जलाते चलो ये दियेस्ेह भर-भर कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा। भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी, मगर विश्ख पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी। बिना स्नेह विद्ुत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्ें, यों न पथ मिल सकेगा।।
जला दीप पहला तुम्हींने तिमिर की
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी,
तिमिर की सरित पार करने तुम्हीं ने
बना दीप की नाव तैयार की थी। बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।
युगों से तुमही ने तिमिर की शिला पर दिये अनगिनत है निरंतर जलाए, समय साक्षी है कि जलते हुए दीप अनगिन तुम्हरे पवन ने बुझाए।
मगर बुझ स्वयं ज्योति जो दे गए वे उसी से तिमिर को उजेला मिलेगा॥। दिये और तूफ्रान की यह कहानी चली आ रही और चलती रहेगी, जली जो प्रथम बार लौ दीप की स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी। रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा॥। द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
कवि से परिचय
अभी आपने जो कविता पढ़ी है, उसे हिंदी के प्रसिद्धव कवि द्वारिका प्रसाद माहेशवरी ने लिखा है। बाल साहित्य के चर्ित रचनाकारों में द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी का नाम प्रमुखता से
लिया जाता है उन्होने बच्चंके लिए बहुत-सी रचनाएँ लिखी हैं उनके द्वा लिखित 'हम सब सुमन एक उपवन के' जैसे गीत आज भी बहुत लोकप्रिय हैं

(1916–1998)
पाठ से
आइए, अब हम इस कविता से अपनी मित्रता को और घनिष्ठ बना लेते हैं इसके लिए नीचे कुछ गतिविधियाँ दी गई हैं। हो सकता है कि इन्हें करने के लिए आप कविता को फिर से पढ़ने की आवश्यकता अनुभव करे।
मेरी समझ से
(क) नीचे दए गएप्र्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने ता (*) बनाइए (1) निम्नलिखित में से कौन-सी बात इस कविता मे मुख्य रूप से कही गई है?
भलाई के कार्य करते रहना दीपावली के दीपक जलाना बल्ब आदि जलाकर अंधकार दूर करना तिमिर मिलने तक नाव चलाते रहना (2) "जला दीप पहलातुमहीं ने तिमर की, चुनौती प्थम बार स्वीकार की थी" यह वाक्य किससे कहा गया है?
तूफ़ान से मनुष्यों से दीपकों से तिमिर से
(ख) अब अपने मित्ों े साथ च्चा कीजिए और कारण बताइए कि आपने येउत्तर ही क्यों चने?
मिलकर करें मिलान
कविता में से चुनकर कुछ शब्द यहाँ दिए गए हैं अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अथां या संदभों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।
| शब्द | अर्थ या संदर्भ | |
| 1. अमावस | पूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रिमा 1. पूरा दिखाई देता है। | |
| 2. | पूर्णिमा | विद्ुत दिये अर्ात बिजली से जलने 2. वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण। |
| 3. | विद्युत-दिये 3. | समय, काल, युग संख्या में चार माने गए हैं — सत्ययुग ( (सतयुग),च््रेता |
| 4. युग | 4. | युग़,द्वापर युग और कलियुगा अमावस्या, जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता। |
पंक्तियों पर चर्चा
कविता मेंसे चुनकर कुछ पंक्तिा नीचे दी गई है इन्हे ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए

