पद - CBSE Class 9 Hindi Notes

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Chapter Study Guide & Summary

Comprehensive CBSE Class 9 Hindi chapter revision notes and NCERT study guide for पद. Aligned with the latest CBSE board curriculum and NCERT textbook guidelines, this resource provides chapter-wise summaries, core concepts breakdown, key definitions, and practice insights for school examinations and self-paced mastery.

Mastering the chapter "पद" is a crucial step for Class 9 students studying Hindi. This comprehensive study guide breaks down complex topics into clear, digestible explanations, helping learners grasp the fundamental principles, real-world applications, and theoretical concepts prescribed in the NCERT syllabus.

In the Class 9 board curriculum, "पद" tests analytical reasoning, conceptual depth, and structured problem-solving skills. Students should focus on understanding the underlying mechanisms, standard definitions, solved examples, and step-by-step methodologies to excel in both school unit tests and final board evaluations.

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Key Concepts & Syllabus Topics

Important Definitions & Terminology

पद Overview
The central theme and foundational concept covered in Class 9 Hindi Chapter 8, emphasizing conceptual clarity, NCERT curriculum alignment, and exam readiness.
NCERT Curriculum Alignment
Structured study material adhering strictly to CBSE board guidelines, learning objectives, and standardized assessment criteria for Class 9.
Active Recall & Revision
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Quick Revision & Key Points

Full NCERT Chapter: पद

काव्य खंड

समूचे जनसमूह में भाषा और भाव की एकता और सौहार्द का होना अच्छा है। — हजारीप्रसाद द्विवेदी

कुछ लिख के सो कुछ पढ़ के सो तू जिस जगह जागा सबेरे उस जगह से बढ़ के सो! — भवानीप्रसाद मिश्र

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रैदास

रैदास नाम से विख्यात संत रविदास का जन्म काशी (वाराणसी) में हुआ। उनका जीवन-काल 15वीं शताब्दी (सन् 1388–1518)* माना जाता है। रैदास संत कवियों में गिने जाते हैं। उन्होंने बाह्य आडंबरों का खंडन कर मन की शुद्धता और आंतरिक भक्ति को ही सच्चा धर्म माना है।

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रैदास ने अपनी काव्य-रचनाओं में सरल, व्यावहारिक ब्रजभाषा का प्रयोग किया है, जिसमें अवधी, राजस्थानी, खड़ी बोली और उर्दू-फारसी के शब्दों का भी मिश्रण है। उनकी सरल ब्रज भाषा में लिखी भक्ति रचनाएँ आदि श्री गुरु ग्रंथ साहिब जी में शामिल हैं और वे आज भी समानता, प्रेम और भाईचारे का संदेश देती हैं। उनकी रचनाएँ रैदास बानी में संकलित हैं।

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यहाँ रैदास के दो पद लिए गए हैं। पहले पद में बताया गया है कि जैसे चंदन-पानी, दीपक-बाती, मोती-धागा और बादले-मोर का संबंध अटूट होता है, वैसे ही भक्त से उसके आराध्य अलग नहीं हो सकते। इस पद में अनन्य भक्ति और आराध्य के प्रति समर्पण का भाव प्रकट होता है। दूसरे पद में भी आराध्य से भक्त का अटूट नाता व्यक्त किया गया है। वह तीर्थ और ब्रत छोड़ सकता है, पर प्रभु-चरणों की भक्ति नहीं। यह पद निष्ठा, विश्वास और अडिग भक्ति को व्यक्तित करता है।

*संदर्भ– हिंदी साहित्य कोश (भाग-2), नामवाची शब्दावली, ज्ञानमंडल लिमिटेड, वाराणसी

पद*

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(1) अब कैसे छूटे राम रट लागी। प्रभु जी तुम चंदन हम पानी, जाकी अंग-अंग बास समानी। प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा। प्रभु जी तुम दीपक, हम बाती, जाकी जोति बरे दिन राती। प्रभु जी तुम मोती, हम धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा। प्रभु जी तुम स्वामी, हम दासा, ऐसी भगति करे रैदासा।

