Kabir ke Dohe - CBSE Class 8 Hindi Notes

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Chapter Study Guide & Summary

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Key Concepts & Syllabus Topics

Important Definitions & Terminology

Kabir ke Dohe Overview
The central theme and foundational concept covered in Class 8 Hindi Chapter 5, emphasizing conceptual clarity, NCERT curriculum alignment, and exam readiness.
NCERT Curriculum Alignment
Structured study material adhering strictly to CBSE board guidelines, learning objectives, and standardized assessment criteria for Class 8.
Active Recall & Revision
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Quick Revision & Key Points

Full NCERT Chapter: Kabir ke Dohe

(5) कबीर के दोहे*

साँच बराबर तप नहीं झूठ बराबर पाप। जाके हिदे साँच है, ता हिदे गु आप॥ बड़ा हुआ तो क्य हुआ, जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं, फल लागैे अत दूरा। गुरु गोविंद दोऊ खड़, काके लागों पाँय। बलहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताय।
अति का भला न बोलना, अति का भला न चूपा
अति का भला न बरसना, अति की भली न धूप॥ ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोया औरन को सीतल करे, आपहुं सीतल होय॥ निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाया बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करै सुभाय॥ साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय। सार सार को गहि रहै, थोथा देई उड़ाय॥ कबिरा मन पंछी भया, भाँवै तहवाँ जाय। जो जैसी संगत कर, सो तैसा फल पाय॥ —कर्ब

संदर्भकबीर वचनावली, संपादक अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध

कवि से परिचय

एक ऐसे संत जो करघे पर कपड़ा और मन में कविता बुनते-बुनते इतनेप्रसिद् हो गए कि उनकी कविताएँ आज भी लोग भजनों की तरह सुनते हैं और पाठ्यपुस्तकोंमें

पद़ाते है माना जाता है कि कबीर का जन्म चौदहवीं शताब्दी में काशी में हुआ था उनकी रचनाएँ मुख्यत: कबीर ग्रथावलीमेंगृहीतहैं आज भी उनकी रचनाएँहें जीवन की सच्चाई को समझने और अच्छा मनु्य बनने की प्रेणा देती हैं

पाठ से

आइए, अब हम इन दोहों को थोड़ा और विस्तार से समझते हैं नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार्य में आपकी सहायता करेंगी।

मेरी समझ से

(क) निनम्नलिखित प्र्नोंके उपयुक्तउत्त के सम्मुख तार () बनाइए। कुछ प्र्नोंके एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।

(1) "गुरुगोविंद दोऊ ख़ काके लागों पाय बलिहारी गु आपने गोविद दियो बताय।" इस दोहे में किसके विषय में बताया गया है?

0 श्रम का महत्व 0 गुरु का महत्व जञान का महत्व भक्ति का महत्व

(2) "अति का भला न बोलना अति का भला न चूपा। अति का भला न बरसना अति की भली न धूप।" इस दोहे का मूल संदेश क्या है?

. हमेशा चुप रहने में ही हमारी भलाई है बारिश और धूप से बचना चाहिए हर परिस्थिति में संतुलन होना आवश्यक है

(3) "बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर। पंथी को छाया नहीं फल लागै अति दूर।" यह दोहा किस जीवन कौशल को विकसित करने पर बल देता है?

0 समय का सदुपयोग करना दूसरों के काम आना परश्रम और लगन से काम करना सभी के प्रति उदार रहना

(4) "ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोया औरन को सीतल करे आपहुं सीतल होया।" इस दोहे के अनुसार मधुर वाणी बोलने का सबसे बड़ा लाभ क्या है?

0 लोग हमारी प्रशंसा और सम्मान करने लगते हैं दसरों और स्वयं को मानसिक शांति मिलती है किसी से विवाद होने पर उसमें जीत हासिल होती है सुनने वालों का मन इधर-उधर भटकने लगता है (5) "साँच बराबर तप नहीं झठ बराबर पापा जाके हिरदे साँच है ता हिरदे गुरु आपा॥" इस दोहे से क्या निष्कर्ष निकाला जा सकता है?

