एक टोकरी भर मिदटी
किसी श्रीमान जमीदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्ा की झोंपड़ी थी ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तका बढ़ाने की इच्छा हुई वृद्धा से बहुतेरा कहा कि अपनी झंपड़ी हटा ले, पर वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी उसका प्रिय पति और इकलौता पुत्र भी उसी झोंपड़ी में मर गया था पतोह्ा भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़कर चल बसी थी अब यही उसकी पोती इस वृद्धावस्था मे एकमात्र आधार थी जब उसे अपनी पूर्वस्थिति
की याद आ जाती तो मार दुख के फूट-फूट कर रो
लगती थी और जब से उसने अपने श्रीमान पड़ोसी
की इच्छा का हाल सुना, तब से वह मृतप्राय हो
गई थी उस झोंपड़ी में उसका ऐसा कुछ मना लग
गया था कि बिना मेरे वहाँ से वह निकलना ही
नहीं चाहती थी। श्रीमान के सब प्रयतन निष्फल
हुए, तब वे अपनी जमींदारी चाल चलने लगे। बाल
की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर
उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्ज़ा कर
लिया और वृद्धा को वहाँ से निकाल दिया। बिचारी अनाथ तो थी ही, पास-पड़ोस में कहीं जाकर गहने लगी।

एक दिन श्रीमान उस झोंपड़ी के आस-पास टहल रहे थे और लोगों को काम बतला रहे थे कि इतनेमे वह वृद्धा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची। श्रीमान ने उसको देखते ही अपने नौकरों से कहा कि उसे यहाँ से हटा दो। पर वह गिड़गिड़ाकर बोली, "महाराज, अब तो झोंपड़ी तुम्हारी ही हो गई है। मैं उसे लेने नहीं आई हूँ महाराज क्षमा करे तो एक विनती है।" ज़मींदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा, "जब से यह झोंपड़ी छूटी है, तब से मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है। मैने बहुत कुछ समझञाया, पर वह एक नहीं मानती। यही कहा करती है कि अपने घर चल, वहीं रोटी खाऊँंगी। अब मैंने यह सोचा कि इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिट्टी लेकर उसी
का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी। इसे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। महाराज कृपा करके आज्ञा दीजिए तो इस टोकरी में मिटी ले जाऊँ!" श्रीमान ने आज्ञा दे दी।
वृद्धा झोंपड़ी के भीतर गई। वहाँ जाते ही उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। अपने आंतरिक दुख को किसी तरह सँभाल कर उसने अपनी टोकरी मिटटी से भर ली और हाथ से उठाकर बाहर ले आई। फिर हाथ जोड़कर श्रीमान से प्रार्ना करने लगी कि., "महाराज, कृपा करके इस टोकरी को जरा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लू" ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए। पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्त के बाहर है फिर तो उन्होंने अपनी सब ताकत लगाकर टोकरी को उठाना चाहा, पर जिस स्थान पर टोकरी रखी थी, वहाँ से वह एक हाथ भी ऊँची न हुईं वह लज्जत होकर कहने लगे कि., "नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।" यह सुनकर वृद्ा ने कहा, "महाराज, नाराज न हों.. आपसे तो एक टोकरी भर मिट्टी उठाई नहीं जाती और इस झोंपड़ी ें तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेंगे? आप ही इस बात पर विचार कीजिए"
जमॉंदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना क्त् भूल गए थे पर वृद्ा के उपर्यु्त वचन सुनते ही उनकी आँखें खुल गई कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्ा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।
—माधवराव सप्रे
लेखक से परिचय
हिंदी की प्रारभिक कहानियों ें 'एक टोकरी भर मिटी' का भी उल्लेख आता है। इसके लेखक माधवराव सप्रहै ऐसा माना जाता है कि ये लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक की

(1871-1926)
प्ेरणा से हिंदी में आए थे इनकी मातृभाषा मराठी थी इनका जन्म दमोह (मध्य प्रेश में हुआ था इन्होंे
लोकमान्य तिलक के चर्ित ग्ंथ गीता-रहस्य का मराठी से हिंदी में अनुवाद किया था स्वदेशी आंदोलन
और बायकॉट इनकी प्मुख कृतिया हैं। एक टोकरी भर मिटी जैसी कहानियाँ केवल घटनाएँ हीं ुनातीं बल्क मिटीसे उते हुएउ प्रशनो
को उठात हैंजो हमारे सामाजिक ताने-बाने मे गाँठ बनकर अटके हैं।
आइए, अब हम इस पाठ पर विस्तार से च्चा करें नीचे दी गई गतिविधियाँ इस कार् में आपकी सहायता करेगी।
मेरी समझ से
(क) निनमलिखित परनोंके उपयु्तउत्तर के सम्मुख ता (*) बनाइए कुछ प्र्नोंके एक से अधिक उत्तर भी हो सकते हैं।
(1) जमींदार को झोंपड़ी हटाने की आवश्यकता क्यों लगी?