(2) जो तुम तोरो राम मैं नहिं तोरो, तुम सौ तोरि कवन सौं जोरो। तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हरे चरन कमल एक भरोसां। जहाँ जहाँ जाओ तुम्हरी पूजा, तुम सा देव ओर नहिं दूजा। मैं अपनो मन हरि से जोरो, हरि सो जोरि सबन सो तोरों। सबही पहर तुम्हारी आसा, मन क्रम वचन कहै रैदासा।

*संदर्भ– रैदास बानी, (सं.) डॉ. शुकदेव सिंह (लय को ध्यान में रखते हुए वर्तनी संबंधी किंचित परिवर्तन)

पद 147

अभ्यास

एचना शे शंवाद

मेरे उत्तर मेरे तर्क

निम्नलिखित प्रश्नों के सटीक उत्तर चुनिए और यह भी बताइए कि आपको ये उत्तर उपयुक्त क्यों लगते हैं?

  1. “अब कैसे छूटे राम रट लागी” पंक्ति का भाव है? (क) नाम उच्चारण की कठिनाई (ख) नाम रटकर याद करना (ग) आराध्य का नाम जपना (घ) मित्रों का नाम रटना

  2. “प्रभु जी तुम चंदन हम पानी” पंक्ति में आराध्य और भक्त का संबंध किस रूप में व्यक्त हुआ है? (क) एकाकार और समरूप (ख) तरल और तीव्र सुगंध (ग) आश्रय और आश्रित (घ) द्रव और ठोस

  3. “तुम दीपक, हम बाती” से रैदास का क्या भाव है? (क) दीपक और बाती का कोई मेल नहीं होता है। (ख) दीपक बिना बाती भी जल सकता है। (ग) भक्त आराध्य से अधिक महत्वपूर्ण है। (घ) भक्त का आराध्य से मेल जीवन को आलोकित करता है।

  4. “जो तुम तोरो राम मैं नहिं तोरो” पंक्ति में रैदास का क्या आशय है? (क) परोपकारी भक्ति भाव (ख) आराध्य से अटूट संबंध (ग) सांसारिक मोह (घ) कर्मकांड पर बल

  5. “तीर्थ बरत न करूँ अंदेसा” पंक्ति से आप क्या समझते हैं? (क) तीर्थ और ब्रत आवश्यक नहीं हैं। (ख) तीर्थ और ब्रत सब आवश्यक हैं।

148 गंगा

(ग) तीर्थ जाने से मुक्ति निश्चित है। (घ) आराध्य के चरणों में सच्चा आश्रय है।

  1. सर्वव्यापक ईश्वर की अवधारणा किस पंक्ति में व्यक्त होती है? (क) “जहाँ जहाँ जाओ तुम्हरी पूजा” (ख) “जाकी जोति बरे दिन राती” (ग) “तुम दीपक, हम बाती” (घ) “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा”

अर्थ और भाव

नीचे दी गई पंक्तियों का अर्थ समझाते हुए भाव स्पष्ट कीजिए। (क) “प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।” (ख) “तीरथ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हारे चरन कमल एक भरोसाँ।”

मेरी समझ मेरे विचार

नीचे दिए गए प्रश्नों पर कक्षा में चर्चा कीजिए और उनके उत्तर लिखिए—

  1. “जो तुम तोरो राम में नहिं तोरो” पंक्ति में रैदास की अपने आराध्य में अटूट निष्ठा का भाव है। इससे आप क्या समझते हैं? विस्तार से लिखिए।
  2. रैदास ने तीर्थ और ब्रत के स्थान पर किस साधन को भक्ति का प्रमुख आधार माना है? आपके विचार से भक्ति के क्या आधार हो सकते हैं?
  3. दोनों पदों में भक्त और आराध्य के संबंध को किन-किन प्रतीकों/उपमाओं से व्यक्त किया गया है? लिखिए।