0 सत्य और झठ में कोई अंतर नहीं होता है सत्य का पालन करना किसी साधना से कम नहीं है बाहरी परिस्थितियाँ ही जीवन में सफलता तय करती हैं • सत्य महत्वपूर्ण जीवन मूल्य है जिससे हृदय प्रकाशित होता है (6) निंदक नियरे राखिए आँगन कुटी छवाय। बिन पानी साबुन बिना निर्मल करै सुभाय।" यहॉँ जीवन में किस दृष्टकोण को अपनाने की सलाह दी गई है?

आलोचना से बचना चाहिए आलोचकों को दूर रखना चाहिए आलोचकों को पास रखना चाहिए आलोचकों की निंदा करनी चाहिए (7) "साधू ऐसा चाहिए जैसा सूप सुभाय। सार-सार को गहि रहै थोथा देइ उड़ाया।" इस दोहे में 'सूप' किसका प्रतीक है?

मन की कल्पनाओं का • सुख-सुविधाओं का विवेक और सूझबूझ का 0 कठोर और क्रोधी स्वभाव का

(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियों ने अलग-अलग उत्तर चुने हों अपने ित्रो के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्तर ही क्यं चन?

मिलकर करे मिलान

(क) पाठ से चुनकर कुछ पंक्तयाँ नीचे स्तंभ 1 में दी गई हैं अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें स्तंभ 2 में दिए गए इनके सही अर्थ या संदर्भ से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

क्रमस्तंभ 1स्तंभ २
1.गुरु गोविद दोऊ खड़, काके लागों पाय1. सत्य का पालन कठिन है और झूठ पाप के समान है।
2.अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।2. बड़ा होने के साथ व्यक्त को उदार भी होना चाहिए।
3.ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।3. गुरु शिष्य का मार्गदर्शन करते हैं और शिष्य गुरु का आदर करते है।
4.निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।x. मन को नियंत्रित करना और सही दिशा में ले जाना महत्वपूर्ण है।
5.साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।जीवन में संतुलन महत्वपूर्ण है।
6.कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।हमें मधुर वाणी बोलनी चाहिए जिससे मन को शांति प्राप्त हो सकेा
विवेकशील व्यक्ति को अच्छे और बुरे की पहचान होती है।
8.बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूरा8. आलोचकों को अपने पास रखना चाहिए। वे हमें हमारी गलतियाँ बताते हैं।

(ख) नीचे स्तंभ में दी गई दोहों की पसक्तियों को स्तंभ में दी गई उपयुक्तपंक्तियों से जोडिए

क्रमस्तंभ 1स्तंभ २
1.गुर गोविंद दोऊ खड़, काके लागों पाँय।1. बिन पानी साबुन बिना, निर्मल करे सुभाय॥
2.अति का भला न बोलना, अति का भला न चूप।2. औरन को सीतल करै, आपहुं सीतल होय॥
3.ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोय।3. जाके हिरदे साँच है, ता हिरदे गुरु आप
4.निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।4. सार सार को गह रहै, थोथा देई उड़ाय॥
5.साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाय।5. पथी को छाया नहीं, फल लागै अति दूर।।
6.कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।6. अति का भला न बरसना, अति की भली न धूपा॥
7.बड़ा हुआ तो क्य हुआ, जैसे पेड़ खजूर7. जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाय॥
8.साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।8. बलहारी गुरु आपने, गोविंद दियो बताया॥

पक्तियों पर चर्चा

पाठ से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई है इन्ें ध्यानपूर्वक पढिए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार

अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए

(क) "कबिरा मन पंछी भया भावै तहवाँ जाय। जो जैसी संगति करै सो तैसा फल पाय"
(ख)"साँच बराबर तप नहीं झठ बराबर पाप। जाके हिरदे साँच है ता हिरदे गु आप॥"

सोच-विचार के लिए

पाठ को पुनः ध्यान से पढिए, पता लगाइए और लिखिए

(क) "गुरु गोगविद दोऊ खड़े काके लागों पाया" इस दोहेमें गु को गोविंद (ईखर) से भी ऊपर स्था दिया गया है। क्या आप इससे सहमत हैं? अपने विचार लिखिए।
(ख) "बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर।" इस दोहे में कहा गया है कि सिरफ बड़ा या संप्न होना ही प्याप्त नहीं है। ब़ या संपन्न होने के साथ-साथ मनु्य में और कौन-कौन सी विशेषताएँ होनी चाहिए? अपने विचार साझा कीजिए।
(ग) "ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोया" क्या आप मानते हैं कि शबदों का प्रभाव केवल दूसरों पर ही