• झंपड़ी जर्जर हो चुकी थी • झोपड़ी रास्ते में बाधा थी • वह अहाते का विस्तार करना चाहता था • वृद्ध से उसका कोई पराना झगड़ा था • क्रोध और झगड़ा करके • अदालत से अनुमति लेकर विनती और नम्रता से • • चुपचाप उठाकर ले गई (2) वृद्ा ने मिटी ले जाने की अनुमत कैसे माँगी?

(3) वृद्दा की पोती का व्यवहार किस भाव को दर्शाता है?
0 दया • लगाव • गुस्सा • डर
(4) कहानी का अंत कैसा है?
• दुखद • सुखद • प्रेरणादायक • सकारात्मक
(ख) हो सकता है कि आपके समूह के साथियोंने अलग-अलग उत्तर चुने हों अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए कि आपने ये उत्त ही क्यों चने?
मिलकर करे मिलान
(क) पाठ में े चुनकर कुछ वाक्य नीचे दिए गए हैं प्त्येक वाक्य के सामने दो-दो निष्कर्ष दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हेंइनके सवाधिक उपयु्त निष्कर्ों से मिलाइए।
| क्रम | वाक्य | निष्कर्ष |
| 1. | अब यही उसकी पोती इस वृद्वाकाल | वृद्वावस्था में वृद्धा का सहारा उसकी पोती ही थी। |
| 2. | में एकमात्र आधार थी। बाल की खाल निकालने वाले | वृद्धवावस्था में पोती का सहारा वृद्धा थी। ज़मींदार ने वकीलों से सलाह लेकर झोंपड़ी पर न्यायपर्वक कब्जा किया। |
| वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से उस झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया। आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं | ज़मींदार ने वकीलों को पैसे देकर कानूनी दावपेंच से झोंपड़ी पर क्जा किया। वृद्धा ने ज़मींदार को कमजोर साबित करने के लिए टोकरी उठाने | |
| 3. | उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मि्टी पड़ी है। | को कहा। |
| 4. | ज़मींदार साहब धन-मद से गर्वित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे। | धन और अहंकार ने जमीदार को मानवीयता और करुणा से दूर कर दिया था। संपत्त के घमंड को भूलकर जर्मींार अपने कर्तव्यो को पूरा कर रहे थो |
| 5. | कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होंने वृद्वा से क्षमा माँगी। | वृद्धा ने अपने व्यवहार पर पछताकर ज़मींदार से ्षमा माँगी अपनेद्ारा किए अन्याय पर पछताकर जमींदार ने कषमा माँगी। |
| 6. | सकंगे? कही | वृद्धा ने प्रतीकात्मक रूप से कहा कि अन्याय का नैतिक भार उठाना आसान नहीं है। वृद्धा ने ज़मींदार की उम्र और शक्त पर व्यं्य करते हुए यह बात |
| 7. | कृपा करके इस टोकरी को ज़रा हाथ लगाइए जिससे कि मैं उसे अपने सिर पर धर लू | वृबद्धा ने चतुराई से ज़मीदार को शर्मिदा करने की योजना बनाई। • वृद्धा ने टोकरी उठाने में सहायता के लिए ज़मींदार से विनम्र निवेदन किया। |
| 8. | उसे पुरानी बातों का स्मरण हुआ और उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी। | झोंपड़ीमें प्रवेश करते ही वृद्ा पुराने दिनों के कारण भावुक हो गई। झोंपड़ी में जाकर वृद्दा डर गई कि ज़मीदार उसे फिर से बाहर निकाल देगा और रोने लगी |
(ख) अपने मित्रं केउत्तर से अपने उत्तर मिलाइए और चर्चा कीजिए कि आपने कौन-से निष्करों का चनाव किया है और क्यों?