विद्या से संवाद

कविता का सौंदर्य

  • “प्रभु जी तुम घन बन, हम मोरा, जैसे चितवत चंद चकोरा।”

उपर्युक्त पंक्ति के रेखांकित अंश पर ध्यान दीजिए। इसमें अनुप्रास अलंकार का प्रयोग किया गया है। जिस रचना में व्यंजन वर्णों की आवृत्ति एक से अधिक बार होती है, वहाँ अनुप्रास अलंकार होता है।

पद 149

  • “प्रभु जी तुम मोती, हम धागा, जैसे सोने मिलत सुहागा।”

  • उपर्युक्त रेखांकित अंश में उपमा अलंकार है। किसी प्रसिद्ध वस्तु की समानता के आधार पर जब किसी वस्तु या व्यक्ति के रूप, गुण, धर्म का वर्णन किया जाता है तो वहाँ उपमा अलंकार होता है।

  • “तीर्थ बरत न करूँ अंदेसा, तुम्हारे चरन कमल एक भरोसा।”

  • उपर्युक्त रेखांकित अंश में रूपक अलंकार है। रूपक अलंकार वहाँ होता है जहाँ रूप और गुण की अत्यधिक समानता के कारण उपमेय में उपमान का आरोप कर अभेद स्थापित किया जाए।

अब आप अपनी पाठ्यपुस्तक में सम्मिलित कविताओं में अनुप्रास, उपमा और रूपक अलंकार वाली अन्य पंक्तियों को ढूँढ़कर लिखिए।

कविता की कुछ अन्य विशेषताएँ

नीचे दी गई सूची को ध्यान से देखिए। इस सूची में रैदास के दोनों पदों से कुछ विशेषताएँ चुनकर दी गई हैं। पदों में से चुनकर इन विशेषताओं को दर्शाती पंक्तियाँ लिखिए। उदाहरण के लिए पहली विशेषता के सामने पंक्ति दी गई है।

विशेषताएँ उदाहरण
अनन्य भक्ति भाव “जो तुम तोरो राम में नहि तोरो, तुम सौ तोरि कवन सौ जोरो।”
सरल और लोकधर्मी भाषा
उपमा और तुलना
लयात्मकता और गेयता/ध्वन्यात्मकता
दृढ़ निष्ठा और आस्था

विषयों से संवाद

  1. तीर्थ और ब्रत के स्थान पर रैदास ने आराध्य की भक्ति को प्रधान माना है। भक्तिकाल के कवि रैदास की तरह कबीर भी निराकार आराध्य की भक्ति पर बल देते हैं। तत्कालीन सामाजिक, सांस्कृतिक परिस्थितियों के आधार पर बताइए कि इसके क्या कारण हो सकते हैं? (संकेत – आप अपने सामाजिक विज्ञान के शिक्षक की सहायता भी ले सकते हैं।)

150 गंगा

  1. “सोने मिलत सुहागा” ‘सुहागा’ एक प्राकृतिक खनिज है जिसके प्रयोग से सोने की अशुद्धियाँ दूर हो जाती हैं और उसकी चमक बढ़ जाती है। ‘सुहागा’ का रासायनिक नाम और उसकी विशेषताएँ अपने विज्ञान के शिक्षक से चर्चा करके लिखिए।

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भाषा से संवाद

व्याकरण की बात

शब्दों की बात
  1. पठित पदों में से संज्ञा और सर्वनाम के तीन-तीन उदाहरण ढूँढ़कर लिखिए।
  2. रैदास के इन दोनों पदों में बहुत से ऐसे शब्द प्रयुक्त हुए हैं जिनके स्थान पर अन्य शब्दों का प्रयोग होता है। नीचे सूची में दिए गए शब्दों को देखिए। आप या आपके आस-पास के लोग इन शब्दों के लिए किन अन्य शब्दों का प्रयोग करते हैं? लिखिए।

