृकषों पर कच्चे अनार लटक रहे थे। $\gimel$
राजा इन भाइयों की असाधारणपैनी दृष्ट और तक्षण बुद्दि े चकित रह गया। "धन-संपति या सासारिक वस्तुओं की दृष्ट से तो तुम धनवान नहीं हो लेकिन तुम्हरे पास बुद्ध का बहुत बड़ा कोष है", उसने प्रंसा करते हुए कहा और न्हेंअपने दरबार में ख लिया।
पाठ से
मेरी समझ से
(क) लोककथा के आधार पर नीचे दिए गए प्रनों का सटीक उत्तर कौन सा है? उसके सामने तारा () बनाइए। कुछ प्र्नों के एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) लोककथा मे पिता ने अपने बेटोंसे 'धन संचय करने' को कहा। उनकी इस बात का क्या अर्थ हो सकता है?
• खेती-बारी करना और धन इकदहा करना • पैनी दृष्ट और तीव्र बुद्र का विकास करना • ऊँंट का व्यापार करना • गाँव छोड़कर किसी नगर में जाकर बसना
(2) तीनों भाइयों ने अपने ़ान और बुद्द का उपयोग करके ऊँट के बार में बहुत-कुछ बता दिया। इसे क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
• बुद्धिक प्रयोग करके ऊंट के बार में सब-कुछ बताया जा सकता है 0 समस्या को सुलझ्झाने के लिएध्यान से निरीक्षण करना महत्वपूर्ण है 0 किसी व्यक्ति का जान, बुद्धि और धन ही सबसे बड़ी ताकत है। • ऊँट के बारे में जानने के लिए दूसरों पर भरोसा करना चाहिए।
(3) राजा ने भाइयों की बुद्धित्तापर विश्वास क्यों किया?
• भाइयों ने अपनी बात को तर्क के साथ समझाया। • राजा को ऊँंट के स्वामी की बातों पर संदेह था • राजा ने स्वयं ऊँंट और पेटी की जॉँच कर ली थी। • भाइयों ने राजा को अपनी बात में उलझा लिया था (
- लोककथा के पात्रो और घटनाओं के आधार पर, राजा के निर्णय के पीछे कौन-सामूल्य छिपा है?


• दोषी को कड़ा से कड़ा दंड देना हर समस्या का सबसे बड़ा समाधान है। 0 अच्छी तरह जाँच किए बिना किसी को दोषी नहीं ठहराना चाहिए 0 राजा की प्रत्येक बात और निरणय को सदा सही माना जाना चाहिए। • ऊंट की चोरी के नर्णय के लिए सेवक की बुद्द का उपयोग करना चाहिए। (ख) हो सकताहै कि आपके समूह के साथियों ने भि्न-भिन्न उत्त चुने हों। अपने मित्रं के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यं चुनें
पंक्तियों पर चर्चा

पाठ में से चुनकर कुछ पंक्तयाँ नीचे दी गई हैं इनहेंध्यान से पढिए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए
(क) "रूपये-पैसे के स्थान पर तुम्हरे पास पैनी दृष्ट होगी और सोने-चाँदी के स्थान पर तीब्रबुद्द होगी। ऐसा धन संचित कर लेने पर तुम्हें कभी किसी प्रकार की कमी न रहेगी और तुम दूसरों की तुलना मेंउन्नीस नहीं रहोगे।"
(ख) "हर वस्तु और स्थिति को पूर्णत: समझने और जाने का प्रयास करो। कुछ भी तुम्हरी दृष्ट से न बच पाए।"
() "हमने अपने पिवेश को पैनी दृषटसे देखने और बुद्दसे सोचने के प्रयासमें बहुत समय लगाया है"