सोच-विचार के लिए
कविता को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और अपनी लेखन पुस्तिका मं लिखिए
(क) कविता में अधेरे या तिमिर के लिए किन वस्तुओं के उदाहरण दिए गए हैं?
(ख) यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमे क्या आशा की गई है? यह आशा क्यों की गई है?
(ग) कवितामें किसे जलाने और किसे बुझाने की बात कही गई है?
कविता की रचना
"जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा।"
इन पंक्तियों को अपने शिक्षक के साथ मिलकर लय सहित गाने या बोलने का प्रयास कीजिए। आप हाथों से ताल भी दे सकते हैं दोनों पंक्तयों को गाने या बोलने में समान समय लगा या अलग-अलग? आपने अवश्य ही अनुभव किया होगा कि इन पंक्तियों को बोलने या गाने में लगभग एक-समान समय लगता है। केवल इन दो पंक्तयों को ही नहीं, इस कविता की प्रत्येक पंक्त को गाने में या बोलने में लगभग समान समय ही लगता है। इस विशेषता के कारण यह
कविता और अधिक प्रभावशाली हो गई है। आप ध्यान देगे तो इस कविता में आपको और भी अनेक विशेष बाे दिखाई देंगी
(क) इस कविता को एक बार फिर से पढिए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस कविता की पंक्तयों को 2-4, 2-4 के क्रम में बाटा गया है आदि
(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।
मिलान
स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को रेखा खींचकर जोडिए
| स्तंभ 1 | स्तंभ २ |
| कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा। 1 | विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना 1. प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा। |
| 2. जलाते चलो ये दियेस्नेह भर-भर। | 2. विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है? |
| मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में 3. | विश्व की समस्याओं से एक न एक 3. |
| घिरी आ रही है अमावस निशा-सी। | दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा। |
| बिना स्नेह विद्ुत-दिये जल रहे जो 4. बुझाओ इन्हें यों न पथ मिल सकेगा। | दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास 4. करते रहिए। |
अन्मान या कल्पना से
अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए
(क) "दिये और तूफ़ान की यह कहानी चली आ रही और चलती रहेगी"
दीपक और तूफ़ान की यह कौन-सी कहानी हो सकती है जो सदा से चली आ रही है?
(ख) "जली जो प्रथम बार लौ दीप की स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी"
दीपक की यह सोने जैसी लौ क्या हो सकती है जो अनगिनत सालों से जल रही है?
शब्दों के रूप
"कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी" अमावस' का अर्थ है 'अमावस्या'। इन दोनों शब्दों का अर्थ तो समान है लेकिन इनके लिखने-बोलने में थोड़ा-सा अंतर है। ऐसे ही कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं इनसे मिलते-जुलते दूसे
शब्द कविता से खोजकर लिखिए। ऐसे ही कुछ अन्य शब्द आपस में चर्चा करके खोजिए और लिखिए
1दिया
2. उजेला
3. अनगिन
4.
5.
6.
अर्थ की बात
(क) "जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर" C इस पंक्त में 'चलो' के स्थान पर 'रहो' शब्द रखकर पढिए। इस शब्द के बदलने से पंक्ति के अर्थ मेंक्या अंतर आ रहा है? अपने समूह में चर्चा कीजिए
(ख) कविता मेंप्रत्येक शब्द का अपना विशेष महतव होता है यदि वे शब्द बदल दिए जाएँ तो कविता का अर्थ भी बदल सकता है और उसकी सुंदरता में भी अंतर आ सकता है। नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं पंक्तियो के सामने लगभग समान अरथों वाले कुछ शब्द दिए गए हैं आप उनमें से वह शब्द चुनिए, जो उस पंक्त में सबसे उपयुक्त रहेंगा—
1.बहाते चलो तुम वह निंतर (नैया, नाव, नौका) कभी तो तिमिर का मिलेगा॥ (तट, तीर, किनारा)
2.रहेगा पर दिया एक भी यदि (धरा, धरती, भूमि) कभी तो निशा को मिलेगा॥ (प्रात:, सुबह, सवेरा)
3. जला दीप पहला तुम्हीं ने की (अंधकार, तिमिर, अँधेरे) चुनौती बार स्वीकार की थी (प्रथम, अव्वल, पहली)
प्रतीक
(क) "कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा" निशा का अर्थ है—राता। सवेरा का अर् हैसुबहा
आपने अनुभव किया होगा कि कविता में इन दोनों शब्दों का प्रयोग 'रात' और 'सुबह' के लिए नहीं किया गया है। अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए कि निशा' और 'सवेरा' का इस कविता में क्या-क्या अर्थ हो सकता है।
(संकेत-—निशा से जड़ है 'अधेरा' और सवेरे से जडा है 'उजाला)
(ख) कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह में मिलकर इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें उपयुक्त स्थान पर लिखिए
| दिये | अँधेरा | अमावस | पूर्णिमार | दिवस | तिमिर | नाव | किनारा |
| शिला | ज्योति | उजेला | तूफ़्ान | लौ | स्वर्ण | जलना | बुझना |