पंक्तियों पर चर्चा
पाठ से चुनकर कुछ पंक्तयाँ नीचे दी गई हैं इन्हे ध्यानपूर्वक पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर् समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और लिखिए।
(क) "आपसे एक टोकरी भर मिट्टी नहीं उठाई जाती और इस झोंपड़ी में तो हजारों टोकरियाँ मिट्टी पड़ी है। उसका भार आप जन्म-भर कैसे उठा सकेगे?"
(ख) "ज़मींदार साहब पहले तो बहुत नाराज हुए, पर जब वह बार-बार हाथ जोड़ने लगी और पैरों पर गिरने लगी तो उनके भी मन में कुछ दया आ गई। किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने को आगे बढ़। ज्यों ही टोकरी को हाथ लगाकर ऊपर उठाने लगे त्यों ही देखा कि यह काम उनकी शक्त के बाहर है"
सोच-विचार के लिए

पाठ को पुन: ध्यन से पढिए, पता लगाइए और लिखिए
(क) आपके विचार से कहानी का सबसेप्भावशाली पात्रकौन है और क्यों?
(ख) वृद्वा की पोती ने खाना क्यों छोड़ दिया था?
(ग) जमींार ने झोपड़ी पर कब्जा कै
से किया?
(घ) "महाराज कषमा करें तो एक विनती है ज़मीदार साहब के सिर हिलाने पर उसने कहा.." यहाँ ज़मीदार द्वारा सिर हिलाने की इस क्रिया का क्या अर्थ है?
(ड) "किसी नौकर से न कहकर आप ही स्वयं टोकरी उठाने आगे बढ़।" यहाँ जमींदार के व्यवहार में परिवर्तन का आरंभ दिखाई देता है पहले ज़मींदार का व्यवहार कैसा था? इस घटना के बाद उसके व्यवहार में क्या परिवर्तन आया?
(च) "उन्होंने वृद्धा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी!"जमींदार ने ऐसा क्यों किया?
अनुमान और कल्पना से
(क) यदि वृद्ा की पोती ज़मींदार से स्वयं बात करती तो वह क्या कहती?
(ख) यदि आप ज़मींदार की जगह होते तो क्या करते?
(ग) ज़मींदार को टोकरी उठाने में सफलता क्यों नहीं मिली होगी?
(घ) "झोपड़ीमें तो हजारों टोकरियाँ मिट्ी पड़ी है."। यहा केवल मिट्टी की बात की जा रही है या कुछ और बात भी छिपी है?
(संकेतमिद्टी किस बात का प्तीक हो सकती है? मिटी के बहाने ृद्ा क्या कहना चाहती है?)
(उ) यह कहानी आज से लगभग सवा सौ साल पहले लिखी गई थी इस कहानी के आधार पर बताइए कि भारत में स्त्ियों को किन-किन चुनौतियों का सामना करना पड़ता होगा?
बदली कहानी
कल्पना कीजिए कि कहानी कैसे आगे बढ़ती
• यदि ज़मींदार टोकरी उठाने से मना कर देता
0 यदि ज़मींदार टोकरी उठा लेता
• यदि जमींदार मिटी देने से मना कर देता
• यदि ज़मींदार एक स्त्री होती
0 यदि पोती ज़मींदार से अपनी झोंपड़ी वापस माँगती
अपे समूह के साथ इनमें से किसी एक स्थिति को चुनकर चर्चा कीजिए। इस बदली हुई कहानी को मिलकर लिखिए।
'कि' और 'की' का उपयोग

इन वाक्यों ें रेखांकित शब्दोंके प्रयोग पर ध्या द दीजिए इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। यहाँकि" ए संयोजक के रूपमेंप्रयोग हुआ है संयोजक का अरथ होता है मिलाने वाला। संयोजक शब्दों या वाक्यों को जोड़ने के लिए प्रयोग किए जात हैं यह हमें बताता है— क्या कहा गया, क्या सोचा गया, क्या देखा गया आदि
ज़मींदार के महल के पास एक गरीब, अनाथ वृद्वा की झोपड़ी थी।
यहाँ "की" एक संबंधसूचक कारक शब्द है। इसका प्रयोग संज्ञा या सर्वनाम का किसी अन्य शब्द के साथ संबंध बताने के लिए किया जाता है अन्य संबंधकारक शब्द हैका और के