मिलकर करें मिलान
इस लोककथा मेंसे चुनकर कुछ वाक्य नीचे स्तंभ में दिए गए हैं उनके भाव या अर्थ से मिलते-जुलते वाक्य स्तंभ 2 में दिए गए है स्तंभ 1 के वाक्यों को स्तंभ 2 के उपयु्त वाक्यो से सुमेलित कीजिए
| स्तंभ 1 | स्तंभ 2 | |
| 1. कुछ समय पश्चात् पिता चल बसे। | 2. थोड़े समय के बाद पिता का देहांत हो गया। | |
| 2. हम कहीं भी क्यों न हों, भूखे नहीं मरेंगे। | 5. हम चाहे जहाँ भी हों, हमें खाने के लिए कुछ न कुछ मिल ही जाएगा। | |
| 3. घुड़सवार ने तीनों भाइयों को शंका की दृष्टि से देखा। | 1. घोड़े पर सवार व्यक्ति ने तीनों भाइयों को अविश्वास से देखा। | |
| 4. बचपन से ही हमें ऐसी आदत पड़ गई है कि हम कुछ भी अपनी दृष्टि से नहीं चूकने देते। | 4. बचपन से ही हमें आदत हो गई है कि हम हर छोटी-बड़ी वस्तु पर ध्यान अवश्य देते हैं। | |
| 5. लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था। | 3. लोग इतने अचंभित थे कि उनका आश्चर्य व्यक्त करना कठिन था। | |
| लोगों के आश्चर्य का कोई ठिकाना न था। | 5. हम चाहे जहाँ भी हों, हमें खाने के लिए कुछ न कुछ मिल ही जाएगा। |
सोच-विचार के लिए
लोककथा को एक बार फिर ध्यान से पढिए पता लगाइए और लिखिए (क) तीों भाइयों ने बना ऊँंट को दे उसके विषय ें कैसे बता दिया था?
(ख) आपके अनुसार इस लोककथा में सबसे अधिक महत्व किस बात को दिया गया है तार्किक सोच, अवलोकन या सत्यवादिता? लोककथा के आधार पर समझाइए।
(ग) लोककथा में राजा ने पहले भाइयों पर संदेह किया लेकिन बाद में उन्हे निदोष माना। राजा की सोच क्यों बदल गई?
(घ) ऊँंट के स्वामी ने भाइयो पर तुरंत संदेह क्यों किया? आपके विचार से उसे क्या करना चाहिए था जिससे उसे अपना ऊँंट मिल जाता?
(ड) पिता ने ेटों को "दूसर प्रकार का धन" संचित करने की सलाह क्यों दी? इससे पिता के बारे में क्या-क्या पता चलता है?
(च) राजा ने भाइयों की परीकषा लेने के लिए पेटी का उपयोग किया। इस परीक्षा से राजा के व्यक्तत्व और निर्णय शैली के बर में क्या-क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?
(छ) आप इस लोककथा के भाइयों की किस विशेषता को अपनाना चाहेंगे और क्यों?
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए
(क) यदि राजा ने बिना जाँच के भाइयों को दोषी ठहरा दिया होता तो इस लोककथा का क्या परिणाम होता?
(ख) यदि भाइयो ने अनार के बार में सही अनुमान न लगाया होता तो लोककथा का अंत किस प्रकार होता? अपने विचार व्यक्त करें।
() लोककथा में यद तीों भाई ऊँंट को खोजने जाते तो उ्हेंकौन-कौन सी कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता था?
(घ) यदि राजा के स्थान पर आप होते तो भाइयों की परीक्षा लेने के लिए किस प्रकार के सवाल या गतिविधियाँ करते? अपनी कल्पना साझञा करें। O

शब्द से जुड़े शब्द
नीचे दिए गए रि्त स्थानो में बुद्ि से जु़ेशब्द अने सू में च्चा करके लिखिए
लोककथा के लिखित रूप में आने से पहले कहानियों का प्रचलन मौखिक रूपमे ही पीढ़ी-दर-पीढ़ी चलता था। इसमें कहानी सुनने-सुनाने और याद रखने की महत्वपर्ण भूमिका होती थी कहानी कहने या सुनाने वाला इस तरह से कहानी सुनाता था कि सुनने वालों को रोचक लगे। इसमें कहानी सुने वालों को आनंद तो आता ही था, कथा उन्हे याद भी हो जाती थी।