(ग) अपने समूह में मिलकर निशा' और 'सवेर' के लिए कुछ और शब्द सोचिए और लिखिए। (संकेत—नीचे दिए गए चि्र देखिए और इन पर विचार कीजिए)

पंक्ति से पंक्ति
"जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी"
कविता की इस पंक्त को वाक्य के रूप मे इस प्रकार लिख सकते हैं "तुमहीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी।' अब नीचे दी गई पंक्तियों को इसी प्रकार वाक्यो के रूप में लिखिए
- बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर।
- जलाते चलो ये दियेस्ेह भर-भर।
- बुझाओ इन्हें यों न पथ मिल सकेगा।
- मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।
सा/सी/से का प्रयोग
"घिरी आ रही है अमावस निशा-सी स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी"
इन पंक्तियों में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खिंची है। इनमें "सी' शब्द पर ध्यान दीजिए। यहाँ 'सी' शब्द समानता दिखाने के लिए प्रयोग किया गया है। 'सा/सी/से' का प्रयोग जब समानता दिखाने
के लिए किया जाता है तो इनसे पहले योजक चिहुन (-) का प्रयोग किया जाता है। अब आप भी विभिन्न शब्दों के साथ 'सा/सी/सेका प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना से पाँच वाक्य अपनी लेखन-पुस्तिका में लिखिए।
पाठ से आगे
आपकी बात
(क) "रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा" यदि हर व्यक्त अपना कत्तव्य समझ ले और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करे तो पूरी दुनिया सुदर बन जाएगी। आप भी दूसरों के लिएप्रतिदिन बहुत-से अच्छे कार्य करते होंगे। अपने उन कायों के बारे में बताइए
(ख) इस कविता में निराश न होने, चुनौतियों का सामना करने और सबके सुख के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया है। यदि आपको अपने किसी मित्र को निराश न होने के लिए प्रेरित करना हो तो आप क्या करेंगे? क्या कहेंगे? अपने समूह में बताइए।
(ग) क्या आपको कभी किसी ने कोई कार्य करने के लिए प्रित किया है? कब? कैसे? उस घटना के बारे में बताइए
अमावस्या और पूर्णिमा
(क) "्भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी"
आप अमावस्या और पूर्णिमा के बारे में पहले ही पढ़ चुके हैं क्या आप जानते हैंकि अमावस्या और पूर्णिमा के होने का क्या कारण है?
आप आकाश में रात को चंद्रमा अवश्य देखते होंगे क्या चंद्रमा प्रतिदिन एक-सा दिखाई देता है? नहीं चं्रमा घटता-बढ़ता दिखाई देता है। आइए जानते हैं कि ऐसा कैसे होता है आप जानते ही हैं कि चंद्रा पृथ्वी की परिक्रमा करता है जबकि पृथ्वी सूर्य की आप यह भी जानते हैं कि चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं होता। वह सूर्य के प्रकाश से ही चमकता है।
चं्रमा की कला धीरे-धीर बढ़ती रहती है और पूर्णिमा की रात चंद्रमा पूरा दिखने लगता है। इसके बाद कला धीरे-धीरे घटती रहती है और अमावस्या वाली रात चाँद दिखाई नहीं देता चंद्रा की कलाओंके घटने के दिनों को 'कृषण पक्ष' को कहते हैं 'कृषण' शब्द का एक अर्थ काला भी है। इसी प्रकार चंद्रमा की कलाओं के बढ़ने के दिनों को 'शुक्ल पक्ष कहते हैं 'शुक्ल' शब्द का एक अर्थ 'उजला' भी है।