मोरा, चकोरा, बाती, राती, सोने, तीरथ, बरत

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शूजन

  1. कक्षा में समूह बनाकर इन दोनों पदों को गाकर/पाठ करके प्रस्तुत कीजिए।
  2. कल्पना कीजिए कि पद में आई उपमाओं के आधार पर भक्त और आराध्य आपस में बात कर रहे हैं। इस दृश्य को आधार बनाकर संवाद-लेखन कीजिए।
  3. “जो तुम तोरो राम में नहिं तोरो” पंक्ति को आधार बनाकर अटूट मित्रता पर एक लघुकथा तैयार कीजिए।

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अरोखे से

आपने रैदास के पद पढ़े। अब आप रैदास की तरह ही महाराष्ट्र के संत कवि नामदेव के आगे दिए गए दो पद पढ़िए। निर्गुण संत काव्य परंपरा के संत कवि नामदेव का जन्म 13वीं–14वीं शताब्दी में महाराष्ट्र में हुआ। अन्य संत कवियों की भाँति नामदेव ने भी बाह्य आडंबरों, सामाजिक रूढ़ियों का विरोध कर सामाजिक समरसता, प्रेम एवं निराकार भक्ति से संबंधित पदों की रचना की है।

पद 151

(1) माइ न होती बापु न होता करम न होती काया। हम नहिं होते, तुम नहिं होते, कवन कहां ते आया। राम कोइ न किसही केरा। जैसे तरवर पंखि-बसेरा। चंद न होता, सूर न होता, पानी पवनु मिलाया। सास्त्र न होता बेद न होता, करमु कहां ते आया। खेचरि भूचरि तुलसी माला गुरपरसादी पाया। नामा प्रणवै परम तत्त कूं सतगुर मोहि लखाया।

(2) मोहि लागति तालाबेली। बछरा बिनु गाइ अकेली।। पानी बिनु ज्यं मीन तलफैं। ऐसे रामनाम बिनु नामा कलपै।। जैसे गाइ का बाछा छूटला। थन चोखता माखन घूटला।। नामदेउ नारायन पाया। गुर भेटत ही अलख लखाया।। जैसे विषै हेत परनारी। ऐसे नामे प्रीति मुरारी।। जैसे ताप ते निरमल घामा। तैसे रामनाम बिनु बापुरो नामा।।

अब अपनी कक्षा में चर्चा कीजिए और बताइए कि रैदास तथा नामदेव के पदों में क्या-क्या अंतर है और क्या-क्या समानताएँ हैं?

152 गंगा

रवोजबीन

रैदास के जीवन और पदों के विषय में पुस्तकालय और इंटरनेट से खोजकर पढ़िए। कुछ लिंक नीचे दिए गए हैं।

https://youtu.be/zZoAghETdgI

https://youtu.be/0vfpBMozOXY

शब्द-संपदा

चंदन एक प्रसिद्ध वृक्ष जिसकी लकड़ी एक प्रधान गंधद्रव्य है, संदल, चंदन को घिसकर बनवाया हुआ लेप
बास गंध, निवास, वासस्थान, वस्त्र
घन बादल, मेघ, अंधकार, समूह, विस्तार
चितवत/चितवन/चितवना किसी की ओर देखने का ढंग, दृष्टि, देखना, निरखना
चकोरा/चकोर तीतर की जाति का एक पक्षी जो चंद्रमा का परम प्रेमी माना जाता है
जोति/ज्योति प्रकाश, रोशनी, लौ, सूर्य, नक्षत्र
तीरथ/तीर्थ पुण्य क्षेत्र, वह पुण्य स्थान जहाँ विशेष धर्म के अनुयायी पूजा, स्नान आदि के लिए जाते हों, जैसे– काशी, प्रयाग, मथुरा आदि
अंदेसा सोच, चिंता, शक, आशंका, खतरा, हानि, दुविधा
पद - CBSE Class 9 Hindi Notes