अब आप अपने समूह के साथ मिलकर इस लोककथा को रोचक ढंग से सुनाइए लोककथा को प्रभावशाली और रोचक रूप में सुनाने के लिए नीचे कुछ सुझा दिए गए हैं जो लोककथा को और भी आकर्षक बना सकते है—
कथा सुनाना
स्वर में उतार-चढ़ाव- लोककथा सुनाते समय स्रमे या आवाज में उतार-चढ़ाव से उत्साह और रहस्य का निम्माण करें जब लोककथा में कोई रोमांचक या रहस्यमय पल हो तो स्वर धीमा या तीत्र कर सकते हैं। भावनाओं की अभिव्यक्ति भावनाओं को प्रकट करने के लिए स्वर का सही चयन करें जैसेखुशी, दुख, आ्च्य आदि कोस्वर केमाध्यमसे द्ाए लोककथा के पत्ों के लिए अलग-अलग स्वर- जब लोककथा में अलग-अलग पात्र हों तो हर पात्र के लिए अलग स्वर (ऊँंचा, नीचा, तेज, धीमा आदि) का उपयोग किया जा सकता है ताकि उन्हें पहचाना जा सके
0 हाथों और शरीर का उपयोग—जब आप लोककथा में किसी घटना का वर्णन के तब शारीरिक मुद्राओं और चेहे के भावों का उपयोग किया जा सकता है। हास्य का प्रयोगजब कोई हास्यपूरण या आनंददायक दृश्य हो तो चेहे की मुसकान और हँसी के साथ उसे प्र्तुत कें। विवरणात्मक भाषा का उपयोगलोककथा मे वर्ि स्ानों और पातरो को इस प्र प्रस्त करें किश्रोता उनकी छवि अपने मन में बना सकें रोचक मोडड़़ एक-दो बार लोककथा के रोमांचक मोड़ों पर थोड़ी देर के लिए रुके या शोताओं में उन्सुकत होन दंजैसे"क्या आप जानना चाहते हैं कि आग क्य हुआ?"
0 संवादों को स्पष्ट और प्रासंगिक बनाना-— पात्रो के संवा इस तरह सेप्रसतुत कें कि वे मौलिक लगे।
कारक
नीचे दिए गए वाक्य को ध्यान से पढ़िए "भाइयों जवाब दिया"
यह वाक्य कुछ अटपटा लग रहा हैन? अब नीचे दिए गए वाक्य को पढिए
"्भाइयों ने जवाब दिया।"
इन दोनों वाक्यो में अंतर समझ में आया? बिलकुल सही पहचाना आपने! दूसरे वाक्य में ने' शब्द 'भाइयों और 'जवाब दिया के बीच संबंध को जोड़़ रहा है संज्ा या स्वनाम के साथ प्रयुक्त होने वाले शब्दों े ऐसेरूपों को कारक या परसर्ग कहते हैं कारक शब्दों के कुछ उदाहरण निम्मलिखित हैं
ने, को, पर, से, केद्ारा, का, मं, के लिए की, के, हे हो, अरे
नीचे दिए गए वाक्यो में कारक लिखकर इन्ेंपूरा कीजिए-
1."हमने तो तुम्हरे ऊंट देखा तक नहीं', भाइयों ंपरेशान होते हुए कहा।
2. "मैं अपने रेवड़ों पहाड़ों लिये जा रहा था', उसने कहा, "और मेरी पतनी मेरे छोटे-से बेटे साथ एक बड़े-से ऊंट मेरे पीछे-पीछे आ रही थी।"
3. राजा उसी समय अपने मंत्री बुलाया और उसके कान कुछ फुसफुसाया।
4.यह सुनकर राजा पेटी पास लाने आदेश दिया सेवकों तुरंत आदेश पूरा किया। राजा सेवकों पेटी खोलने लिए कहा।
सूचनापत्र
कल्पना कीजिए कि आप इस लोककथा के वह घुड़सवार है जिसका ऊँंट खो गया है। आप अपने ऊंट को खोजने के लिए एक सूचना कागज पर लिखकर परे शहर में जगह-जगह चिपकाना चाहते हैं। अपनी कल्पना और लोककथा में दी गई जानकारी के आधार पर एक सूचनापत्र लिखिए।
सूचनापत्र

पाठ से आगे
आपकी बात
लोककथा में तीन भाइयों की पैनी दृष्ट की बात कही गई है। क्या आपने कभी अपनी पैनी दृष्ट का प्रयोग किसी समस्या को हल करने के लिए किया है? उस समस्या और आपके द्वारा दिए गए हल के विषय में लिखिए।
लोककथा में बताया गया है कि भाइयों ने "बचपन से हर वस्तु पर ध्यान देने की आदत डाली।" यदि आपने ऐसा किया है तो आपको अपने जीवन में इसके क्या-क्या लाभ मिलते हैं?

