एक आशीर्वाद
जा,
ेरे स्वप्न बड़े हों
भावना की गोद से उतरकर
जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें
चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए
रूठना-मचलना सीखें
हसें
मुसकराएँ
गाएँ
हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ
उंगली जलाएँ
अपने पाँवों पर खड़े हो।
जा,
ेरे स्वप्न बड़े हों।
—दुष्यंत कुमार
लेखक से परिचय
दुषंत कुमार हिदी के लोकप्य चनारोंेंसे ए है इनका जनम बिजनौर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था बहुत कम समय में ही इन्होने हिंदी साहित्य को
विविधतापूर्ण रचनाओं एवं जीवंत भाषा से समृद् किया। साये मेंधूप इनका सवाधिक चर्चत गजल संग्ह है। इनका संपूरण रचना-संसार दुषयंत कुमार रचनावली चार खंडों ें प्रकाशित है।

(1933–1975)
पाठ से
आइए, अब हम इस कविता को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं। नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार् में आपकी सहायता करेंगी।
मेरी समझ से
(क) निम्लिखित प्रनोंके उपयु्त उत्तरके सम्मुख तारा () बनाइए कुछ प्र्नोंके एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
1कविता में किसे संबोधित किया गया है?
• युवा वर्ग को 0 नागरिकों को • बच्चों को 0 श्रमिकों को
."तरे स्वपन बड़े हो' पंक्तमें 'स्वप्न' से क्या आशय है?
कल्पना की उड़ान भरना 0 आकाक्षएँ और रचियाँ खना बहुत-सी उपलब्धियाँ पाना ब़ लक्ष्य निधारित करना

- "उगली जलाए" पंक्त में उंगली जलाने का भाव है
0 चुनौतियों को स्वीकार करना प्रकाश का प्रसार करना अन्न के ताप का अनुभव करना कष्टों से नहीं घबराना
4."अपने पाँवों पर खड़े हों" पंक्त से क्या आशय है?
अपने पैरों पर खड़े होना सफलता प्राप्त करना कठिनाइयों का सामना करना 0 आत्मनिरभिर होना

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चने हों अपने मि्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तरही क्यों चुने?
मिलकर करे मिलान
कविता मे से चुनकर कुछ पंक्तिया स्तंभ 1 में दी गई हैं उन पंक्तियों के भाव या संदर् स्तंभ 2 में दिए गए हैं पंक्तियों को उनके सही भाव अथवा संदरभों से मिलाइए।
| क्रम | स्तंभ 1 | स्तंभ २ |
| 1. | भावना की गोद से उतरकर जल्द पृथ्वी चलना सीखें be | विविध जञान के प्रति आकृष्ट होना और उसे पाने की 1. ललक होना |
| 2. | हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ | सपनों को आनंद और मुस्कुराहटों में बदलें कठिन 2. परिस्थितियों में भी मनोबल बनाए रखें। |
| 3. | चाँद-तारों-सी अप्राप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें | 3. भावनाओं में न बहकर वास्तविकता का सामना करना |
| 4. | ..हसे/मसकराएंगाएँ | 4. असंभव से लगने वाले लक्ष्यों के लिए हठ और प्रयास करना |
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं इन्हे ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए
(क) "जा, ेरे स्वपन बड़े हों"
(ख) "जल्द पृथ्वी पर चलना सीखें"
(ग) "चाद-तारों-सी अप्ाप्य सच्चाइयों के लिए रूठना-मचलना सीखें"
D 1
अनुमान और कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए
(क) कविता में सपनो के बड़ होने की बात की गई है आपके अनुसार बड़ सपने कौन-कौन से हो सकते हैं और क्यो?
(ख) "हर दीये की रोशनी देखकर ललचाएँ/उंगली जलाएँ" पंक्त में सपनों और लक्षयों को पूरा करने के लिए ललक की बात की गई है ललक के साथ और क्या-क्या होना आवश्यक है और क्यों? (संकेत— योजना, प्रयास आदि)
(ग) कल्पना कीजिए कि आपका सपना ही आपका मित्रहै आपको उससे बातचीत करनी हो तो क्या बात करेंगे?
(घ) यदि आप किसी को आशीवाद देना चाहते हों तो आप किसे और क्या आशीवाद देंगे और क्यों?
कविता की रचना
इस कविता में सपने को मनुष्य की तरह हँसते, मुसकराते, गाते हुए बताया गया है। ध्यान से देखें तो इस कविता में इस प्रकार की अन्य विशेषताएँ भी दिखाई देगी। उन्हें लिखिए और कक्षा में उन पर चर्चा कीजिए।
सृजन
इस कविता के आरंभ में एक ही संजा शब्द है 'स्वप्न। इस शब्द को केंद्में रखते हुए अनेक क्रिया शब्दों का ताना-बाना बुना गया है, जैसे—चलना, रूठना, मचलना, सीखना, हँसना, मुस्कुराना, गाना, ललचाना और इस प्रकार कवितापरी हो जाती है आप भी किसी एक संजाशब्द के साथ विभिन क्रिया शब्दों ा प्रयोग करते हए अपनी कविता बनाकर कक्ष में सुनाइए
उदाहरण के लिए बादल को धिरते देखा है, गरजते देखा है, बरसते देखा है,
कविता का शीर्षक
इस कविता का शीर्षक 'एक आशीव्ाद' है जो कविता में कहीं भी प्रुक्त नहीं हुआ है। यदि इस कविता की ही किसी पंक्त या शब्द को कविता का शीर्षक बनाना हो तो आप कौन-सी पंक्त या शब्द चुनेंगे और क्यों?
भाषा की बात
(क) नीचे दिए गए रिक्त स्थानोंमें स्वप्न' से जु़े शब्द अपने समू में चर्ा करके लिखिए