नहीं स्वयं पर भी पड़ता है? आपके बोले गए शब्दों ने आपके या किसी अन्य के स्वभाव या मनोदशा को कैसे परिवर्तित किया? उदाहरण सहित बताइए

"जो जैसी संगति कर सो तैसा फल पाय॥" हमारे विचारों और कायो पर संगति का क्या प्रभाव पड़ता है? उदाहरण सहित बताइए

दोहे की रचना

"अति का भला न बोलना, अति का भला न चप अति का भला न बरसना, अति की भली न धूपा॥"

इन दोनों पंक्तियों पर ध्यान दीजिए। इन दोनों पंक्तियों के दो-दो भाग दिखाई दे रहे हैं इन चारों भागों का पहला शब्द है 'अति'। इस कारण इस दोहे में एक विशेष प्रभाव उत्पन्न हो गया है। आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको ऐसी कई विशेषताएँ दिखाई देगी, जैसे— दोहों की प्रत्येक पंक्त को बोलनेमें एक-समान समय लगता है। अपने-अपने समूह में मिलकर पाठ में दिए गए दोहों की विशेषताओं की सूची बनाइए।

(क) दोहों की उन पंक्तियों को चुनकर लिखिए जिनमें

(1) एक ही अक्षर से प्रंभ होने वाले (जैसे— राजा, रस्सी, रात) दो या दो से अधिक शब्द एक साथ आए हैं।
(2) एक शब्द एक साथ दो बार आया है (जैसे बार-बार)
(3) लगभग एक जैसे शब्द, जिनमें केवल एक मात्रा भर का अंतर है(जैसे— जल, जाल) एक ही पंक्ति में आए हैं।
(4) एक ही पंक्त में विपरीतार्थक शब्दो (जैसेअच्छा-बुरा) का प्रयोग किया गया है।
(5) किसी की तुलना किसी अन्य से की गई है (जैसे दूध जैसा सफेद)
(6) किसी को कोई अन्य नाम दे दिया गया है (जैसे— मुख चं्र है
(7) किसी शब्द की वर्तनी ोड़ी अलग है (जैसे चुप' केस्ा प 'चूप)
(8) उदाहरण द्वारा कही गई बात को समझाया गया है।

(ख) अपने समू की सूची को क्षा मे सबके साथ साझा कीजिए।

अनुमान और कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए (क) "गुरु गोविंद दोऊ खड़े काके लागोौ पाँया"

• यदि आपके सामने यह स्थित होती तो आप क्या निणिय लेते और क्यों? यदि संसार में कोई गुरु या शिक्षक न होता तो क्या होता?

() "अति का भला न बोलना, अति का भला न चूपा"

• यदि कोई व्यक्त बहुत अधिक बोलता है या बहुत चुपरहताहै तो उसके जीवन पर क्य प्रभाव पड़ सकता है? यदि वर्षा आवश्यकता से अधिक या कम हो तो क्या परिणाम हो सकते हैं? • आवश्यकता से अधिक मोबाइल या मल्टीमीडिया का प्रयोग करने से क्या परिणाम हो सकते हैं?

(ग) "साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पापा"

झठ बोलने पर आपके जीवन पर क्या प्रभाव पड़ सकता है? • कल्पना कीजिए कि आपके शिक्षक ने आपके किसी गलत उत्तर के लिए अंक दे दिए है, ऐसी परिस्थिति में आप क्या करेंगे? (घ) "ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोया।"

यदि सभी मनुष्य अपनी वाणी को मधुर और शांति देने वाली बना ले तो लोगों मे क्या परिवर्तन आ सकते हैं? क्या कोई ऐसी परिस्थिति हो सकती है जहाँ कटु वचन बोलना आवश्यक हो? अनुमान लगाइए (उ) "बड़ा हुआ तो क्या हुआ, जैसे पेड़ खजूर।"

यदि कोई व्यक्त अपने ब़ होनेका अहंका खता हो तो आप इस दोहे का उपयोग करते हए उसे 'बड़े होने या संपन्न होने का क्या अर्थ बताएँगे या समझाएंगे?