अब नीचे दिए गएवाक्योंमें इन दोनों शब्दो का उपयुक्त प्रयोग कीजिए वृद्धा ने कहा वह झोंपड़ी को लेने नहीं आई है। 2. वह अपनी पोती चिंता में दुखी हो गई थी। 3.वृद्धा ने प्र्थना टोकरी को जरा हाथ लगाइए। 4. पोती हमेशा कहती थी वह अपने घर में ही खाना खाएगी। 5. झोोपड़ी मि्ी से वृद्ध चूल्हा बनाना चाहती थी। उसे विश्वास था मिट्टी का चूल्हा देखकर पोती खाना खाने लगेग
ी। .वृद्ञा आँखों से आसुओं धारा बहने लगी।
- उसने यह सोचा झोंपड़ी से मिटी ले जाकर चूल्हा बनाऊंगी वृद्वा के मन पीड़ा उसकी बातों में झलक रही थी।
10.जमींदार इतने लज्जित हुए टोकरी उठाने की बात मान ली
- उस ्ोंपड़ी हर दीवार वृद्धा यादों से भरी थी।
मुहावरे
"बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होने अदालत से झोंपड़ी पर अपना कब्जा कर लिया"
(क) इस वाक्य में मुहावरों की पहचान करके उ्हे रखांकित कीजिए। (ख) बाल' शब्द सेजुड़ निम्नलिखित मुहावरों क प्यो करते हुए वाक्य बनाइए • बाल बॉँका न होनाकुछ भी कषट या हानि न पहुँचना पर्ण रूप से सुरक्षित रहना। • बाल बराबर—बहुत सूक्षम। बहुत महीन या पतला। • बाल बराबर फर्क होना—ज़रा-सा भी भेद होना सूक्ष्मतम अंतर होना। बाल-बाल बचना—कोई विपत्त आने या हान पहुँचने में बहुत थोड़ी कमी रह जाना।
काल
नीचे दिए गए वाक्यो कोध्यानपूर्वक पढिए • इस झोंपड़ी मे से एक टोकरी भर मिटी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाऊँगी। • इस झोंपड़ी मे से एक टोकरी भर मिटी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पकाई। • इस झोंपड़ी में से एक टोकरी भर मिटी लेकर उसी का चूल्हा बनाकर रोटी पका रही हूँ।
यहाँ रेखांकित शब्दों से पता चल रहा है कि कार्य होने का समय या काल क्या है क्रिया के जिस रूप से यह पता चले कि कोई कार्य कब हुआ, हो रहा है या होने वाला है, उसे काल कहते हैं
काल के तीन भेद होते हैं—
- भूतकाल—यह बताता है कि कार्य पहले ही हो चुका है।
2.वर्तमान काल—यह बताता है कि कार्य अभी हो रहा है या सामान्य रूप से होता रहता है।
3.भविष्य काल—यह बताता है कि कार्य आने वाले समय या भविष्य में होगा।
नीचे दिए गए वाक्यों को वर्तमान और भविष्य काल में बदलिए
(क) वह गिड़िगिड़ाकर बोली।
(ख) श्रीमान ने आजञा दे दी।
(ग) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी।
(घ) ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उस झोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई।
(ड) उन्होंने वृद्ा से क्षमा माँगी और उसकी झोंपड़ी वापस दे दी।

वचन की पहचान
"उनके मन में कुछ दया आ गई"
"उनकी आँखें खुल गई" ऊपर दिए गएरेखांकित शब्दों े क्या अंतर है और क्यो? आपस में
चर्चा करके पता लगाइए।

आपने ध्यान दिया होगा कि शब्द में एक अनुस्वार-भर के अंतर से उसके अर्थमें अंतर आ जाता है। नीचे दिए गए रिक्त स्थानो में उयुक्तशब् भरिए
(क) वृद्धा झोंपड़ी के भीतर ।(गई/गई)
(ख) वृद्धा गिड़गिड़ाकर । (बोली/बोलीं)
(ग) पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया । (हैहं)
(घ) उसकी आँखों से आँसू की धारा बहने लगी । (थी/थीं)
(उ) उसने अपनी टोकरी मिट्टी से भर ली और बाहर ले ं। (आई/आई)
(च) झोंपड़ी में बसी पुानी यादें वृद्धा को रुला । (गई/गई)
(छ) पाठक देख सकते हैं कि कैसे एक छोटी-सी टोकरी ने बड़े बदलाव ला दिए । (ह/हैं)
कहानी की रचना
"यह सुनकर वृद्ा ने कहा, "महाराज, नाराज न हों तो..