(ख) अब नीचे दिए गए चित्रें अमावस्या, पूर्िा,कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को पहचानिए और ये नाम उपयुक्त स्थानों पर लिखिए
(यदि पहचानेमें कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं)

आपने तिथिपत्र (कैलेंडर) अवश्य देखा होगा। उसमें साल के सभी महीनों की तिथियों की जानकारी दी जाती है।
नीचे तिथिपत्र के एक महीने का पृष्ठ दिया गया है इसे ध्यान से देखिए और प्र्नों के उत्तर दीजिए
| जनवरी202311-30 पौष 1-11 माघ, शक 1944 | |||||
| रविवार | 1दशमी (शुक्ल) | 8द्रितीया (कृषण) | 15अ्टमी (कृष्ण) | 22प्रतिपदा (शुक्ल) | 29अष्टमी (शु्ल) |
| सोमवार | 2एकादशी (शुक्ल) | 9द्रितीया (कृष्प) | 16नवमी (कृष्ण) | 23द्रितीया शुक्ल) | 30नवमी (शु्ल) |
| मंगलवार | 3द्वादशी (शुक्ल) | 10तृतीया (कृषण) | 17दशमी (कृष्ण) | 24तृतीया (शुक्ल) | 31दशमी (शुक्ल) |
| बुधवारG | त्रयोदशी (शुक्ल) | 11चतुर्थी (कृ्ण) | 18एकादशी (कृष्ण) | 25चतुर्ी (शुक्ल) | |
| गुरुवारG | 5चतुर्दशी (शुक्ल) | 12पंचमी (कृष्ण) | 19द्वादशी (कृषण) | 26वसंत पंचमी(शुक्ल) | |
| शुक्रवार | पूर्णिमा | 13ष्ठी (कृष्ण) | 20त्रयोदशी (कृषण) | 27पष्ठी (शुकल) | |
| शनिवार | 7प्रतिपदा (कृष्ण) | 14सप्तमी (कृष्ण) | 21अमावस्या | 28सप्तमी (शुक्ल) | |
(क) दिए गए महीने में कुल कितने दिन हैं?
(ख) पूर्िमा और अमावस्या किस दिनॉक और वार को पड़ रही है?
(ग) कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पकष की सप्मीमें कितने दनों का अंतर है?
(घ) इस महीने में कृषण पक्ष में कुल कितने दिन हैं?
(उ) वसंत पंचमी' की तिथि बताइए।

आज की पहेली
समय साक्षीहै कि जलते हुए दीप अनगिन तुम्हरे पवन ने बुझाए 'पवन' शब्द का अर्थ है हवा।
नीचे एक अक्षर-जाल दिया गया है इसमें 'पवन' के लिए उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग नाम या शब्द छिपे हैं आपको उन्हें खोजकर उन पर घेरा बनाना है, जैसा एक हमने पहले से बना दिया है। देखते है, आप कितने सही नाम या शब्द खोज पाते हैं।
| बा | द | ल | ई | ब |
| प | अ | नि | ल | या |
| व | क | स | मी | ऱ |
| न | ह | वा | यु | ब |
| मा | रु | त | स | ड |
खोजबीन के लिए
कविता संबंधित कुछ रचनाएँ दी गई ै, इ्हे पुस्तक में दिए गए क्यू.आर. कोड की सहायता से पह़, देखें व समझें।
•हम सब सुमन एक उपवन के • बढ़ चलो रोज बदलता कैसे चाँद भाग 1 •रोज बदलता कैसे चाँद भाग 2