• खजूर, नारियल आदि ऊँंचे वृक्ष अनुपयोगी नहीं होते हैं वे किस प्रकार से उपयोगी हो सकते
हैं? बताइए।
• आप अपनी कक्षा का क्षा नायक या नायिका (मॉनीटर) चुनने के लिए किसी विद्ार्थी की किन-किन विशेषताओं पर ध्यान देंग?

(च) "निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाय।"

• यदि कोई आपकी गलतियों को बताता रहे तो आपको उससे क्या लाभ होगा? यदि समाज में कोई भी एक-दूसे की गलतियाँ न बताए तो क्या होगा?

(छ) "साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाया"

• कल्पना कीजिए कि आपके पास 'सूप' जैसी विशेषता है तो आपके जीवन में कौन-कौन से परिवर्तन आएंगे?
• यदि हम बिना सोचे-समझे हर बात को स्वीकार कर लें तो उसका हमारे जीवन पर क्या प्रभाव पड़ेगा?

(ज) "कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाया"

• यदि मन एक पंछी की तरह उड़ सकता तो आप उसे कहाँ ले जाना चाहते और क्यों? संगति का हमारे जीवन पर क्या-क्याप्रभाव पड़ सकता है?

वाद-विवाद

"अति का भला न बोलना, अति का भला न चूपा। अति का भला न बरसना, अति की भली न धूा॥"

(क) इस दोहे का आज के समय मे क्या महत्व है? इसके बारे में कक्षा में एक वाद-विवाद गतिविधि का आयोजन कीजिए। एक समूह के साथी इसके पक् में अपने विचार प्र्तुत केंगे और दूसेसमूह के साथी इसके विपक्ष मेंबोलेंगे एक तीसरा समूह निर्णायक बन सकता है।

(ख) पक्ष और विपक्ष के समूह अपने-अपनेमत के लिए तर् प्रस्तुत करेंगे, जैसे—

• पक्ष - वाणी पर संयम रखना आवश्यक है। 0 विपक्ष - अत्यधिक चुप रहना भी उचित नहीं है। () पकष और विप्ष ें ्र्तुतकों की सूची अपनी लेखनपुस्तिका में लिख लीजिए

शब्द से जड़े शब्द

नीचे दिए गए स्थानों मेंकबीर से जुड़ शब्द पाठ में से चुनकर लिखिए और अपने मित्ों के साथ चर्चा कीजिए

दोहे और कहावतें

"कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाय।

जो जैसी संगति करै, सो तैसा फल पाया॥"

इस दोहे को पढ़कर ऐसा लगता है कि यह बात तो हमने पहले भी अनेक बार सुनी है यह दोहा इतना अधिक प्रसिद्ध और लोकप्रय है कि इसकी दूसरी पंक्त लोगोंके बीच कहावत— जैसा संग वैसा रंग' (व्यक्ति जिस संगत में रहता है, वैसा ही उसका व्यवहार और स्वभाव बन जाता है।) की तरह प्रयुक्त होती है कहावतें

ऐसे वाक्य होत हैं जिन्हें लोग अपनी बात को अधिक प्रभावशाली बनाने के लिए प्रयोग करते हैं। इसमें सामान्यत: जीवन के गहरे अनुभव को सरल और संक्ेप में बता दिया जाता है।

• अब आप ऐसी अन्य कहावतों का प्रयोग करते हुए अपने मन से कुछ वाक्य बनाकर लिखिए।

सबकी प्र प्रस्तुति

पाठ के किसी एक दोहे को चुनकर अपने समूह के साथ मिलकर भिन्न-भिन्नाप्रकार से कक्षा के सामने प्र्तुत कीजिए। उदाहरण के लिए