(ख) कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं और उनके सामने कुछ अन्य शब्द भी दिए गए है। उन शब्दों पर घेरा बनाइए जो समान अर्थ न देते हों
| शब्द | अन्य शब्द | ||
| पृश्वी | धरा वसुधा | अवनि | सुता |
| चाँद | मधुकर शशि | निशाकर | मयंक |
| तरे | सोम नक्षत्र | तारक | उडगण |
| रोशनी | लालिमा प्रकाश | उजाला | आलोक |
| स्वप्न | सपना इच्छा | यथार्थ | कल्पना |
| दीया | दीन ज्योति | दीपक | प्रदीप |
आना-जाना
आना' और 'जाना' दो महत्वपूर्ण क्रयाएँ हैं क्षा में दो समूह बनाइए। एक समूह का नाम 'आना' और दूसे समूह का नाम 'जाना' होगा अब अपने-अपने समू में इन दोनों क्रियाओं का प्रयोग करते हुए सार्थक वाक्य बनाइए और न्हें चाट पेपर पर चिपकाकर अपनी ककषा में लगाइए
डायरी
हंसें-मुसकराएँ-गाएँ
अपने किसी एक दिन की समस्त गतिविधियों पर ध्यान दीजिए और अपनी डायरी में लिखिए किा आप दिनभर में कब-कब हसे, कब-कब मुसकराए, कब-कब गाए, कब-कब रूठे, कब-कब मचले?

पाठ से आगे
आपकी बात
(क) कविता के माध्यम से बड़े लक्ष्य निधारित करने और उन्हे पूरा करने का आशीवाद दिया गया ह। दिन-प्रतिदिन के जीवन में आपको अपने माता-पिता, अध्यापक एवं परिजनों से किस तरह के आशीर्वाद मिलते हैं? अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।
(ख) आप भी अपने से छोटों केप्रति किसी न किसी प्रकार से शुभेच्छ प्रकट करते हैं उ्हे लिखिए।
सपनों की बातें
(क) आप क्या करना चाहते हैं और क्या पाना चाहते हैं? न्हे एक परची पर लिखें परची पर अपना नाम लिखना आवश्यक नहीं है। अपने अध्यापक द्वारा लाए गए डिब्े में अपनी-अपनी परची को डाल दे। अध्यापक एक-एक करके इन परचियों पर लिखे सपनों को पढ़कर सुनाएँ सभी विद्ा्थी अपने-अपने सुझाव दे कि उन सपनों को पूरा करने के लिए
• किस तरह के प्रयल करने होग?
0 किस तरह से योजना बनानी होगी?
किससे और किस प्रकार का सहयोग लिया जा सकता है? लक्ष्यप्राप्ति मे संभावित चुनौतियाँ कौन-कौन सी हो सकती हैं?