इस पंक्त में लेखक ने जानबूझकर वृद्धा की कही हुई बात को अधूरा छोड़़ दिया है बात को अधूरा छोड़ने के लिए .' का उपयोग किया गया है इस प्रकार के वाक्यों और प्रोगो से कहानी का प्रभाव और बढ़जाता है। अनेक बार कहानी मे नाटकीयता लाने के लिए भी इस प्रकार के प्रयोग किए जाते हैं
(क) आपको इस कहानी मेंऐसी अनेक विशेषतएँ दिखाई देगी उन्हेंअपने समूह के साथ मिलकर ढूढ़िए और उनकी सूची बनाइए। (ख) इस कहानी की कुछ वशेषताओं को नीचे दिया गयाहै इनके उदाहरण कहानी से चुनकर लिखिए
| कहानी की विशेषताएँ | कहानी से उदाहरण |
| 1. प्रश्नोत्तरी शैली— कहानी में ऐसे प्रशन हैं जोपाठक को सोचने पर विवश कर देते हैं। | |
| 2. वर्णनात्मकता- लेखक ने जगहों औरभावनाओं का ऐसा चित्र खींचा है कि पाठकदृश्य को देख सकता है। | |
| 3. भावात्मकता— कहानी में करुणा, पछतावाऔर प्रेम जैसे गहरे भाव दिखते हैं। | |
| आगे बढ़ती है और प्रभावी बनती है। | |
| 5. नाटकीयता—कुछ दृश्य इतने प्रभावशाली हैंकि वे नाटक जैसे लगते हैं। | |
| 6चरित्र चित्रण— पात्रों के गुण, स्वभाव औरमन की स्थिति स्पष्ट रूप से दिखती है। |
शब्दकोश का उपयोग
आप जानते ही हैं कि हम शब्दकोश का प्रयोग करके शब्दों के विषय में अनेक प्रकार की जानकारी प्रापत कर सकते हैं नीचे कुछ शब्दों के अनेक अर् शब्दकोश से चुनकर दिए गए है इन शब्ों के जो अर् इस कहानी के अनुसार सबसे उपयुक्त हैं उन पर घेरा बनाइए
| वाक्य | रेखांकित शब्द का अर्थधनी, शोभायुक्त, शोभावान्, संपतिशाली, संप्न, पुरुषों के नामके पूर्व आदर सूचनार्थ लगाया जाने वाला शब्द। | ||
| 1.श्रीमान के सब प्रयतल निषफ्फल हुए | |||
| २. पतोह भी एक पाँच बरस की कन्या को छोड़करचल बसी थी। | अविवाहित लड़की, एक राशि का नाम, लड़की, बड़ी इलायची। | ||
| 3. ज़मींदार साहब को अपने महल का अहाता उसझोंपड़ी तक बढ़ाने की इच्छा हुई | राजा या रईस आदि के रहने का बहुत बड़ा और बढ़िया मकान,प्रासाद, अंतःपुर, पत्नी, उतरने की जगह। | ||
| 4. वह तो कई ज़माने से वहीं बसी थी।NC | काल, बहुत अधिक समय, सौभाग्य का समय, संसार, जगत,NCराज्यकाल, अवधि, युग, कार्यकाल, विलंब, देर, अतिकाल। | ||
| 5. यही उसकी पोती इस वृद्वाकाल में एकमात्र आधारथी | सहारा, आलंबन, पात्र(नाटक), नींव, बाँध, नहर, संबंध, बरतन,परिस्थितियाँ, अधिष्ठान, आश्रय देनेवाला, पालन करनेवाला। | ||
| गात्र आधार | |||

भावों की पहचान
"कृतकर्म का पश्चाताप कर उन्होने वृद् से क्षमा माँगी.