• गायन करना, जैसे लोकगीत शैली में।

कविता पाठ करना।

0 संगीत के साथ प्रस्तुत करना।

• अभिनय करना, जैसे एक दोस्त गुस्से ें आकर कुछ गलत कह देताहै लेकिन दूसरा दोस्त उसे समझाता है कि मधुर भाषा का कितना प्रभाव पड़ता है (ऐसी बानी बोलिए, मन का आपा खोया।)

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) "गुर गोविद दोऊ खड़े, काके लागौं पाया" क्या आपके जीवन में कोई ऐसाव्यक्त है जिसने आपको सही दिशा दिखाने में सहायता की हो? उस व्यक्त के बारे में बताइए

(ख) "निंदक नियरे राखिए, आँगन कुटी छवाया" क्या कभी किसी ने आपकी कमियों या गलतियों के विषय में बताया है जनमें आपको सुधार करने का अवसर मिला हो? उस अनुभव को साझा कीजिए

(ग) "कबिरा मन पंछी भया, भावै तहवाँ जाया" क्या आपने कभी अनुभव किया है कि आपकी संगति (जैसे मित्र) आपके विचारों और आदतों या व्यवहारों को प्रभावित करती है? अपने अनुभव साझा कीजिए।

सृजन

(क) "साँच बराबर तप नहीं, झूठ बराबर पाप।"

इस दोहे पर आधारित एक कहानी लिखिए जिसमें किसी व्यक्त ने कठिन परिस्थितियोंमें भी सत्य का साथ नहीं छोड़ा (सकेतकिसी खेल में आपकी टीमद्ारा नियमों के उल्लंघन का आपके द्वार विरोध किया जाना।)

(ख) "गुर गोविंद दोऊ खड़, काके लागो पाया।"

इस दोहे को ध्यान में खते हुए अपने किसी परणादायक शिक्षक से साक्षात्कार कीजए और उनके योगदान पर एक निबंध लिखिए।

कबीर हमारे समय में

(क) कल्पना कीजिए कि कबीर आज के समय में आ गए हैं वे आज किन-किन विषयों पर कविता लिख सकते हैं? उन विषयों की सूची बनाइए

(ख) इन विषयों पर आप भी दो-दो पंक्तियाँ लिखिए।

साइबर सुरक्षा और दोहे

नीचे दिए गए प्रनों पर क्षामें विचा-विमर्श कीजिए और साझा कीजिए

(क) "अति का भला न बोलना, अति का भला न चूपा" इंटरनेट पर अनावश्यक सूचनाएँ साझा करने के क्या-क्या संकट हो सकते हैं?
(ख) "साधू ऐसा चाहिए, जैसा सूप सुभाया" किसी भी वेबसाइट, ईमेल या मीडिया पर उपलब्ध जानकारी को 'सूप' की तरह छानने की आवश्यकता क्यो है? कैसे तय करें कि कौन-सी सूचना उपयोगी है और कौन-सी हानिकारक?

आज के समय में

नीचे कुछ घटनाएँ दी गई हैं न्हे ढ़कर आपको कबीर के कौन-से दोहे याद आते हैं घटनाओं के नीचे दिए गए रिक्त स्थान पर उन दोहों को लिखिए

अमित का मन पढ़ाई मे नहीं लगता था और वह गलत संगतिमें चला गया कुछ समय बाद जब उसके अंक कम आए तो उसे समझ में आया—"संगति का असर जीवन पर पड़ता है।"

एक विद्ाथी इंटरनेट पर लगातार सूचनाएँ खोज रहा था। उसके पिता ने कहा—"हर जानकारी सही नहीं होती, सही बातों को चुनो और बेकार छोड़ दो।"

आपका एक मित्र आपकी किसी गलत बात पर आपकी आलोचना करता है। आप पहले परेशान होते है, लेकिन फिर आपने सोचा—"आलोचना मुझे सुधरने का मौका देती है, मुझे इन बातोंका बुरा नहीं मानना चाहिए। इसे सकारात्मक रूप से लेना चाहिए"

रीमा ने अपने गुसे में सहकमी को बुरा-भला कह दिया, जिससे वातावरण बिगड़ गया बाद में उसने समझा कि अगर वह शांति से बात करती तो समस्या हल हो जाती। cher