हमारे र सपने
आपके माता-पिता या अभिभावक आपकी आवश्यकताओं और इच्छाओं को जानते-समझते हैं वे उन्हे पूरा करने के लिए यथासंभव प्रयत्न करते हैं अपने माता-पिता या अभिभावक से उनके द्वारा देखे गए सपने और इच्छाओं के बारे में पूछिए कि वे क्या-क्या करना चाहते थे या चाहते हैं? नीचे दी गई तालिका में उन सपनों को लिखिए। आप इस तालिका को और बढ़ा सकते हैं।

| घर के सदस्यों के सपने | |
| माता | |
| पिता | |
| दादा | |
| दादी | |
| नाना | |
| नानी | |
| बहन | |
| भाई |
सबके सपने
प्रतिदन की आवश्यकताओं को पूरा करनेमें बहुत-से लोग सहयोग देते हैं जैसे—शाक विक्रेता, स्वच्छताक्मी, रिक्शाचालक, सुरक्षाकमी आदिा इनमे से किसी एक से साक्षात्कार कीजिए और उनके सपनों के विषय में जानिए। साक्षात्कार के समय कौन-कौन से प्रशन हो सकतेहै? उनकी एक सूची भी बनाइए।
झरोखे से
आपने पढ़ा कि 'एक आशीवाद' कविता में सपनों के बड़े होने की बात की गई है। अब आप पढिए सु्रसिद्ध वैज्ञानिक और भारत के पूर्व रष्ट्पति डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का एक प्रेक उदबोधन जिसमे वे न केवल सपने देखने की बात करते हैं बल्क सपनों को पूरा करने की योजना और प्रक्रया के विषय में भी बताते हैं—

सपनों की उड़ान
सपने वह नहीं होते जो आप नींद मं देखते हैं सपने वह होते हैंज आपको सोनेनहींदेत अपने सपने पूरे करने के लिए आपको जागते रहना होता है, पूरी तरह आँखें खोलकर जागते रहना होता है। आज जितनी संभावनाएँहैं उतनी अब तक के समूचे इतिहास में पहले कभी नहीं थीं इक्कीसवीं सदी ऐसे अनुभव पैदा कर रही है जि्हें मानव के विकास की पिछली बीस शताब्दयोंमें असंभव समझा जाता था। ऐसे माहौल में जब प्रौ्योगिकी और नित नई खोजो के बल पर मानव सभ्यता तरक्की करती जारही है, इंसान में छिपी संभावनाओं का भी तेजी से विस्तार होता जा रहा है लेकिन इन अवसरों का अनुभव करने के लिए हमारे पास जो समय है वह उतना का उतना ही है और आज के युवा इसी दुविधा मे हैं युवा चाहते हैं कि उनके सामने जितने किस्म के अनुभव उपलब्ध हैं वह सबका फायदा उठा सके, जो कि उन्हें मिलना भी चाहिए लेकिन जैसे-जैसे दुनिया का दायरा बढ़ता जा रहा है, वैे-वैसे हमें खुद को कुछ खास विषयों के संकरे दायरे में सीमित कर लेना पड़रह है मुझेनहींलगता कि ऐसा करना सही है मेरा सपन है कि संसार के हर युवा को संसार के वह सारे अनुभव मिल सके जिसकी उ्हें चाह हो लेकिन इसे कैसे संभव बनाया जा सकता है?
इसे संभव बनाने के दो तरीके हैं एक तो यह कि हम कुछ ऐसा कें कि हमरे पास जो समय उपलब्ध है उसे हम बढ़ा सके दूसरा यह कि हमारे पास जो समय है हम उतने ही समय में जितना काम कर सकते हैं जितना कुछ हासिल कर सकते है उसकी मात्ा बढ़ा दें इन दोनों जीवन-लक्यों को कैे ्रपत किया जाए, यह समझ ले से दूसरी हर चीज तक पहुँने के दरवाजे खुद-ब-खुद खुल जाएंगे। यही वह लंबी छलांग है जिसका मानवता को अब तक इंतजार था और जो हमें विकास क्रम के अगले चरण तक पहुँचा सकती है।
डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम
साझी समझ
आपने 'एक आशीवाद' कविता पढ़ी और डॉ. एपी.जे. अब्दुल कलाम का उपर्यक्त उद्बोधन भी पढ़ा। अब आप इन दोनों पर क्षा में अपने साथियों के साथ चर्चा कीजिए
खोजबीन के लिए
कला, विज्ञान, राजनीति, खेलकृद, मनोरंजन आदि क्षत्रो में ख्यात प्रप्त करने वाले व्यक्तियों ने अपने-अपने सपनों को पूरा करने की संघर्ष यात्ा के बारे में लिखा है। उन्होने अपने सपनों को साकार करने के लिए किस तरह से योजना बनाई, क्या-क्या संघर्ष किए? पुस्तकालय अथवा इंटरनेट की सहायता से ऐसे व्यक्तयों के बारे में पढ़िए