लोककथा में भाइयों को यात्रा करते समय अनेक कठिनाइयाँ आई, जैसे— भूख, थकान और पैरों में छाले। आप अपने दैनिक जीवन में किन-किन कठिनाइयों का सामना करते हैं? लिखिए।
भाइयों ने बिना देखे ही ऊंट के बार में सही-सही बातें बताईं क्या आपको लगता है कि अनुभव और समझ से देखे बिना भी सही निरणिय लिया जा सकता है? क्या आपने भी कभी ऐसा किया है?
जब ऊँंट के स्वामी ने भाइयों पर शंका की तो भाइयो ने बिना गुस्सा किए शांति से उतर दिया। क्या आपको लगता है कि कभी किसी को संदेह होने पर हमें भी शांत रहकर उत्तर देना चाहिए? क्या आपने कभी ऐसी स्थिति का सामना किया है? ऐसे में आपने क्या किया?
6राजा ने भाइयों की बुद्धिमानी देखकर बहुत आश्चर्य व्यक्त किया। क्या आपको कभी किसी की सोच समझ या किसी विशेष कौशल को देखकर आश्चर्य हुआ है? क्या आपने कभी किसी से कुछ ऐसा सीखा है जो आपके लिए बिलकुल नया और चौंकाने वाला हो?
लोककथा में पिता ने अपने बेटों को यह सलाह दी कि वे समझ और ज़ान जमा करें क्या आपको कभी किसी बड़ व्यक्त से ऐसी कोई सलाह मिली है जो आपके जीवन में उपयोगी रही हो? क्या आप भी अपने अनुभव से किसी को ऐसी सलाह देंग?
भाइयों ने अपने ऊपर लगे आरोपों के होते हुए भी सदा सच्चाई का साथ दिया। क्या आपको लगता हैकि सदा सच बोलना महत्वपूर् है, भले ही स्थिति कठिन क्यों न हो? क्या आपको किसी समय ऐसा लगा है कि आपकी सच्चाई ने आपको समस्याओं से बाहर निकाला हो?
ध्यान से देखना-सुनना-अनुभव करना
"बचपन से ही हमे ऐसी आदत पड़ गई है कि हम किसी वस्तु को अपनी ृष्टसे नहीं चूकन दे हमने वस्तुओ को पैनी दृष्ट से देखने और बुद्द से सोचनेके प्यास में बहुत समय लगाया है"
इस लोककथा में तीनों भाई आसपास की प्रत्येक घटना, वस्तु आदि को ध्या से देखते, सुनते, सूँते और अनुभव करते हैं अर्थात अपनी जानेद्रिों और बुद्धि का पूरा उपयोग करते है जानेद्ियाँपाँच होत हैं—आँख, कान, नाक, जीभ और त्वचा। आँख से देखकर, कान से सुनकर, नाक से सँघकर, जीभ से चखकर और त्वचा
से स्पर्श करके हम किसी वस्तु के विषय में ज़ान प्रापत करते हैं आइए, अब एक खेल खेलते हैं जिसमें आपको अपनी जानेद्रियों और बुद्दि का उपयोग करने के अवसर मिलेंगे।
) हा' या नहीं प्रशन-उत्तर खेल
चरण—
एक विद्ाथी क्षा से बाहर जाकर दिखाई दे वाली किसी एक वस्तु या स्थान का नाम चुनगा क्षा के भीतर से भी कोई नाम चुना जा सकता है।
2.विद्या्थी वापस क्षा मे आएगा और उस नाम को एक कागज पर लिख लेगा लेकिन ध्यान रहे, वह कागज पर लिखे नाम को किसी को न दिखाए।
.अन्य विद्ार्ी बारी-बारीसे उस व्तु का नाम पता करने के लिए प्रश पूछेंगे प्र्ये प्शन का उत्तर केवल 'हाँ या नहीं ें दिया जाएगा।
उदाहरण के लिए—
• क्या इस वस्तु का उपयोग कक्षा में होता है? • क्या यह खाने-पीने की चीज है? क्या यह लकड़ी से बनी है? • क्या यह बिजली से चलती है?