कहानी की इस पंक्त से कौन-कौन से भाव प्रकट हो रहे हैं? सही पहचाना, इस पंक्त से पश्चाताप और क्षमा के भाव प्रकट हो रहे हैं अब नीचे दी गई पंक्तयों मं प्रकट हो रहे भावों से उनका मिलान कीजिए—
| क्रम पंक्तियाँ | भाववाचक संज्ञा |
| 1वह लज्जत होकर कहने लगे— 'नहीं, यह टोकरी हमसे न उठाई जाएगी।' | मता /स्नेह |
| 2.वृद्ा के उप्युक्त वचन ुनते ही उनकी आँखें खुल गई | दुख/ पीड़ा |
| 3. उनके मन में कुछ दया आ गई | विनम्रता/विनय |
| 4. इससे भरोसा है कि वह रोटी खाने लगेगी। | अहंकार /घमंड |
| 5. महाराज क्षमा करें तो एक विनती है। | बोध/आत्मज्ञान |
| 6.अब यही उसकी पोती इस वृद्धाकाल में एकमात्र आधार थी | आस्था/विश्वास |
| 7. जमींदार साहब धन-मद से गर्ित हो अपना कर्तव्य भूल गए थे | जुड़ाव/ मोह |
| . उस झोपड़ी में उसका मन ऐसा कुछ लग गया था कि बिना मरे वहाँ से वह निकलना हीनहीं चाहती थी। | करूणा/दया |
| 9. जब उसे अपनी पूर्वस्थित की याद आ जाती तो मारे दुख के फूट-फूट कर रोने लगती थी। | क्रूरता /अन्याय |
| 10. बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोंपड़ी परअपना कब्जा कर लिया। | लज्जा / पछतावा |
वाक्य विस्तार
वृद्वा पहुँची'
यह केवल दो शब्दों से बना एक वाक्य है लेकिन हम इस वाक्य को बड़ा भी बना सकते हैं वह वृद्वा हाथ में एक टोकरी लेकर वहाँ पहुँची।' अब बात कुछ अच्छी तरह समझ में आ रही है कितु इसी वाक्य को हम और विस्तार भी दे सकते हैं जैसे— थकी हुई आँखों और कॉपते हाथो में टोकरी लिए वृद्ा धीरे-धीर दरवाजे पर पहुँची।
अब यह वाक्य अनेक अर्थ और भाव व्यक्त कर रहा है अब इसी प्रकार नीचे दिए गए वाक्यों का कहानी को ध्यान में रखते हुए विस्तार कीजिए। प्रत्येक वाक्य में लगभग 15-20 शब्द हो सकते हैं।
.एक डझोंपड़ी थी। 2.श्रीमान् टहल रहे थे। 3. वह खाने लगेगी। वृद्धा भीतर गई। 5. आगे बढ़।
संवाद फोन पर

(क) कल्पना कीजिए कि यह कहानी आज के समय की है। ज़मीदार ृदा की पोती को समझाना चाहता हैकि वह जिद छोड़़ दे और भोजन कर ले। उसने पोती को फोन किया है। अपनी कल्पना से दोनों की बातचीत लिखिए T
(ख) कल्पना कीजिए कि ज़मीदार और उसका कोई मित्र वृद्ा की झोंपड़ी हथियाने के बारे में मोबाइल पर लिखित संदेशोंद्वा चर्चा कर रहे है मित्रउसे समझा रहा है कि वह झोंपड़ी न ह़पे। उनकी इस लिखित चर्चा को अपनी कल्पना से भाव मु्रा (इमोजी) के साथ लिखिए।

उदाहरण—
• मित्र—इस विचार को छोड़़ दो, तु्हें आखिर किस बात की कमी है? 0 ज़मींदार— मुझे तुमसे उपदेश हीं सुनना है।

पोती की भावनाएँ
"मेरी पोती ने खाना-पीना छोड़ दिया है।"
(क) कहानी मे वृद्धा की पोती एक महतवपूरण पात्रहै, भले ही उसका उल्लेख केवल एक-दो पंक्तियो में ही हुआ है। कल्पना कीजिए कि आप ही वह पोती हैं। आपको अपने घर से बहुत प्यार है। अपने घर को बचाने के लिए जिलाधिकारी को एक पत्र लिखिए।
(ख) मान लीजिए कि वृद्दा की पोती दैनंदिनी (डायरी) लिखा करती थी कहानी की घटनाओं के आधार पर कल्पना कीजिए कि उसने अपनी डायरी में क्या लिखा होगा? स्वयं को पोती के स्थान पर रखते हुए वह दैनंदिनी लिखिए। उदाहरण के लिए
मेरी दैनीदिनी
2 मई—आज दादी घर पर आई तो बहुत परेशान थीं मैने बहुत पूछा। उन्होने बताया..