क्षा मेंमोहन ने बहुत अधिक बोलकर सबको पेशान कर दिया जबक रमेश बिल्कुल चप रहा गुरुज ने कहा—"बोलचाल में संतुलन आवश्यक है, न अधिक बोलो, न अधिक चुप रहो"

सुरेश को जब प्तिभा सम्मान मिला तो उसने कहा—"इसमें मे परिश्रम के साथमेरे गुरुजनों का मार्गदर्शन भी सम्मिलित है" −

अपने परिजनों, ित्रो, शिक्षकों, पुस्तकालय या इंटरनेट की सहायता से कबीर के भजनो, गीतों, लोकगीतों को खोजिए और सुनिए। किसी एक गीत को अपनी लेखन-पुस्तका में लिखिए। कक्षा के सभी समूहों ्वारा एकत्रित गीतों को जोड़कर एक पुस्तका बनाइए और क्षा के पुस्तकालय मे उसे सम्मिलित कीजिए

नीचे दी गई इंटरनेट कड़ियों का प्रयोग करके आप कबीर के बारे में और जान-समझ सकते हैं

संत कबीर

https://www.yo utube.c o m/w atch? v $=$ F G M Ep P J J Qmk & t = 2 5 9 s & a b channel=NCERTOFFICIAL

कबीर वाणी

https://www.yo utube.c o m/w atc h?v $=$ U NE Iu g m w V 0 & t= 13 s & ab hannel=NCERTOFFICIAL

https ://w w w. y o utube.c 0 m/w a tc h?v =3 Qs y n Ivp 6 2 Y & t=8 s & a b channel=NCERTOFFICIAL

https://www.youtube.com/watch?v $=$ UQA8DdnqiYg & $\mathrm { t } = 1 1$ s & a b channel=NCERTOFFICIAL

https://www.youtube.com/watch?v $=$ Jh W y 6B Y v 0 s U & t= 1 55 s & a b channel=NCERTOFFICIAL

https ://w ww. y o utu be. c o m/w atc h ? v =g n U 7w - R H hy U & $\mathrm { t } = 1$ 4s & ab channel=NCERTOFFICIAL

• कबीर की साखियाँ

https://www.youtube.com/watch?v=ngF88zXnfQ0&ab_channel=NCERTOFFICIAL

• दोहे कबीर, रहीम, तुलसी

https ://www.youtube.c o m/w atc h ${ \boldsymbol { \mathbf { \mathit { \Sigma } } } } ^ { \prime } \mathbf { \Delta } \mathbf { V } = \mathbf { \vec { \Sigma } } \mathbf { C }$ nrjL C kg g r4 & $\mathbf { t } = 1$ 2s&ab channel=NCERTOFFICIAL

कदम मिलाकर चलना होगा

बाधाएँ आती हैं आएँ, घिरे प्रलय की घोर घटाएँ पाँवों े नीचे अंगारे, सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ, निज हाथों से हँसते-हँसते, आगा लगा कर जलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा। हास्य-रुदन में, तूफानों में अमर असंख्यका बलिदानों में उदानों में, वीरानों में, अपमानों में, सम्मानों में, उन्नत मस्तक, उभरा सीना, पीड़ाओं में पलना होगा! कदम मिलाकर चलना होगा। उजियारे में, अंधकार में, कल कछार में, बीच धार में, घोर घृणा में, पूत प्यार में, क्षणिक जीत में, दीर्घ हार में, जीवन के शत-शत आकर्षक, अरमानों को दलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा। सम्मुख फैला अमर ध्येया पथ, प्रगति चिरंतन कैसा इति अथ, सुस्मित हर्षित कैसाशरम शलथ, असफल, सफल समान मनोरथ, सब कुछा देकर कुछ न माँगते, पावसा बनकर ढलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा। कुश कॉटों से सज्जत जीवन, प्रखर प्यार से वंचित यौवन, नीरवता से मुखरित मधुवन, पर-हित अर्पित अपना तन-मन, जीवन को शत-शत आहुति में, जलना होगा, गलना होगा। कदम मिलाकर चलना होगा।

— अटल बिहारी वाजपेयी (भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एवं प्रसिद्व कवि और लेखक) /

Kabir ke Dohe - CBSE Class 8 Hindi Notes