सभी विद्याथी अधिकतम 20 प्रशन ही पूछ सकते है इसलिए उन्हें सोच-समझक प्रन पूछने हों ताकि वे उस वस्तु का नाम पता कर सकें।
6यदि 20 प्रश्नो के अंदर विद्या्थी वस्तु का सही अनुमान लगा लेते हैंतो वे जीत जाएँगे।
7अब दूसरे विद्ा्ी को बाहर भेजकर गतिविधि दोहराएँगे।
8.गतिविधि के अं मे सभी मिलकर इस खेल से जुड़े अपने अनुभवों के बरे में चर्च कें (ख) गतिविधि स्पर्श, गंध और स्वाद से पहचानना'
- एक थैले या डिन्बेमें (सावधानीपूर्वक एवं सुरक्षित) विभि्न वस्तुए (जैसे— फल, फूल, मसाले, खिलौने, कपड़, किताब, गुड़ आदि) खें
.विद्ार्थियों को आँखों पर पटी बाँधकर केवल स्परश, गंध या स्वाद का उपयोग करके वस्तु की पहचान करनी होगी और उसका नाम बताना होगा।
- बारी-बार सेप्त्ये विद्याथी को बुलाकर उसकी आँखो पर पट्टी बँें। .उसे डिब्बेसे एक वस्तु दी जाए विद्ाथी उसे छूकर, सूँघकर, चखकर पहचानेका प्रयास केंगे .सही पहचान करने के बाद विद्ाथी बताएँे क उन्होने उस वस्तु क कैसे पहचाना।
6.एक-एक करके सभी विद्ार्थियों को अलग-अलग वस्तुओं को पहचानने का अवसर मिलेगा। .अंत मे सभी वस्तुओं को कषामे दिखाएँ और उनके बार में च्चा केंकि किस वस्तु को पहचानना आसान या कठिन लगा।
आज की पहेली
आपने पढ़ा कि तीनों बुद्धिमान भाई किस प्रकार अपने अवलोकन से वे बातें भी जान जाते थे जो अन्य लोग नहीं जान पाते। अब आपके सामने कुछ पहेलियाँ प्रसत हैं जहाँ आपको कुछ संकेत दिए जाएँगे। संकेतों के आधार पर आपको उत्तर खोजने है—

1. कौन है यह प्राणी?
इसकी लंबी पूछ होती है जो पेड़ों की शाखाओं के चारों ओर लिपटी रहती है। 2 इसका मुख्य आहार कीट और छोटे जीव होतेहैंजन्हें यह चुपके से पक़ता है। 3 यह प्राणी अपने परवेश में घुल-मिल जाता है और अपनी रंगत को बदल सकता है। इसके पास तेज आँखें होती हैं जो चारों दिशाओं में देख सकती हैं। 4.
2 रंगीन डिलब्बे
एक मेज पर चार रंगीन डिन्बे बराबर-बराबर रखे हैंलाल, हरा, नीला और पीला बताइए पीले डिब्बे के बराबर में कौन-सा डिब्बा है? यदि
लाल डिब्बा नीले डिब्बे के पास है। 2 हरा डिब्बा पीले डिब्बे के पास नहीं है 3. पीला डिब्बा लाल डिनब्बे के पास नहीं है। 4हरा डिब्बा लाल डिन्े के पास है।
खोजबीन के लिए
नीचे दिए गए लिक का प्रयोग करके आप बहुत-सी अन्य लोककथाएँ देख-सुन सकते हैं
• सुनो लोककथा
https://www.youtube.com/watch?v=JEti31XNpmA • दुनिया की छत
https://www.youtube.com/watch? $\fallingdotseq$ PehlQ71udFg • भूल चूक लेनी देनी
https://www.youtube.com/watch?v=GjYW-CZIDeA