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) कहानी में वृद्ा की पोती अपने घर से बहुत प्यार करती थी आपके घर से अपने लगाव का अनुभव बताइए।
(ख) क्या कभी आपको किसी स्थान, वस्तु या व्यक्त से इतना लगाव हुआ है कि उसे छोड़ना मुश्किल लगा हो? अपना अनुभव साझा कीजिए।
(ग) कहानी में ज़मीदार अपने किए पर पश्चाताप कर रहा है। क्या आपने कभी किसी को उनके किए पर पछताते हुए देखा है? उस घटना के बारे में बताइए। यह भी बताइए कि उस पश्चाताप का क्या परिणाम निकला?
(घ) क्या कभी ऐसा हुआ कि आपने कोई काम गुस्से या अहंकार में किया हो और बाद में पछताए हों? फिर आपने क्या किया? उस अनुभव से आपने क्या सीखा?
न्याय और समता
कहानी में आपने पढ़ा कि एक ज़मीदार ने लालच के कारण एक स्त्ी का घर छीन लिया।
(क) क्या आपने किसी के साथ ऐसा अन्याय देखा, पढ़ा या सुना है? उसके बार में बताइए
(ख) ऐसी स्थितियोंसे निपटने के लिए आप क्या-क्या कर सकते हैं? आपके आस-पास के लोग क्या-क्या कर सकते हैं?
(ग) "सच्ची शक्त दया और न्याय में है" इस कथन पर अपने विचार लिखिए।
घर-घर की कहानी
क्या आपको अपने घर की कहानी पता है? उसे कब बनाया गया? कैसे बनाया गया? उसे बनाने के लिए कैसे-कैसे प्रयास किए गए? चलिए, अपने घर की कहानी की खोजबीन करते हैं
अपने घर के बड़े-बूढों से उनके बचपन के घरों के बारे में साक्षात्कार लीजिए। आज आप जिस घर में रह रहे हैं उसमें वे कब से रह रहे हैं? इसमें आने के पीछे क्या कहानी है, इसके बारे में भी बातचीत कीजिए। कक्षा में अपनी-अपनी कहानियाँ साझा कीजिए।
न्याय और करुणा से जु़ी सहायता
"बाल की खाल निकालने वाले वकीलों की थैली गरम कर उन्होंने अदालत से झोपड़ी पर कब्जा कर लिया।"
कहानी के इस प्रसंग को ध्यान में खते हुए नागरिक शिकायत प्रक्रिया के विषय में जानकारी प्ाप्त कीजिए। इसके बार में अपने घर और आस-पास के लोगों को भी जागरूक कीजिए
उदाहरण
• सार्वजनिक शिकायत सुविधा— भारत सरकार की इस वेबसाइट पर सभी भारतीय, केंद्र या राज्य सरकारों के किसी भी विभाग से जु़ी शिकायते कर सकते है। इस वेबसाइट पर भारत की 2२ भाषाओं में शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।
https://pgportal.gov.in
जनसुनवाई—प्र्येक राज्य और केंद्रशासित प्रदेश ने जनसुनवाई जैसी सुविधाओं को प्रारंभ किया हुआ है इंटरनेट सुविधाओं का उपयोग भी किया जा सकता है।
• सामाजिक सुरकषा कल्याण योजनाएँ भारत सरकार की सामाजिक कल्याण की योजनाओं के बारे में जानने के लिए निम्नलिखित वेबसाइट का उपयोग किया जा सकता है—
https://eshram.gov.in/hi/social-security-welfare-schemes
आज की पहेली
नीचे दिए गए अक्षों से सार्थक शब्द बनाइए
१. टकरई ओ टोकरी
2. य आद $=$
3. ईलवक् $=$
4. झु ओ ई प ड्अं
5. जद आ म्ईर अं
. त् आइ औ क ल्

हमारे देश में हजारों सालों से कहानियाँ सुनी-सुनाई जाती रही हैं। सैकड़ों साल पहले लिखी गई कहानियों की पुस्तके आज भी उपलब्ध है। ऐसी ही एक अदभुत पुस्तक हितोपदेश है जो आज भी विश्व में मनोरंजन और ज़ान प्रापत करने के उदेशय से पढ़ी-पदढ़ाई जाती है अपने पुस्तकालय से हितोपदेश की कहानियों की पुस्तक खोजकर पढ़ए और इसकी कोई एक कहानी क्षा में सुनाइए।
